UGC के नए नियमों पर आचार्य प्रमोद कृष्णम का बयान: एकता और सामाजिक समरसता की अपील

 
 Acharya Pramod Krishnam on UGC New Rules: Unity Over Division | Caste Discrimination Debate 2026

आज हम एक ऐसे बयान पर बात करने जा रहे हैं, जिसने इन दिनों सोशल मीडिया से लेकर न्यूज़ चैनलों तक खूब हलचल मचा रखी है। कल्कि पीठाधीश्वर आचार्य प्रमोद कृष्णम ने UGC के नए नियमों को लेकर जो कहा है, वो सिर्फ एक प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि समाज को आईना दिखाने वाली बात है। ये नियम उच्च शिक्षा में जाति-आधारित भेदभाव को रोकने के मकसद से लाए गए हैं, लेकिन इन्हें लेकर देशभर में बहस छिड़ी हुई है। कोई इन्हें सवर्ण विरोधी बता रहा है, तो कोई इसे सामाजिक एकता की दिशा में बड़ा कदम मान रहा है।

इसी बीच आचार्य प्रमोद कृष्णम का बयान सामने आया, जो दिल को छू लेने वाला है। 28 जनवरी 2026 को उत्तर प्रदेश के हापुड़ जिले के श्यामनगर गांव में एक शोक सभा में शामिल होने पहुंचे आचार्य जी ने मीडिया से खुलकर बात की। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि आज देश को तोड़ने की साजिशें हो रही हैं। जाति और धर्म के नाम पर समाज को बांटकर भारत को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है। उनका कहना था कि कुछ ताकतें जानबूझकर समाज में नफरत और विभाजन फैलाना चाहती हैं, ताकि हमारी एकता टूट जाए।

आचार्य जी ने बेहद भावुक लहजे में कहा कि आज के समय में अगर कोई सबसे बड़ा मुद्दा है, तो वो देश की एकता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि जाति और धर्म के नाम पर किसी भी तरह का भेदभाव स्वीकार नहीं किया जा सकता। जब कोई संत इस तरह की बात करता है, तो उसके शब्द सिर्फ बयान नहीं रहते, बल्कि समाज के लिए संदेश बन जाते हैं। उनकी बातों में वो दर्द भी झलकता है, जो आज के बंटे हुए माहौल को देखकर हर संवेदनशील इंसान महसूस करता है।

उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार से भी अपील की कि देश की एकता और सामाजिक सद्भाव को मजबूत करने के लिए ठोस और प्रभावी कदम उठाए जाएं। आचार्य जी का मानना है कि जातियों के नाम पर जो भेदभाव समाज में गहराई तक बैठ गया है, उसे जड़ से खत्म करना बेहद जरूरी है। लेकिन उन्होंने ये भी साफ किया कि ये जिम्मेदारी सिर्फ सरकार की नहीं है। समाज का हर व्यक्ति, हर नागरिक इसमें बराबर का भागीदार है।

आचार्य प्रमोद कृष्णम ने ये भी कहा कि हमें खुद से सवाल पूछना होगा। क्या हम रोजमर्रा की जिंदगी में जाति और धर्म के नाम पर किसी को जज करते हैं? क्या छोटी-छोटी बातों पर हम एक-दूसरे से लड़ पड़ते हैं? उन्होंने याद दिलाया कि आखिरकार हम सब भारतीय हैं। हमारी पहचान, हमारी ताकत, हमारी संस्कृति – सब कुछ हमारी एकता में ही छिपा है।

इसके अलावा उन्होंने शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती से जुड़े विवाद पर भी अपनी राय रखी। आचार्य जी ने कहा कि इस मामले में पुलिस और प्रशासन को ज्यादा संयम और समझदारी दिखानी चाहिए थी। जो मुद्दा पहले सिर्फ प्रदेश स्तर तक सीमित था, वो अब राष्ट्रीय स्तर पर पहुंच गया है, और ये सनातन धर्म के लिए चिंता का विषय है। उन्होंने आशंका जताई कि कुछ शक्तियां जानबूझकर ऐसे विवादों को हवा दे रही हैं, ताकि सनातन परंपराओं को कमजोर किया जा सके और समाज में भ्रम फैले।

आचार्य जी ने सभी संतों, धर्माचार्यों और जिम्मेदार नागरिकों से अपील की कि ऐसे समय में संयम, विवेक और एकजुटता सबसे जरूरी है। भारत विविधताओं का देश है, लेकिन उसकी असली ताकत हमेशा से उसकी एकता रही है। अगर हम बंट गए, तो हमारी ताकत भी बिखर जाएगी।

अंत में उन्होंने एक दुखद घटना पर भी गहरा शोक व्यक्त किया। महाराष्ट्र में हुए विमान हादसे में उपमुख्यमंत्री अजित पवार के निधन को उन्होंने देश की राजनीति और सार्वजनिक जीवन के लिए बड़ी क्षति बताया। उन्होंने दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की और शोक संतप्त परिवार के प्रति संवेदना जताई।

दोस्तों, आचार्य प्रमोद कृष्णम का ये बयान हमें रुककर सोचने पर मजबूर करता है। UGC के नियम कुछ भी हों, लेकिन अगर हम हर मुद्दे को जाति और धर्म के चश्मे से ही देखेंगे, तो असली समस्या कभी हल नहीं होगी। असली जरूरत है एकता की, समझदारी की और एक-दूसरे को अपनाने की। 

Tags