एपीडी का ‘एज़ आई एम’ अभियान बदलेगा दिव्यांगता को देखने का नजरिया
लखनऊ। द एसोसिएशन ऑफ पीपल विद डिसेबिलिटी (एपीडी) भारत में दिव्यांगता को देखने और दिखाने के पारंपरिक नजरिए में बदलाव लाने के उद्देश्य से ‘एज़ आई एम’ नामक फोटोग्राफी एवं वीडियोग्राफी अभियान शुरू करने जा रहा है। अभियान के माध्यम से देशभर के फोटोग्राफर्स, वीडियोग्राफर्स और विजुअल स्टोरीटेलर्स को दिव्यांग लोगों के जीवन के वास्तविक अनुभवों और उनकी विविध कहानियों को कैमरे के माध्यम से सामने लाने का अवसर मिलेगा।
एपीडी के अनुसार, भारत में 5 करोड़ से अधिक दिव्यांग लोग हैं, लेकिन मुख्यधारा के मीडिया और विज्ञापनों में उनका प्रतिनिधित्व अपेक्षाकृत कम दिखाई देता है। कई बार दिव्यांग लोगों को दया या केवल ‘प्रेरणा’ के नजरिए से प्रस्तुत किया जाता है। ‘एज़ आई एम’ अभियान इसी तरह की रूढ़ छवियों से आगे बढ़कर दिव्यांग लोगों के रोजमर्रा के जीवन, उनकी खुशियों, उपलब्धियों, चुनौतियों और व्यक्तिगत अनुभवों को उनके विविध रूपों में सामने लाने का प्रयास करेगा।
वास्तविक कहानियों का तैयार होगा स्थायी संग्रह
अभियान के तहत देशभर के विजुअल स्टोरीटेलर्स दिव्यांग लोगों की जिंदगी को तस्वीरों और वीडियो के माध्यम से दस्तावेजित कर सकेंगे। इसके जरिए एक ऐसा स्थायी विजुअल संग्रह तैयार करने की योजना है, जो दिव्यांगता को समझने और देखने के अधिक संवेदनशील एवं वास्तविक दृष्टिकोण को बढ़ावा दे सके।
एंट्री भेजने की अंतिम तिथि 31 अक्टूबर 2026 की रात तक है। अभियान के विजेताओं की घोषणा 3 दिसंबर 2026, इंटरनेशनल डे ऑफ पर्सन्स विद डिसेबिलिटीज के अवसर पर की जाएगी।
तीन श्रेणियों में दिए जाएंगे पुरस्कार
अभियान के तहत तीन प्रमुख श्रेणियों में पुरस्कार प्रदान किए जाएंगे—
- बेस्ट एंट्री
- बेस्ट इमर्जिंग स्टोरीटेलर
- बेस्ट फोटोग्राफर विद अ डिसेबिलिटी
विजेताओं को नकद पुरस्कारों के साथ जूरी सदस्यों से वन-ऑन-वन मेंटरशिप, स्थायी ग्लोबल स्टॉक इमेज लाइब्रेरी में स्थान और भविष्य में रॉयल्टी प्राप्त करने का अवसर मिलेगा। इसके अतिरिक्त बड़े सार्वजनिक प्रदर्शनी में तस्वीरें प्रदर्शित करने, राष्ट्रीय मीडिया में स्थान पाने तथा एपीडी की ओर से सर्टिफाइड डिसेबिलिटी-सेंसिटिव विजुअल स्टोरीटेलर का प्रमाणपत्र भी दिया जाएगा।
प्रतिष्ठित हस्तियां जूरी का हिस्सा
‘एज़ आई एम’ अभियान की जूरी में फिल्ममेकर एवं स्क्रीनराइटर आर. बाल्की, सिनेमैटोग्राफर संतोष सिवन, बीबीडीओ इंडिया के चेयरमैन एवं सीसीओ जोसी पॉल, निर्वाण फिल्म्स की संस्थापक स्नेहा इपे, भारतीय पैरा-बैडमिंटन चैंपियन मानसी जोशी, फिल्ममेकर एवं विजुअल आर्टिस्ट ईशान नायर, नो डिसेबिलिटी के संस्थापक मोहित आहूजा और इंडियन स्कूल ऑफ पब्लिक पॉलिसी के को-फाउंडर लुइस मिरांडा शामिल हैं।
अभियान को विभिन्न संस्थाओं और ब्रांडों का भी समर्थन मिल रहा है। टाइटन कंपनी का तनिष्क, लीड स्पॉन्सर के रूप में, तथा अजीम प्रेमजी फाउंडेशन प्रमुख सहयोगियों में शामिल हैं। सहयोगी संस्थाएं अपने नेटवर्क के माध्यम से अभियान की पहुंच बढ़ाने में मदद करेंगी।
‘हर व्यक्ति की अपनी कहानी है’
तनिष्क की चीफ मार्केटिंग ऑफिसर पेल्की छेरिंग ने कहा कि हर व्यक्ति की अपनी कहानी होती है, जिसे सामने लाया जाना चाहिए। उनके अनुसार, ‘एज़ आई एम’ केवल तस्वीरों का अभियान नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य यह दिखाना है कि दिव्यांग लोगों का जीवन भी विविध अनुभवों से भरा और अपनी विशिष्टता रखने वाला है।
एपीडी के जैकब कुरियन ने कहा कि दिव्यांगता मानव जीवन का हिस्सा रही है, लेकिन इसे अक्सर दिव्यांग लोगों के अपने नजरिए से नहीं दिखाया जाता। उन्होंने देशभर के विजुअल स्टोरीटेलर्स से अभियान से जुड़ने की अपील करते हुए कहा कि कैमरे के माध्यम से उन कहानियों को सामने लाने की जरूरत है, जो समाज के आसपास मौजूद होने के बावजूद अक्सर पूरी तरह दिखाई नहीं देतीं।
जूरी सदस्य एवं पैरा-बैडमिंटन चैंपियन मानसी जोशी ने कहा कि दिव्यांग लोग भी पूर्ण और सामान्य जीवन जीते हैं, लेकिन रोजमर्रा की तस्वीरों में उनकी जिंदगी अक्सर उस वास्तविकता के साथ दिखाई नहीं देती। उन्होंने अभियान को इस दृष्टिकोण में बदलाव की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया।
ऐसे भेजें एंट्री
‘एज़ आई एम’ अभियान में भाग लेने या विस्तृत जानकारी प्राप्त करने के लिए www.asiamapd.com पर विजिट किया जा सकता है। इच्छुक प्रतिभागी asiam@apd-india.org पर ईमेल के माध्यम से भी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
