50 की उम्र के बाद सेहत की सबसे मजबूत ढाल है वयस्क टीकाकरण
■ सिर्फ बच्चों के लिए नहीं, वयस्कों के लिए भी टीकाकरण है ज़रूरी
■ भारत में 80 प्रतिशत से अधिक वयस्कों को इसकी जानकारी ही नहीं
■ अपोलो हॉस्पिटल लखनऊ ने शुरू किया एडल्ट वैक्सीनेशन सेंटर
भारत को भले ही एक युवा देश माना जाता हो, जहां औसत आयु लगभग 28 वर्ष है, लेकिन देश की जनसंख्या संरचना तेजी से बदल रही है। अनुमान है कि वर्ष 2030 तक भारत में बुज़ुर्गों की संख्या 19.3 करोड़ तक पहुंच जाएगी, जो कुल जनसंख्या का लगभग 13 प्रतिशत होगी। संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष (UNFPA) के अनुसार, वर्ष 2022 से 2050 के बीच 80 वर्ष से अधिक आयु के लोगों की संख्या में लगभग 279 प्रतिशत की वृद्धि होने की संभावना है। यह आंकड़े स्वस्थ वृद्धावस्था के लिए ठोस स्वास्थ्य पहलों की आवश्यकता को स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं।
बढ़ती उम्र में पहले से मौजूद बीमारियाँ (को-मॉर्बिडिटी) संक्रमण के जोखिम को और बढ़ा देती हैं। इसी कारण विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) भी जीवन के प्रत्येक चरण में टीकाकरण को स्वस्थ जीवन का अहम आधार मानता है। इसके बावजूद भारत में वयस्क टीकाकरण को लेकर जागरूकता बेहद कम है। विभिन्न अध्ययनों के अनुसार, देश में 80 प्रतिशत से अधिक वयस्क यह नहीं जानते कि बचपन के बाद भी टीकाकरण की जरूरत होती है। दुर्भाग्यवश, यह कमी केवल आम जनता तक सीमित नहीं है, बल्कि स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े कई लोगों में भी वयस्क टीकाकरण को लेकर जागरूकता का अभाव देखा जाता है।
इसी आवश्यकता को समझते हुए अपोलो हॉस्पिटल, लखनऊ ने वयस्कों और बुज़ुर्गों के लिए विशेष एडल्ट इम्यूनाइजेशन सेंटर की शुरुआत की है। यह सेंटर एक ही स्थान पर विशेषज्ञ चिकित्सकों की निगरानी में उम्र, जीवनशैली और पूर्व रोगों के अनुसार वैज्ञानिक सलाह एवं सुरक्षित टीकाकरण की सुविधा प्रदान करेगा।इस वैक्सीनेशन सेंटर का उद्घाटन अपोलो हॉस्पिटल लखनऊ के चेयरमैन, इंटरनल मेडिसिन विशेषज्ञ प्रो. आर. सी. आहूजा द्वारा किया गया।
इस अवसर पर अपोलोमेडिक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल के एमडी एवं सीईओ डॉ. मयंक सोमानी ने कहा,उम्र बढ़ने के साथ शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती जाती है, ऐसे में वयस्क टीकाकरण बेहद आवश्यक हो जाता है। अपोलो में शुरू किया गया यह इम्यूनाइजेशन सेंटर लोगों को बीमारी होने के बाद नहीं, बल्कि पहले ही खुद को सुरक्षित करने के लिए प्रेरित करेगा। यहां फ्लू, न्यूमोकोकल, शिंगल्स (हर्पीस जोस्टर), टेटनस-डिप्थीरिया, एचपीवी, हेपेटाइटिस ए और बी जैसे जरूरी टीकों की न केवल जानकारी दी जाएगी, बल्कि व्यक्तिगत जरूरत के अनुसार टीकाकरण भी किया जाएगा।”
विशेषज्ञों का मानना है कि समय पर वयस्क टीकाकरण से लंबे समय तक कमजोरी, बार-बार अस्पताल में भर्ती होने और कार्यक्षमता में गिरावट जैसी समस्याओं को काफी हद तक रोका जा सकता है। इससे न केवल व्यक्ति स्वस्थ रहता है, बल्कि परिवार पर पड़ने वाला मानसिक और आर्थिक बोझ भी कम होता है।टीकाकरण कोई एक बार की प्रक्रिया नहीं, बल्कि पूरे जीवन की सुरक्षा कवच है। सही समय पर वयस्क और बुज़ुर्ग टीकाकरण अपनाकर कई गंभीर बीमारियों से बचाव संभव है और स्वस्थ, सक्रिय जीवन सुनिश्चित किया जा सकता है।
