Ameer Jangu Aur Intjaar se Mili Safalta Ki Kahani : अमीर जंगू और इंतजार से मिली सफलता की कहानी

The story of success achieved through hard work and patience.
 
Ameer Jangu

India vs West Indies, 2nd ODI :  वेस्टइंडीज के बल्लेबाज अमीर जंगू के लिए अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट तक पहुंचने का सफर आसान नहीं रहा। किशोरावस्था में उन्होंने सपना देखा था कि 25 साल की उम्र तक वह वेस्टइंडीज की टीम की जर्सी पहनेंगे, लेकिन उनका यह लक्ष्य तय समय पर पूरा नहीं हो सका। हालांकि, उन्होंने हार नहीं मानी और लंबे इंतजार के बाद 29 साल की उम्र में भारत दौरे पर अपने सपने को जी रहे हैं।

त्रिनिदाद एवं टोबैगो की अंडर-17 और अंडर-19 टीमों से क्रिकेट खेलने वाले जंगू ने कभी क्रिकेटर नहीं बन पाने की स्थिति में भूगोल का शिक्षक बनने की योजना भी बनाई थी। उनके पास इस विषय की डिग्री भी है। लेकिन क्रिकेट के प्रति उनका जुनून उन्हें लगातार आगे बढ़ाता रहा।

जंगू ने एक बातचीत में बताया कि 25 साल की उम्र तक अंतरराष्ट्रीय टीम में जगह नहीं मिलने के दौरान उन्हें संघर्ष करना पड़ा। इसके बाद उन्होंने खुद को समझाया कि उन्हें खेल का आनंद लेना चाहिए और इस बात के लिए आभारी रहना चाहिए कि उन्हें अपने देश के लिए खेलने और प्रथम श्रेणी क्रिकेट में हिस्सा लेने का अवसर मिल रहा है।

2024 में पूरा हुआ अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट का सपना

2024 में जब जंगू आखिरकार वेस्टइंडीज की टीम में जगह बनाने में सफल हुए, तब तक वह मानसिक रूप से खुद को कभी हार न मानने के लिए तैयार कर चुके थे। उन्होंने अपने से कम उम्र के कई खिलाड़ियों को टीम के सेटअप में आते और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेलते देखा था।

अंतरराष्ट्रीय टीम में जगह मिलने के बाद जंगू ने समय की कमी को तेजी से पूरा किया। वनडे डेब्यू में छठे नंबर पर बल्लेबाजी करते हुए उन्होंने 79 गेंदों में शतक जड़ दिया। लंबे इंतजार के बाद अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में उनका आगमन बेहद प्रभावशाली रहा।

जून में उन्होंने नॉर्थ साउंड में श्रीलंका के खिलाफ टेस्ट मैच में 233 रन की पारी खेली। यह उनकी प्रथम श्रेणी क्रिकेट की तीसरी शतकीय पारी थी और तीनों ही शतक दोहरे शतक में बदले। इससे पहले त्रिनिदाद एवं टोबैगो को प्रथम श्रेणी खिताब दिलाने में भी उनके रनों की अहम भूमिका रही थी।

सितंबर में उन्होंने बारबाडोस में कैरेबियन प्रीमियर लीग के फाइनल में अर्धशतक लगाकर अपनी टीम को खिताब दिलाने में योगदान दिया। इसके कुछ ही दिन बाद वह भारत दौरे पर पहुंचे।जंगू के लिए भारत में खेलना भी एक खास अनुभव है। उन्होंने कहा कि वह भारत में रोहित शर्मा, विराट कोहली और शुभमन गिल जैसे महान खिलाड़ियों के खिलाफ खेलना हमेशा चाहते थे और उनके लिए यह सपना सच होने जैसा है।

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पिता को देखकर शुरू हुआ क्रिकेट का सफर

जंगू को क्रिकेट का शौक अपने पिता को त्रिनिदाद में खेलते देखकर लगा। उनके पिता गली क्रिकेट खेला करते थे। उनके माता-पिता बैंक में काम करते थे, जबकि उनकी बड़ी बहन कानून के क्षेत्र में हैं।इसके बाद जंगू ने क्वींस पार्क क्रिकेट क्लब से जुड़कर उम्र वर्ग की क्रिकेट, अंडर-19 और फिर पेशेवर क्रिकेट का सफर तय किया। हालांकि अंतरराष्ट्रीय टीम तक पहुंचने में उन्हें करीब नौ साल और लगे।

बाएं हाथ के बल्लेबाज जंगू के बचपन के आदर्शों में वेस्टइंडीज के महान बल्लेबाज ब्रायन लारा शामिल रहे। वह 2019 के उस प्रदर्शनी मैच को भी याद करते हैं, जिसमें उन्हें अपने घरेलू मैदान पर लारा के साथ खेलने का अवसर मिला था।

उनकी बल्लेबाजी में कुमार संगकारा और क्विंटन डी कॉक जैसे बाएं हाथ के बल्लेबाजों की झलक भी दिखाई देती है। हालांकि मौजूदा दौर में उनके लिए विराट कोहली खास प्रेरणा हैं। जंगू कोहली की बल्लेबाजी के साथ-साथ उनकी मेहनत, अनुशासन और जीवनशैली से भी प्रभावित हैं।

मध्यक्रम की भूमिका ने सिखाया नई परिस्थितियों में बल्लेबाजी करना

भारत के खिलाफ तिरुवनंतपुरम वनडे में जंगू ने कुलदीप यादव की गेंदबाजी से प्रभावित पारी को संभालने की कोशिश की। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में मध्यक्रम में बल्लेबाजी करना उनके लिए अपेक्षाकृत नई भूमिका है।

उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पांचवें नंबर पर बल्लेबाजी उनके लिए नया अनुभव है और टीम को पता है कि वह मध्यक्रम में भूमिका निभा सकते हैं। उनके अनुसार इस भूमिका में सबसे महत्वपूर्ण बात मैच की परिस्थिति को समझना है।

कोविड से पहले जंगू विंडवर्ड आइलैंड्स के लिए नंबर चार और पांच पर बल्लेबाजी कर चुके थे। क्षेत्रीय क्रिकेट दोबारा शुरू होने के बाद जोशुआ डी सिल्वा की गैरमौजूदगी में उन्हें त्रिनिदाद के लिए विकेटकीपिंग की जिम्मेदारी मिली। इससे उन्हें निचले क्रम में बल्लेबाजी करने और स्पिन के खिलाफ अपनी तकनीक बेहतर करने का अवसर मिला।

टी-20 क्रिकेट के लिए बदला अपना खेल

2020 में जंगू ने पहली बार टी-20 क्रिकेट का अनुभव हासिल किया। इसके बाद उन्होंने खुद को तीनों प्रारूपों के लिए तैयार करने पर काम किया। कैरेबियन प्रीमियर लीग में खेलने के बावजूद वह शुरुआत में खुद को स्वाभाविक टी-20 खिलाड़ी नहीं मानते थे।

क्वींस पार्क के करीब रहने का फायदा उठाते हुए उन्होंने लगातार अभ्यास किया और रेंज हिटिंग पर काफी समय बिताया। तेज गति से रन बनाने के लिए उन्होंने अपने हाथों की गति और पावर हिटिंग पर भी काम किया।

जंगू मानते हैं कि वह उन बल्लेबाजों में नहीं हैं जो आसानी से गेंद को मैदान के बाहर भेज सकें। इसलिए उन्होंने गेंद की गति का इस्तेमाल कर बाउंड्री लगाने और स्क्वायर के पीछे शॉट खेलने पर विशेष ध्यान दिया। 2025 में उन्होंने वेस्टइंडीज के लिए टी-20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण किया।

वेस्टइंडीज के लिए विश्व कप जीतना सबसे बड़ा लक्ष्य

जंगू के लिए सबसे बड़ा लक्ष्य किसी एक प्रारूप तक सीमित नहीं है। उनका सपना वेस्टइंडीज के लिए विश्व कप जीतना है। चाहे वह टेस्ट चैंपियनशिप हो, वनडे विश्व कप या टी-20 विश्व कप, वह लंबे समय तक वेस्टइंडीज के लिए खेलना चाहते हैं।

वह अपने वनडे कप्तान शाई होप को भी आदर्श के रूप में देखते हैं। जंगू चाहते हैं कि वह 50 ओवर के क्रिकेट और टेस्ट क्रिकेट में वेस्टइंडीज के लिए प्रभावशाली भूमिका निभाएं। तेजी से बढ़ती टी-20 लीगों के बीच जंगू वनडे क्रिकेट के भविष्य को लेकर भी सकारात्मक हैं। उनका मानना है कि वनडे क्रिकेट ने क्रिकेट की कई महान उपलब्धियों की नींव रखी है और विश्व कप जैसे टूर्नामेंटों के कारण इस प्रारूप की महत्वपूर्ण भूमिका बनी रहेगी।

पहले वेस्टइंडीज क्रिकेट, बाद में फ्रेंचाइजी लीग

आज जब दुनिया भर के खिलाड़ी टी-20 फ्रेंचाइजी क्रिकेट के जरिए पहचान बना रहे हैं, जंगू का प्राथमिक लक्ष्य फिलहाल वेस्टइंडीज क्रिकेट ही है। वह अब तक कैरेबियन प्रीमियर लीग के अलावा किसी अन्य फ्रेंचाइजी लीग में नहीं खेले हैं।

वह विराट कोहली या क्विंटन डी कॉक जैसे खिलाड़ियों के साथ किसी फ्रेंचाइजी टीम में खेलने की इच्छा जरूर रखते हैं। जंगू के मुताबिक आईपीएल टी-20 क्रिकेट का शीर्ष मंच है और वह रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु को भी फॉलो करते हैं, लेकिन उनका कहना है कि उनका पहला लक्ष्य अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में वेस्टइंडीज के लिए लगातार अच्छा प्रदर्शन करना है।

मुश्किल रास्ते ने बनाया मजबूत खिलाड़ी

क्रिकेट के अलावा खाली समय में जंगू परिवार के साथ समय बिताना पसंद करते हैं। उन्हें परफ्यूम और कोलोन इकट्ठा करने का भी शौक है और वह इंग्लिश फुटबॉल क्लब चेल्सी के समर्थक हैं।हालांकि उनकी पहचान सबसे ज्यादा उन संघर्षपूर्ण वर्षों से बनी है, जिनमें उन्होंने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट तक पहुंचने के लिए लगातार मेहनत की। उन्होंने बताया कि क्रिकेट को जीवन की पहली प्राथमिकता बनाने के लिए उन्हें अपनी कई आदतें बदलनी पड़ीं। इसी अनुशासन और दृढ़ता ने उन्हें आगे बढ़ाया।

अमीर जंगू की कहानी केवल अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में देर से मिले अवसर की कहानी नहीं है, बल्कि लंबे इंतजार के दौरान खुद को तैयार करते रहने की कहानी भी है। करीब नौ साल के इंतजार के बाद जब उन्हें वेस्टइंडीज की जर्सी मिली, तब तक वह अपने खेल और मानसिकता दोनों को काफी हद तक बदल चुके थे।उनके शब्दों में, अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट तक पहुंचने का रास्ता आसान नहीं था, लेकिन इसी सफर ने उन्हें अपने बारे में बहुत कुछ सीखने का अवसर दिया।

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