अखिलेश यादव ने एलपीएस के शिक्षकों को किया सम्मानित, बोले- शिक्षा समाज और राष्ट्र के विकास की सबसे बड़ी ताकत
लखनऊ। शिक्षक दिवस के अवसर पर लखनऊ पब्लिक स्कूल्स एंड कॉलेजेज की ओर से गोमती नगर स्थित लखनऊ पब्लिक कॉलेज के श्री रामलाल मेमोरियल ऑडिटोरियम में भव्य शिक्षक सम्मान समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम में संस्थान की विभिन्न शाखाओं से पहुंचे प्रधानाचार्यों और शिक्षकों को शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान, समर्पण और उल्लेखनीय सेवाओं के लिए सम्मानित किया गया।
समारोह में शिक्षकों को करीब 50 लाख रुपये के आकर्षक पुरस्कारों के साथ कलाई घड़ियां, बोरोसिल के डिजाइनर बाउल सेट, मग-प्लेट सेट, इलेक्ट्रिक इंडक्शन, लंच बॉक्स, इलेक्ट्रिक कैसरोल, बोरोसिल टिफिन एवं बोतल, शॉल और प्रशस्ति-पत्र प्रदान किए गए।
अखिलेश यादव रहे मुख्य अतिथि
कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री एवं कन्नौज सांसद अखिलेश यादव मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। इस अवसर पर लखनऊ पब्लिक स्कूल्स एंड कॉलेजेज के संस्थापक एवं चेयरमैन सांसद डॉ. एस. पी. सिंह ने अखिलेश यादव को शॉल एवं प्रशस्ति-पत्र भेंट कर सम्मानित किया।
समारोह के दौरान शिक्षकों और विद्यार्थियों ने विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी दीं। संगीत, नृत्य सहित कई कार्यक्रमों के जरिए विद्यार्थियों और शिक्षकों ने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। विभिन्न शाखाओं से आए शिक्षकों और विद्यार्थियों की उत्साहपूर्ण भागीदारी ने कार्यक्रम को खास बना दिया।
विद्यालयों के बंद होने पर अखिलेश यादव ने जताई चिंता
मुख्य अतिथि अखिलेश यादव ने अपने संबोधन में उत्तर प्रदेश में विद्यालयों के बंद होने की स्थिति पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि स्कूलों के बंद होने का सबसे अधिक प्रभाव गरीब और वंचित परिवारों के बच्चों की शिक्षा पर पड़ता है।
उन्होंने शिक्षा को समाज और राष्ट्र के विकास का महत्वपूर्ण आधार बताते हुए कहा कि समाज के प्रत्येक वर्ग तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुंचना जरूरी है। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को भी शिक्षा के समान अवसर मिलने चाहिए। उन्होंने इस दिशा में शिक्षकों की भूमिका को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया।
शिक्षक बदलेंगे तो शिक्षा बदलेगी और शिक्षा बदलेगी तो भारत बदलेगा”
लखनऊ पब्लिक स्कूल्स एंड कॉलेजेज के संस्थापक एवं चेयरमैन सांसद डॉ. एस. पी. सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि वर्तमान समय में शिक्षक की जिम्मेदारी केवल पाठ्यक्रम पूरा कराने तक सीमित नहीं रह गई है। शिक्षकों को विद्यार्थियों में सोचने, सवाल पूछने, तर्क करने, समस्याओं का समाधान तलाशने और बदलती परिस्थितियों के अनुरूप सीखने की क्षमता विकसित करनी होगी।
उन्होंने कहा, “शिक्षक बदलेंगे तो शिक्षा बदलेगी और शिक्षा बदलेगी तो भारत बदलेगा।”
डॉ. सिंह ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था का केंद्र बच्चा होना चाहिए। शिक्षक को सिर्फ यह नहीं देखना चाहिए कि उसने कक्षा में कितना पढ़ाया, बल्कि यह भी समझना चाहिए कि विद्यार्थी ने कितना सीखा, कितना समझा, कितने सवाल किए और प्राप्त ज्ञान को व्यवहार में किस तरह इस्तेमाल किया।
बच्चों को परीक्षा नहीं, जीवन के लिए तैयार करें शिक्षक
डॉ. एस. पी. सिंह ने शिक्षकों से विद्यार्थी-केंद्रित और अनुभव आधारित शिक्षण पद्धतियों को अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि हर बच्चे की क्षमता और प्रतिभा अलग होती है। शिक्षक का दायित्व है कि वह विद्यार्थियों की विशेष योग्यता को पहचानकर उसे आगे बढ़ने का अवसर प्रदान करे।
उन्होंने कहा कि शिक्षक केवल विद्यार्थियों का भविष्य नहीं बनाते, बल्कि राष्ट्र का भविष्य गढ़ने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसलिए बच्चों को केवल परीक्षाओं के लिए तैयार करने के बजाय उन्हें जीवन की चुनौतियों का सामना करने और नए अवसर पैदा करने योग्य बनाना आवश्यक है।
कई पदाधिकारी और प्रधानाचार्य रहे मौजूद
समारोह में एम.डी. सुशील कुमार, मुख्य प्रशासिका एवं पूर्व एमएलसी कान्ति सिंह, जनरल मैनेजर हर्षित सिंह एवं शिखर पाल सिंह, डायरेक्टर नेहा सिंह, गरिमा सिंह एवं निकिता सिंह सहित संस्थान की विभिन्न शाखाओं के प्रधानाचार्य, शिक्षक और अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे।
शिक्षक सम्मान समारोह ने शिक्षा, संस्कार, नवाचार और राष्ट्र निर्माण में शिक्षकों की भूमिका को रेखांकित करते हुए शिक्षकों के प्रति सम्मान और कृतज्ञता का संदेश दिया।

