खेती में AI का धमाका: नेटाफिम ने लॉन्च की 5th जनरेशन की 'स्मार्ट डोज़िंग' मशीनें; खाद और पानी की होगी सटीक बचत
लखनऊ | मार्च 2026
इजरायली तकनीक और प्रिसिजन इरिगेशन (सटीक सिंचाई) की दुनिया में अग्रणी कंपनी नेटाफिम (Netafim) ने भारतीय कृषि क्षेत्र को आधुनिक बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। कंपनी ने अपनी 5वीं पीढ़ी (5G) की AI-आधारित 'ऑटोमेटेड डोज़िंग' रेंज पेश की है। यह तकनीक न केवल सिंचाई बल्कि 'फर्टिगेशन' (सिंचाई के साथ खाद देना) को पूरी तरह से ऑटोमेटेड और सटीक बना देगी
क्या है डोज़िंग 5G और यह कैसे काम करती है?
नेटाफिम की यह नई रेंज आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का उपयोग करती है। यह एक 'सेल्फ-लर्निंग' सिस्टम है, जो फसल की वास्तविक ज़रूरत को समझकर पोषक तत्वों (खाद) की मात्रा को नियंत्रित करता है।
प्रमुख विशेषताएँ:
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रिमोट मॉनिटरिंग: किसान अपने मोबाइल या कंप्यूटर के जरिए कहीं से भी सिंचाई और खाद के बहाव की निगरानी कर सकते हैं।
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लागत में कमी: एआई तकनीक यह सुनिश्चित करती है कि खाद की एक बूंद भी बर्बाद न हो, जिससे खेती की लागत कम होती है और भूजल प्रदूषित होने से बचता है।
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डिजिटल प्लेटफॉर्म: यह पूरी रेंज नेटाफिम के 'ग्रोस्फेयर' (GrowSphere™) प्लेटफॉर्म से जुड़ जाती है, जिससे बुवाई से कटाई तक का पूरा प्रबंधन एक ही जगह से संभव है।
नेटाफिम डोज़िंग 5G के चार 'सुपरस्टार' उत्पाद
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फर्टिकिट™ 5G: खुले खेतों और बड़े बागानों के लिए सबसे लचीला सिस्टम। इसमें 9 अलग-अलग मॉडल उपलब्ध हैं।
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फर्टिवन™ 5G: छोटे क्षेत्रों के लिए 'प्लग-एंड-प्ले' समाधान। इसे लगाना और इस्तेमाल करना बेहद आसान है।
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नेटाजेट™ 5G: संवेदनशील और कम समय वाली फसलों के लिए। यह बिजली की गति से पानी के pH और EC लेवल को संतुलित करता है।
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नेटाफ्लेक्स™ 5G: ग्रीनहाउस और एडवांस फार्मिंग के लिए। इसमें 'ओपन टैंक मिक्सिंग' तकनीक है जो खाद के एकसमान वितरण की गारंटी देती है।
भारतीय किसानों की समस्याओं का समाधान
लॉन्च के अवसर पर नेटाफिम इरिगेशन इंडिया के COO, श्री विकास सोनावणे ने कहा: भारतीय किसान पानी की कमी और खाद की बढ़ती कीमतों से जूझ रहे हैं। हमारा 5G एआई समाधान इस अनिश्चितता को खत्म करता है। यह सुनिश्चित करता है कि किसान पानी की हर बूंद और खाद के हर कण का पूरा लाभ उठा सकें, जिससे पैदावार की क्वालिटी सुधरेगी और मुनाफा बढ़ेगा।"
पर्यावरण और मिट्टी की सुरक्षा
पारंपरिक खेती में अक्सर जरूरत से ज्यादा खाद डालने से मिट्टी की उपजाऊ शक्ति कम हो जाती है और पोषक तत्व बहकर भूजल को जहरीला बना देते हैं। नेटाफिम की यह एआई तकनीक इन खतरों को न्यूनतम कर देती है, जिससे 'सस्टेनेबल फार्मिंग' (टिकाऊ खेती) को बढ़ावा मिलता है।
निष्कर्ष: शुरुआती नतीजों से पता चला है कि जिन किसानों ने इस सिस्टम को अपनाया है, उनकी फसल की क्वालिटी और मात्रा में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। नेटाफिम की यह पहल भारतीय खेती को "स्मार्ट" और "मुनाफे वाली" बनाने की दिशा में एक मील का पत्थर है।
