योगी मॉडल से संकट से समृद्धि की ओर बढ़ी खेती-किसानी , अन्नदाताओं ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर जताया भरोसा

Farming moved from crisis to prosperity with Yogi model
Food donors expressed confidence in Chief Minister Yogi Adityanath
 
योगी मॉडल से संकट से समृद्धि की ओर बढ़ी खेती-किसानी , अन्नदाताओं ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर जताया भरोसा

लखनऊ,  जनवरी 2026 ।  उत्तर प्रदेश ने जब 2017 में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर भरोसा किया, तो खेती-किसानी का परिदृश्य पूरी तरह बदल गया। खाद्यान्न संकट, कालाबाजारी, बिचौलियों और अराजक व्यवस्था से जूझ रहे किसान पौने नौ वर्ष में ही समृद्धि के पथ पर अग्रसर हो गए। योगी मॉडल का ही परिणाम है कि देश की कुल कृषि भूमि का महज 10 प्रतिशत हिस्सा रखने वाला उत्तर प्रदेश आज राष्ट्रीय खाद्यान्न उत्पादन में 21 प्रतिशत योगदान दे रहा है।

2017 से पहले जहां कृषि क्षेत्र की विकास दर सिंगल डिजिट में सिमटी रहती थी, वहीं योगी सरकार के कार्यकाल में कृषि एवं इससे जुड़े क्षेत्रों की विकास दर पिछले तीन वर्षों में 14 प्रतिशत से अधिक रही है। आज यूपी का किसान वास्तव में “खेत से खुशहाली” की यात्रा तय कर चुका है।

डबल इंजन सरकार से खेती में उत्पादकता का नया युग

केंद्र और राज्य की डबल इंजन सरकार की नीतियों ने उत्तर प्रदेश की खेती को उत्पादकता और आत्मनिर्भरता के नए दौर में पहुंचा दिया है। 2017 के पहले किसान खुद को हाशिये पर खड़ा महसूस करता था, लेकिन सरकार की बदली सोच और स्पष्ट नीतियों ने खेती को विकास की धुरी बना दिया।

सत्ता संभालते ही योगी सरकार ने ₹36 हजार करोड़ का किसान कर्ज माफ कर बड़ा संदेश दिया। इसके साथ ही वैज्ञानिकों को ‘लैब से लैंड’ तक पहुंचाते हुए विकसित कृषि संकल्प अभियान के माध्यम से प्रदेश के 14,170 गांवों में 23.30 लाख किसानों से सीधा संवाद किया गया। इससे खेती केवल आजीविका का साधन नहीं, बल्कि आर्थिक सशक्तिकरण का माध्यम बन गई।

वोट बैंक नहीं, अर्थव्यवस्था की रीढ़ बना किसान

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्पष्ट किया कि किसान केवल वोट बैंक नहीं, बल्कि प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। इसी सोच के तहत कृषि व्यवस्था को योजनाओं तक सीमित न रखकर ज़मीनी बदलाव का माध्यम बनाया गया।

  • एमएसपी पर पारदर्शी खरीद व्यवस्था लागू हुई

  • फसल भुगतान को समयबद्ध और डिजिटल बनाया गया

  • उपज का उचित मूल्य किसानों तक पहुंचा

  • नहरों के पुनर्जीवन, नलकूपों की संख्या में वृद्धि और मुफ्त/रियायती सिंचाई योजनाओं से उत्पादन क्षमता बढ़ी

  • सूखा और जल संकट वाले क्षेत्रों में भी खेती को नई जीवनरेखा मिली

इन सुधारों ने किसान को आत्मनिर्भर बनाया और खेती को लाभकारी पेशा बनाया।

किसानों के सम्मान पर केंद्रित नीतियां

2017 के पहले जिस उत्तर प्रदेश में किसान आत्महत्या के लिए मजबूर होता था, वहीं 2017 के बाद किसान सम्मान और सुरक्षा का केंद्र बना। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के क्रियान्वयन में उत्तर प्रदेश अग्रणी रहा।21वीं किस्त तक किसानों को ₹94,668.58 करोड़ का भुगतानदो करोड़ से अधिक किसानों को किसान पाठशाला से जोड़ा गया16 लाख निजी ट्यूबवेल किसानों का ऋण माफसहकारी एलडीबी ऋण की ब्याज दर 11.5% से घटाकर 6%इसके साथ ही कृषि अवसंरचना को मजबूत करने के लिए—लखनऊ के अटारी में चौधरी चरण सिंह सीड पार्कबाराबंकी में टिश्यू कल्चर लैब (31 एकड़)पीलीभीत में बासमती उत्पादन व प्रशिक्षण केंद्र (7 एकड़) की स्थापना की दिशा में ठोस कदम उठाए गए।

गन्ने ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था में भरी नई ऊर्जा

योगी सरकार ने गन्ना किसानों के हित में ऐतिहासिक फैसले लिए। पेराई सत्र 2025-26 के लिए—

  • अगेती गन्ना: ₹400 प्रति क्विंटल

  • सामान्य प्रजाति: ₹390 प्रति क्विंटल

यानी ₹30 प्रति क्विंटल की वृद्धि, जिससे किसानों को लगभग ₹3,000 करोड़ का अतिरिक्त लाभ होगा। योगी सरकार के कार्यकाल में यह चौथी बार गन्ना मूल्य में बढ़ोतरी है।2017 से पहले जहां भुगतान में वर्षों लग जाते थे, वहीं अब तक ₹2.96 लाख करोड़ से अधिक का रिकॉर्ड गन्ना भुगतान किया जा चुका है। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था में नई जान आई है।

विश्वास, स्थिरता और भविष्य की उम्मीद की खेती

योगी सरकार ने परंपरागत खेती के साथ-साथ तकनीक और नवाचार को भी बढ़ावा दिया—

  • मृदा स्वास्थ्य कार्ड

  • उन्नत बीज

  • कृषि यंत्रीकरण

  • डिजिटल प्लेटफॉर्म

  • बीज से बाजार तक मजबूत व्यवस्था

इन प्रयासों ने संदेश दिया कि खेती घाटे का सौदा नहीं, बल्कि सम्मानजनक और सुरक्षित भविष्य का आधार है। आज उत्तर प्रदेश कृषि उत्पादन, खरीद और किसान कल्याण योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल है। योगी सरकार के कार्यकाल में यूपी की खेती विश्वास, स्थिरता और उम्मीद की कहानी बन चुकी है—जहां किसान अकेला नहीं, बल्कि सरकार के साथ कदम से कदम मिलाकर आगे बढ़ रहा है।

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