अनुदीप फाउंडेशन और माइक्रोसॉफ्ट ने यूपी में AI-रेडी क्लासरूम के लिए एजुकेटर कैटलिस्ट प्रोग्राम शुरू किया
कार्यक्रम के माध्यम से शिक्षकों को कक्षाओं में AI आधारित तकनीकों के प्रभावी और जिम्मेदार इस्तेमाल के लिए प्रशिक्षित किया जाएगा। इसके साथ ही शिक्षण संस्थानों में AI को अपनाने और शिक्षकों के बीच इसके अनुभव साझा करने की व्यवस्था विकसित करने पर भी जोर दिया जाएगा।
कार्यक्रम के शुभारंभ अवसर पर शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ विभिन्न शिक्षण संस्थानों के प्रिंसिपल और शिक्षक शामिल हुए। इस दौरान गोरखपुर और प्रयागराज के एक्सपर्ट शिक्षकों को कार्यक्रम के शुरुआती ‘कैटलिस्ट’ के रूप में सम्मानित किया गया। इन शिक्षकों ने कक्षा में AI के उपयोग को अपनाने और अन्य शिक्षकों को प्रेरित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
तीन प्रमुख स्तंभों पर आधारित है कार्यक्रम
‘यूपी एजुकेटर कैटलिस्ट’ कार्यक्रम को तीन प्रमुख स्तंभों के आधार पर आगे बढ़ाया जाएगा। इनमें शिक्षकों में AI विशेषज्ञता विकसित करना, शिक्षण संस्थानों में AI को अपनाने में सहायता देना और मास्टर ट्रेनर्स के माध्यम से इस पहल का व्यापक विस्तार करना शामिल है।
कार्यक्रम के दौरान अनुदीप फाउंडेशन की टीम ने पहल की आगे की योजना और शुरुआती प्रभावों की जानकारी दी। विभिन्न स्कूलों के प्रिंसिपलों ने अपने संस्थानों में कार्यक्रम से हुए बदलावों के अनुभव साझा किए। इसके बाद एक्सपर्ट शिक्षकों ने बताया कि AI टूल्स उनके शिक्षण तरीकों और कक्षा में विद्यार्थियों की भागीदारी को किस तरह प्रभावित कर रहे हैं।
गोरखपुर और प्रयागराज के एक्सपर्ट शिक्षकों को AI क्षेत्र में उनकी विशेषज्ञता के लिए प्रमाणपत्र प्रदान किए गए। अब वे मास्टर ट्रेनर्स के रूप में अन्य शिक्षकों और संस्थानों तक AI से जुड़ी जानकारी एवं अनुभव पहुंचाने में भूमिका निभाएंगे।
शिक्षकों को AI को सहयोगी के रूप में अपनाने की जरूरत
समग्र शिक्षा (माध्यमिक शिक्षा) के अपर राज्य परियोजना निदेशक श्री विष्णु कांत पांडे ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार और विद्यार्थियों को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करने के लिए प्रतिबद्ध है। उनके अनुसार, शिक्षकों को कक्षा में AI के प्रभावी उपयोग के लिए सक्षम बनाना इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
उन्होंने कहा कि बदलते शिक्षा परिदृश्य में शिक्षक की भूमिका केवल जानकारी देने तक सीमित नहीं रह गई है। विद्यार्थियों को ज्ञान के व्यावहारिक इस्तेमाल, समस्या समाधान और भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करना भी शिक्षकों की जिम्मेदारी है।
उन्होंने शिक्षकों से AI को अपने विकल्प के बजाय एक सहयोगी तकनीक के रूप में अपनाने की अपील की। उनके अनुसार, AI की मदद से पाठ योजना, प्रश्नपत्र तैयार करने और अन्य दोहराव वाले कार्यों में समय बचाया जा सकता है। हालांकि AI से प्राप्त सामग्री को बिना जांचे स्वीकार करने के बजाय शिक्षकों को अपने अनुभव और विषय विशेषज्ञता के आधार पर उसका मूल्यांकन और आवश्यक संशोधन करना चाहिए।
2030 तक 20 लाख शिक्षकों को AI के लिए तैयार करने का लक्ष्य
माइक्रोसॉफ्ट इंडिया डेवलपमेंट सेंटर के मैनेजिंग डायरेक्टर एवं प्रेसिडेंट श्री राजीव कुमार ने कहा कि कंपनी को उत्तर प्रदेश सरकार, समग्र शिक्षा, माध्यमिक शिक्षा विभाग और अनुदीप फाउंडेशन के साथ इस पहल पर काम करने की खुशी है।
उन्होंने कहा कि जब शिक्षकों को सही तकनीक और जानकारी उपलब्ध कराई जाती है, तो वे विद्यार्थियों को ऐसे भविष्य के लिए बेहतर तरीके से तैयार कर सकते हैं, जहां AI सीखने, काम करने और समस्याओं के समाधान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
उन्होंने बताया कि Microsoft Elevate for Educators के तहत कंपनी वर्ष 2030 तक 20 लाख शिक्षकों को AI के लिए तैयार करने की प्रतिबद्धता के साथ काम कर रही है। इसका उद्देश्य शिक्षा के क्षेत्र में AI को अधिक सुलभ, उपयोगी और जिम्मेदारी के साथ इस्तेमाल करने योग्य बनाना है।
कक्षाओं में AI से बदलाव लाने पर जोर
अनुदीप फाउंडेशन की सीईओ सुश्री मोनिशा बनर्जी ने कहा कि AI को समझने और उसका प्रभावी इस्तेमाल करने में सक्षम एक शिक्षक पूरी कक्षा के सीखने के अनुभव में बदलाव ला सकता है। इससे विद्यार्थियों की भागीदारी बढ़ाने के साथ-साथ उनमें जिज्ञासा और समस्या समाधान की क्षमता विकसित करने में भी मदद मिल सकती है।उन्होंने कहा कि भारत का AI भविष्य केवल प्रयोगशालाओं और बोर्डरूम में नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश के गोरखपुर, प्रयागराज और राज्य के अन्य जिलों की कक्षाओं में भी आकार लेगा।
उन्होंने कहा कि यूपी एजुकेटर कैटलिस्ट कार्यक्रम का उद्देश्य केवल शिक्षकों को AI टूल्स का इस्तेमाल सिखाना नहीं है, बल्कि ऐसे कैटलिस्ट शिक्षकों का नेटवर्क तैयार करना है, जो अपने अनुभव और ज्ञान को दूसरे शिक्षकों तक पहुंचा सकें। इससे अधिक से अधिक शिक्षक AI आधारित शिक्षण को समझ सकेंगे और विद्यार्थियों को भविष्य की तकनीकी दुनिया के लिए तैयार करने में योगदान दे सकेंगे।
