प्रेम विवाह के बाद पिता ने जीते-जी किया बेटी का पिंडदान, अर्थी निकालकर किया अंतिम संस्कार

After a love marriage, the father performed the last rites of his daughter while she was still alive.
 
After a love marriage, the father performed the last rites of his daughter while she was still alive.
कटिहार: बिहार के कटिहार जिले से एक ऐसी झकझोर देने वाली घटना सामने आई है, जिसने पारिवारिक रिश्तों और सामाजिक ताने-बाने पर एक बार फिर बहस छेड़ दी है। यहाँ एक युवती द्वारा दूसरे समुदाय के युवक से प्रेम विवाह करने और अदालत में माता-पिता को पहचानने से इनकार करने के बाद, गुस्से और दुख से भरे पिता ने अपनी जीवित बेटी का पुतला बनाकर उसकी अर्थी निकाली, दाह संस्कार किया और बाद में बकायदा श्राद्ध कर्म भी संपन्न कराया। पिता का साफ कहना है कि उनके लिए उनकी बेटी अब इस दुनिया में नहीं रही।

कोचिंग क्लास से शुरू हुई थी प्रेम कहानी


​जानकारी के अनुसार, यह पूरा मामला रौतारा थाना क्षेत्र का है। करीब एक साल पहले मैट्रिक (10वीं) की कोचिंग के दौरान गांव के ही एक अन्य समुदाय के युवक से युवती की मुलाकात हुई थी। धीरे-धीरे दोनों के बीच बातचीत बढ़ी और यह दोस्ती प्यार में बदल गई। मैट्रिक की परीक्षा खत्म होने के बाद कुछ समय के लिए दोनों का संपर्क टूटा, लेकिन 11वीं कक्षा में दाखिला लेने के बाद जब युवती ने दोबारा कोचिंग जाना शुरू किया, तो दोनों का मिलना-जुलना फिर शुरू हो गया।


​लापता होने के बाद पुलिस ने किया बरामद


​बीती 12 मई को युवती घर से कोचिंग जाने की बात कहकर निकली थी, लेकिन देर शाम तक वापस नहीं लौटी। काफी खोजबीन के बाद जब उसका कुछ पता नहीं चला, तो परेशान परिजनों ने स्थानीय रौतारा थाने में उसकी गुमशुदगी की प्राथमिकी (FIR) दर्ज कराई। मामला दर्ज होने के महज पांच दिनों के भीतर पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए युवती और युवक को बरामद कर लिया और उन्हें बयान दर्ज कराने के लिए कटिहार अदालत में पेश किया।


​अदालत में माता-पिता को पहचानने से किया इनकार

इस कहानी में सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब कटिहार कोर्ट परिसर में मजिस्ट्रेट के सामने बयान दर्ज कराते समय युवती ने अपने ही माता-पिता को पहचानने से साफ इनकार कर दिया। उसने युवक के साथ रहने की इच्छा जताई। चूंकि कानूनन वयस्क होने पर हर नागरिक को अपनी मर्जी से जीवन जीने का अधिकार है, इसलिए अदालत में दिए गए बयान के आधार पर पुलिस ने युवती को उसकी मर्जी के अनुसार जाने की अनुमति दे दी। वर्तमान में वह युवक के साथ ही रह रही है।


​आहत पिता ने उठाया यह कदम


​बेटी के इस बर्ताव से गहरे सदमे और सामाजिक अपमान से आहत पिता ने एक कठोर निर्णय लिया। उन्होंने पूरे समाज के सामने घोषणा की कि उनकी बेटी अब उनके लिए मर चुकी है। इसके बाद उन्होंने बाकायदा बेटी का एक पुतला तैयार करवाया, उसकी अर्थी सजाई और पूरे मोहल्ले में शव यात्रा निकालते हुए श्मशान घाट पर उसका अंतिम संस्कार किया। इतना ही नहीं, घर लौटने के बाद हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार मुंडन करवाकर बेटी का श्राद्ध कर्म और पिंडदान भी किया गया।
​यह घटना इस समय पूरे इलाके में चर्चा का विषय बनी हुई है, जो व्यक्तिगत स्वतंत्रता और पारिवारिक भावनाओं के बीच के गहरे टकराव को बयां करती है।

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