NEET छात्रा की रहस्यमयी मौत के बाद गर्ल्स हॉस्टलों की आड़ में चल रहे अवैध नेटवर्क का खुलासा

Illegal Network Operating Under the Guise of Girls' Hostels Exposed Following Mysterious Death of NEET Student
 
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लखनऊ, 14 मार्च 2026: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में आज से ऑर्थोपेडिक सर्जरी के क्षेत्र में एक नए अध्याय की शुरुआत हुई। जॉइंट केयर फाउंडेशन के तत्वावधान में हयात रीजेंसी में दो दिवसीय 'इंडिया एंटीरियर हिप फाउंडेशन कोर्स-2026' शुरू हुआ। इस कार्यक्रम में देश-विदेश के दिग्गज सर्जनों ने हिप सर्जरी की अत्याधुनिक बारीकियों को साझा किया।

तकनीक और कौशल का संगम

कोर्स के समन्वयक और विख्यात रोबोटिक जॉइंट रिप्लेसमेंट सर्जन डॉ. सौरव शुक्ला ने एक पत्रकार वार्ता में बताया कि इस दो दिवसीय कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य ऑर्थोपेडिक सर्जनों को लेटेस्ट सर्जिकल तकनीकों, हैंड्स-ऑन प्रैक्टिकल ट्रेनिंग और शैक्षणिक उत्कृष्टता से लैस करना है।

रोबोटिक सर्जरी का महत्व: डॉ. शुक्ला ने आधुनिक तकनीक पर जोर देते हुए कहा, "आज रोबोटिक सर्जरी के माध्यम से सर्जरी में सटीकता (Accuracy) कई गुना बढ़ गई है। इसमें कम रक्तस्राव और बिना ज्यादा चीरा-फाड़ी के सर्जरी संभव है, जिससे मरीज रिकवरी भी तेजी से होती है।"

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देश-विदेश के विशेषज्ञों का जमावड़ा

इस कोर्स में भारत और विदेश के 80 से अधिक ऑर्थोपेडिक सर्जन हिस्सा ले रहे हैं। खास बात यह है कि इसमें 20 अलग-अलग राज्यों के डेलीगेट्स शामिल हुए हैं।

प्रमुख विशेषज्ञ (Faculty Contributors):

  • अंतरराष्ट्रीय: बेल्जियम से डॉ. फ्रांज जे. वंदेपुट्टे, इजरायल से डॉ. नवीन गरेब (वर्चुअल) और अमेरिका से डॉ. अनय पटेल (वर्चुअल)।

  • राष्ट्रीय: सुनील दाश, प्रो. राजेश मल्होत्रा (दिल्ली), डॉ. महेश कुलकर्णी (पुणे), डॉ. विजय कुमार (AIIMS दिल्ली), डॉ. कार्तिक पटेल (अहमदाबाद), डॉ. कृष्ण किरण (हैदराबाद) और डॉ. नारायण हुल्से (बेंगलुरु)।

चिकित्सा क्षेत्र के लिए बड़ी पहल: फेलोशिप की घोषणा

जॉइंट केयर फाउंडेशन ने इस प्रोग्राम के दौरान 'इंडिया एंटीरियर हिप फाउंडेशन कोर्स फेलोशिप' देने का भी निर्णय लिया है। डॉ. सौरव शुक्ला ने विश्वास जताया कि यह कोर्स पूरे भारत में हिप सर्जरी के स्तर को ऊपर उठाने के लिए एक मजबूत और स्थाई एकेडमिक प्लेटफॉर्म साबित होगा। यह कोर्स न केवल सर्जनों के कौशल विकास (Skill Development) में सहायक होगा, बल्कि भविष्य में मरीजों को अधिक सुरक्षित और सटीक इलाज सुनिश्चित करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।

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