बढ़ते डिजिटल फ्रॉड के बीच एयरटेल ने 98.4 बिलियन स्पैम कॉल्स को किया ब्लॉक

एआई-संचालित ‘सेफ नेटवर्क’ ने 4.4 बिलियन स्पैम मैसेज की पहचान की, 1.62 मिलियन से अधिक दुर्भावनापूर्ण लिंक किए ब्लॉक
 
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लखनऊ, 26 सितंबर 2026। भारत में डिजिटल सेवाओं के तेजी से विस्तार के साथ साइबर धोखाधड़ी के तौर-तरीकों में भी बदलाव देखने को मिल रहा है। स्पैम कॉल और फिशिंग मैसेज से आगे बढ़कर अब साइबर फ्रॉड में पहचान की चोरी, फर्जी बैंकिंग अनुरोध, दुर्भावनापूर्ण लिंक, निवेश संबंधी धोखाधड़ी और ओटीपी के जरिए होने वाली ठगी जैसे मामले शामिल हैं।

इसी बढ़ते डिजिटल जोखिम के बीच एयरटेल ने अपने एआई-संचालित ‘सेफ नेटवर्क’ पहल के तहत नेटवर्क स्तर पर डिजिटल सुरक्षा को मजबूत करने का दावा किया है। कंपनी के अनुसार, पिछले दो वर्षों में उसके नेटवर्क ने 98.4 बिलियन से अधिक स्पैम कॉल्स और 4.4 बिलियन स्पैम मैसेज की पहचान की है, जबकि 1.62 मिलियन से अधिक दुर्भावनापूर्ण लिंक को ब्लॉक किया गया है।

सितंबर 2024 में शुरू हुआ एआई आधारित स्पैम डिटेक्शन

एयरटेल ने सितंबर 2024 में नेटवर्क आधारित एआई-संचालित स्पैम डिटेक्शन सॉल्यूशन लॉन्च किया था। कंपनी के अनुसार, इस तकनीक में नेटवर्क इंटेलिजेंस और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल कर स्पैम कॉल्स और एसएमएस की पहचान की जाती है।

एयरटेल का कहना है कि उसका उद्देश्य ऐसी सुरक्षा व्यवस्था विकसित करना है, जो नेटवर्क के स्तर पर बैकग्राउंड में काम करे और ग्राहकों को अलग से कोई ऐप इंस्टॉल करने या हर संदिग्ध गतिविधि की मैन्युअल रिपोर्टिंग करने की जरूरत न पड़े।

डिजिटल फ्रॉड का दायरा हुआ व्यापक

कंपनी के अनुसार, भारत में डिजिटल सेवाओं के बढ़ते इस्तेमाल के साथ साइबर धोखाधड़ी के मामले भी अधिक जटिल हो रहे हैं। बैंकिंग, डिजिटल पेमेंट्स, हेल्थकेयर, ई-कॉमर्स और सरकारी सेवाओं में ऑनलाइन माध्यमों की बढ़ती पहुंच के चलते डिजिटल संचार की सुरक्षा पर भी ध्यान बढ़ा है।

प्रेस विज्ञप्ति में भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा गया है कि पिछले छह वर्षों में भारतीयों को साइबर धोखाधड़ी के कारण ₹52,976 करोड़ से अधिक का नुकसान हुआ है। वहीं, राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के आंकड़ों के अनुसार, देश में कुल अपराध के स्तर में गिरावट के बावजूद साइबर अपराध के मामलों में वृद्धि दर्ज की गई है।

सेफ नेटवर्क में शामिल हैं कई सुरक्षा फीचर्स

एयरटेल के अनुसार, उसका ‘सेफ नेटवर्क’ अब नेटवर्क आधारित डिजिटल सुरक्षा टूल्स के व्यापक सेट के रूप में विकसित हो चुका है। इसमें कई प्रमुख सुरक्षा सुविधाएं शामिल हैं।

ओटीपी फ्रॉड से सुरक्षा: कंपनी ने एआई आधारित ऐसी सुरक्षा प्रणाली शुरू की है, जिसे संदिग्ध बातचीत के दौरान यूजर्स को ओटीपी या अन्य संवेदनशील क्रेडेंशियल साझा करने के लिए बरगलाने वाली परिस्थितियों की पहचान करने और आवश्यक हस्तक्षेप के लिए डिजाइन किया गया है।

दुर्भावनापूर्ण लिंक की पहचान: एयरटेल के अनुसार, कंपनी ने वास्तविक समय में फर्जी वेबसाइटों और संदिग्ध लिंक की पहचान करने वाली प्रणाली भी विकसित की है। इसके जरिए मोबाइल और वाई-फाई ब्रॉडबैंड सब्सक्राइबर्स के लिए एसएमएस, मैसेजिंग ऐप्स, ईमेल और ब्राउजर रीडायरेक्ट के माध्यम से साझा किए गए 1.62 मिलियन से अधिक दुर्भावनापूर्ण लिंक ब्लॉक किए गए हैं।

स्पैम कॉल और मैसेज की पहचान: कंपनी के मुताबिक, सितंबर 2024 में एआई आधारित नेटवर्क-लेवल स्पैम डिटेक्शन सिस्टम शुरू किए जाने के बाद से 98.4 बिलियन से अधिक स्पैम कॉल्स और 4.4 बिलियन स्पैम मैसेज की पहचान की गई है।

बिजनेस नेम डिस्प्ले: एयरटेल ने बिजनेस नेम डिस्प्ले सुविधा भी शुरू की है। इसके माध्यम से उपयोगकर्ताओं को सत्यापित एंटरप्राइज कॉल्स और संभावित रूप से फर्जी या धोखाधड़ी वाले नंबरों के बीच अंतर करने में मदद मिलती है। कंपनी के अनुसार, यह सुविधा फर्जी बैंकिंग अथवा ग्राहक सेवा प्रतिनिधि बनकर की जाने वाली प्रतिरूपण आधारित धोखाधड़ी के जोखिम को कम करने में सहायक हो सकती है।

एयरटेल के अनुसार, ‘सेफ नेटवर्क’ पहल नेटवर्क स्तर पर डिजिटल सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में कंपनी के प्रयासों का हिस्सा है। कंपनी का कहना है कि टेलीकॉम नेटवर्क की भूमिका अब केवल कनेक्टिविटी उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि तेजी से बढ़ते डिजिटल इकोसिस्टम में सुरक्षा की एक अतिरिक्त परत उपलब्ध कराने की दिशा में भी इसका महत्व बढ़ रहा है।

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