बृज मोहन राम को ओडिशा का राज्यपाल नियुक्त किए जाने पर अनिल माथुर ने दी बधाई

राष्ट्रीय युवा वाहिनी नेशनल वालंटियर भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष ने शिष्टाचार भेंट कर दीं शुभकामनाएं

 
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लखनऊ। झारखंड के पलामू लोकसभा क्षेत्र के पूर्व सांसद बृज मोहन राम को ओडिशा का राज्यपाल नियुक्त किए जाने पर राष्ट्रीय युवा वाहिनी नेशनल वालंटियर भाजपा के उत्तर प्रदेश अध्यक्ष अनिल माथुर ने हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। इस अवसर पर उन्होंने बृज मोहन राम से शिष्टाचार भेंट कर नई संवैधानिक जिम्मेदारी के लिए शुभकामनाएं दीं और उनके सफल कार्यकाल की कामना की।

राष्ट्रपति भवन की ओर से 12 अक्टूबर 2026 को जारी आधिकारिक विज्ञप्ति में बृज मोहन राम को ओडिशा का राज्यपाल नियुक्त किए जाने की घोषणा की गई थी। "राष्ट्रपति भवन की आधिकारिक विज्ञप्ति"/> के अनुसार, नियुक्ति संबंधित पद का कार्यभार ग्रहण करने की तारीख से प्रभावी होगी।

संवैधानिक दायित्वों के निर्वहन की कामना

अनिल माथुर ने कहा कि राज्यपाल का पद भारतीय संविधान, लोकतांत्रिक मूल्यों और संवैधानिक मर्यादाओं के संरक्षण से जुड़ा महत्वपूर्ण दायित्व है। इस पद पर आसीन व्यक्ति से अपेक्षा की जाती है कि वह संविधान की भावना के अनुरूप कार्य करते हुए सभी नागरिकों के हितों, सामाजिक समरसता और लोकतांत्रिक संस्थाओं की गरिमा का सम्मान करे।

उन्होंने कहा कि बृज मोहन राम की नई जिम्मेदारी उनके सार्वजनिक जीवन का महत्वपूर्ण पड़ाव है। ओडिशा जैसे सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत से समृद्ध राज्य में राज्यपाल की भूमिका संवैधानिक दायित्वों के निर्वहन, राज्य की परंपराओं के सम्मान तथा संवैधानिक संस्थाओं के बीच समन्वय की दृष्टि से अहम है।

निष्पक्षता और जनहित को प्राथमिकता देने की उम्मीद

शिष्टाचार भेंट के दौरान अनिल माथुर ने आशा व्यक्त की कि बृज मोहन राम अपने कार्यकाल में संविधान के प्रति निष्ठा, निष्पक्षता, जनकल्याण और लोकतांत्रिक परंपराओं के सम्मान को प्राथमिकता देंगे। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक जीवन में प्राप्त अनुभव का उपयोग संवैधानिक जिम्मेदारियों के निर्वहन और जनहित से जुड़े विषयों को उचित महत्व देने में किया जाना चाहिए।

राष्ट्रीय युवा वाहिनी नेशनल वालंटियर भाजपा की ओर से अनिल माथुर ने बृज मोहन राम को नई जिम्मेदारी के लिए शुभकामनाएं देते हुए उनके सफल, गरिमामय और जनहितकारी कार्यकाल की मंगलकामना की। उन्होंने कहा कि संवैधानिक पदों की प्रतिष्ठा निष्पक्ष आचरण, जिम्मेदारियों के निर्वहन और संविधान के प्रति प्रतिबद्धता से और मजबूत होती है।

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