एएमए हर्बल को ‘वेजिबैक्ट एन’ तकनीक पर भारत में पेटेंट
फल कचरे से तैयार सुरक्षित एंटीबैक्टीरियल फॉर्मुलेशन को मिली आधिकारिक मान्यता
पर्यावरण अनुकूल और कपड़ा उद्योग के लिए प्रभावी समाधान की दिशा में मजबूत भारतीय पहल
Wed, 7 Jan 2026
लखनऊ, 7 जनवरी 2026: कपड़ा उद्योग के लिए पर्यावरण के अनुकूल समाधान विकसित करने की दिशा में एएमए हर्बल ग्रुप को बड़ी सफलता मिली है। कंपनी की नवोन्मेषी तकनीक ‘वेजिबैक्ट एन’ को भारत सरकार द्वारा पेटेंट प्रदान किया गया है। यह पेटेंट उस प्रक्रिया के लिए दिया गया है, जिसके तहत फलों के कचरे से एंटीबैक्टीरियल और डियोडोरेंट फॉर्मुलेशन तैयार किया जाता है, जिसे कपड़ों पर सुरक्षित रूप से उपयोग किया जा सकता है।
एएमए हर्बल द्वारा विकसित यह तकनीक पूरी तरह भारत में अनुसंधान एवं नवाचार का परिणाम है। कंपनी का मानना है कि कपड़ा उद्योग को ऐसे विकल्पों की आवश्यकता है जो मानव स्वास्थ्य के लिए सुरक्षित हों, कपड़ों पर लंबे समय तक प्रभावी रहें और पर्यावरण पर न्यूनतम प्रभाव डालें। ‘वेजिबैक्ट एन’ इसी सोच का परिणाम है, जो हानिकारक रसायनों और मेटल-बेस्ड प्रोडक्ट्स के स्थान पर प्रकृति आधारित समाधान प्रस्तुत करता है।
अब तक कपड़ों में इस्तेमाल होने वाले कई एंटीबैक्टीरियल उत्पाद मेटल बेस्ड होते थे, जिनमें मौजूद नैनो-पार्टिकल्स त्वचा के जरिए रक्त में प्रवेश कर स्वास्थ्य समस्याएं उत्पन्न कर सकते थे। इसके अलावा, कपड़ों की धुलाई के दौरान ये कण जल स्रोतों में पहुंचकर जलीय जीवन को भी नुकसान पहुंचाते थे।
इसके विपरीत, वेजिबैक्ट एन पूरी तरह मेटल-फ्री, सुरक्षित और प्राकृतिक उत्पाद है। यह सेब, गन्ना, अंगूर और संतरे जैसे फलों के कचरे से तैयार किया गया है, जो कपड़ों पर एक सूक्ष्म परत बनाकर बदबू पैदा करने वाले बैक्टीरिया को नियंत्रित करता है। इससे कपड़े लंबे समय तक ताजा बने रहते हैं और दुर्गंध की समस्या कम होती है। इसका प्रभाव 40 से अधिक धुलाइयों तक बना रहता है, जिससे बार-बार कपड़े धोने की आवश्यकता भी घटती है।
यह फॉर्मुलेशन 98 प्रतिशत प्लांट-बेस्ड, किफायती और पर्यावरण के अनुकूल है। इसे कपड़ा निर्माण प्रक्रिया के दौरान या अंतिम लॉन्ड्री रिंस में आसानी से इस्तेमाल किया जा सकता है। चूंकि इसके लिए मौजूदा इंफ्रास्ट्रक्चर ही पर्याप्त है, इसलिए उद्योगों को किसी अतिरिक्त निवेश की जरूरत नहीं पड़ती। यह तकनीक रोजमर्रा के कपड़ों, बच्चों के परिधानों, इनरवियर और होम टेक्सटाइल्स में समान रूप से उपयोगी है। जल संकट वाले देशों के लिए यह समाधान विशेष रूप से लाभकारी सिद्ध हो सकता है। साथ ही, फलों के कचरे के संग्रह से स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी सृजित होते हैं।
एएमए हर्बल ने इस पेटेंट को केवल कंपनी की उपलब्धि नहीं, बल्कि भारत की वैज्ञानिक क्षमता और सतत नवाचार का वैश्विक संदेश बताया है। कंपनी का कहना है कि यह मान्यता भविष्य में और भी बड़े, सुरक्षित एवं टिकाऊ समाधानों के विकास की प्रेरणा बनेगी।
इस अवसर पर एएमए हर्बल के को-फाउंडर एवं सीईओ श्री यावर अली शाह ने कहा,
“प्राकृतिक उत्पादों के लाभों को समाज तक पहुंचाने के अपने विज़न के तहत हमने ‘वेजिबैक्ट एन’ विकसित किया है। यह बिना किसी मेटलिक कंटेंट के उतना ही प्रभावी है, जितने पारंपरिक उत्पाद, बल्कि उनसे अधिक सुरक्षित और किफायती भी है। इसकी यही विशेषताएं इसे उद्योगों के लिए एक स्वीकार्य और कॉस्ट-इफेक्टिव समाधान बनाती हैं।”
