पितृ पक्ष में 50 नीम के पौधे लगाकर अखिल भारतीय अधिकार संगठन ने दी पितरों को श्रद्धांजलि
लखनऊ, 4 अक्टूबर 2026। पितृ पक्ष में पितरों के प्रति श्रद्धा की परंपरा को सामाजिक दायित्व और पर्यावरण संरक्षण से जोड़ते हुए अखिल भारतीय अधिकार संगठन ने प्यारेपुर मौंदा स्थित रामलीला समिति मैदान में 50 नीम के पौधे लगाए। संगठन ने इस कार्यक्रम को पितरों की स्मृति में पर्यावरण संरक्षण की पहल के रूप में आयोजित किया। उद्देश्य यह रहा कि पूर्वजों की स्मृति को केवल धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित न रखते हुए प्रकृति और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से जोड़ा जाए।
रामलीला समिति के प्रमुख धर्मेन्द्र जी ने कहा कि इन पौधों के बड़े होने के बाद रामलीला मैदान के आसपास नीम के पेड़ दिखाई देंगे, जिससे क्षेत्र के पर्यावरण को लाभ मिलेगा। उन्होंने कहा कि आज लगाए गए पौधे भविष्य में ग्रामीणों और आने वाली पीढ़ियों को छाया और बेहतर पर्यावरण उपलब्ध कराने में सहायक होंगे।
श्री रामकृष्ण विद्यावती इंटर कॉलेज, मौदा के प्रबंधक अभिजीत तिवारी ने संगठन के प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि इस तरह के कार्यक्रम सामाजिक और पर्यावरणीय जिम्मेदारी की भावना को मजबूत करते हैं।कार्यक्रम में मौंदा की वर्तमान प्रधान संगीता यादव के प्रतिनिधि भी मौजूद रहे। वहीं प्यारेपुर के प्रधान संजय यादव ने संगठन से अपनी ग्राम पंचायत में भी इसी तरह का सामाजिक कार्यक्रम आयोजित करने का आग्रह किया और ग्रामीणों की ओर से सहयोग का भरोसा दिलाया।
परंपरा को वर्तमान और भविष्य से जोड़ने पर जोर
अखिल भारतीय अधिकार संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. आलोक चांटिया ‘रजनीश’ ने कहा कि परंपराओं को आधुनिक भारत के निर्माण और वर्तमान सामाजिक जरूरतों से जोड़कर आगे बढ़ाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि पितृ पक्ष में वृक्षारोपण ऐसी पहल है, जिसमें पितरों की स्मृति के साथ प्रकृति संरक्षण और सामाजिक दायित्व को जोड़ा गया है।
उन्होंने कहा कि पितृऋण केवल श्राद्ध और पूर्वजों के स्मरण तक सीमित नहीं है। पूर्वजों से मिली जीवन, संस्कार, समाज और प्रकृति की विरासत को सुरक्षित रखना तथा आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना भी जिम्मेदारी का हिस्सा है। उनके अनुसार, पितरों की स्मृति में लगाया गया पेड़ एक ऐसी श्रद्धांजलि है, जिसका लाभ वर्षों तक समाज को मिलता रहता है।
डॉ. चांटिया ने कहा कि संगठन अधिकारों के साथ नागरिक कर्तव्यों की चेतना को भी समाज तक पहुंचाने का प्रयास करता है। प्रत्येक नागरिक को यह विचार करना चाहिए कि उसे समाज और राष्ट्र से क्या मिला, इसके साथ वह प्रकृति, समाज और आने वाली पीढ़ियों के लिए क्या योगदान दे रहा है।
वृक्षारोपण को सामाजिक बदलाव से जोड़ने की अपील
संगठन के महामंत्री डॉ. संदीप कुमार सिंह ने कहा कि परंपराओं को समाप्त करने के बजाय उन्हें ऐसी सामाजिक गतिविधियों से जोड़ने की जरूरत है, जिनसे वर्तमान और भविष्य दोनों को लाभ मिले। उन्होंने वृक्षारोपण को इसी परिवर्तनशील सोच का एक माध्यम बताया।
प्रोफेसर श्वेता तिवारी ने कहा कि पेड़ बिना किसी अपेक्षा के समाज को छाया, हरियाली और पर्यावरणीय लाभ देते हैं। उन्होंने कहा कि वृक्षारोपण केवल पौधा लगाने की औपचारिकता नहीं, बल्कि जीवन और प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी का कार्य है।
नैना दयाल फाउंडेशन की महिला अध्यक्ष सोनिया श्रीवास्तव ने कहा कि भारतीय सनातन परंपरा में पितृऋण को केवल पूर्वजों के स्मरण और श्राद्ध तक सीमित नहीं माना जाना चाहिए। प्रकृति, संस्कृति और जीवन मूल्यों की विरासत को सुरक्षित रखना भी जिम्मेदारी है। उन्होंने पितृ पक्ष में वृक्षारोपण को इस सोच को व्यवहार में लाने का माध्यम बताया।
उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण को वैज्ञानिक सोच, सामाजिक जिम्मेदारी और परंपराओं के साथ जोड़कर आगे बढ़ाने की आवश्यकता है। उनके अनुसार, पूर्वजों की स्मृति में लगाए गए पेड़ आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ वायु और बेहतर पर्यावरण देने में सहायक हो सकते हैं।
पर्यावरण संरक्षण को नागरिक दायित्व से जोड़ने पर जोर
संगठन के विधि विशेषज्ञ डॉ. विष्णु प्रताप ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण को मानव जीवन की गरिमा और नागरिक दायित्व से जोड़कर देखने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि बेहतर पर्यावरण व्यक्ति को स्वस्थ और गरिमापूर्ण जीवन के लिए अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
संगठन के राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष अभिषेक कुमार गुप्ता ने नीम के पौधों के महत्व पर बात रखते हुए कहा कि नीम कठिन परिस्थितियों में भी अपने गुणों को बनाए रखते हुए समाज के लिए उपयोगी रहता है। उन्होंने कहा कि इसी तरह लोगों को भी परिस्थितियां चाहे जैसी हों, अपने सिद्धांतों पर कायम रहते हुए समाज के लिए उपयोगी बनने का प्रयास करना चाहिए।
ग्रामीणों ने भी लिया वृक्षारोपण में हिस्सा
कार्यक्रम में आर.एस.एस. श्री प्रगटेश्वर महादेव शाखा से शीष द्विवेदी, अरविन्द द्विवेदी, अभिनव गुप्ता (पारूल), अंकुल गुप्ता (गोलू), आशीष पाण्डेय मौंदा सहित बड़ी संख्या में ग्रामवासी मौजूद रहे। सभी ने पौधारोपण में सहभागिता की।
अखिल भारतीय अधिकार संगठन ने कार्यक्रम में सहयोग करने वाले ग्रामवासियों, जनप्रतिनिधियों, रामलीला समिति, विद्यालय प्रबंधन और अन्य सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया। संगठन ने कहा कि पितृ पक्ष में लगाए गए 50 नीम के पौधे पूर्वजों की स्मृति, पर्यावरण संरक्षण और आने वाली पीढ़ियों के प्रति जिम्मेदारी के प्रतीक हैं।
