अपोलोमेडिक्स हॉस्पिटल लखनऊ ने शुरू किया कॉम्प्रिहेंसिव लीवर डिजीज क्लिनिक – विशेषज्ञ मार्गदर्शन और 95% सफलता दर के साथ लीवर ट्रांसप्लांट
इस क्लिनिक का नेतृत्व कर रहे हैं
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डॉ. अभिषेक यादव – सीनियर डायरेक्टर और एचओडी, लीवर ट्रांसप्लांट एवं एचपीबी सर्जरी
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डॉ. राजीव रंजन सिंह – डायरेक्टर, गैस्ट्रोएंटरोलॉजी
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डॉ. जयेन्द्र शुक्ला – कंसल्टेंट, गैस्ट्रोएंटरोलॉजी
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डॉ. उत्कर्ष श्रीवास्तव – कंसल्टेंट, लीवर ट्रांसप्लांट एवं गैस्ट्रो सर्जन
भारत और उत्तर प्रदेश में लीवर रोग की गंभीर स्थिति
डॉ. अभिषेक यादव ने बताया,
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हर साल भारत में लगभग 2.5–3 लाख लोग लीवर सिरोसिस और अन्य लीवर रोगों से जान गंवाते हैं।
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यह देश में मृत्यु का 8वां सबसे बड़ा कारण बन चुका है।
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वास्तविक जरूरत की तुलना में केवल 1–2% मरीजों का लीवर ट्रांसप्लांट हो पाता है।
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उत्तर प्रदेश में हर साल 50,000–60,000 मौतें लीवर रोग से होती हैं, लेकिन केवल 200–250 ट्रांसप्लांट ही किए जाते हैं।
दूसरे राज्यों जैसे तमिलनाडु (42 सेंटर), महाराष्ट्र (36), दिल्ली-एनसीआर (35) और कर्नाटक (25) की तुलना में यूपी में मात्र 4 लीवर ट्रांसप्लांट सेंटर हैं। ऐसे में ज्यादातर मरीजों को राज्य से बाहर इलाज के लिए जाना पड़ता है, जिससे खर्च और जटिलताएँ बढ़ जाती हैं।
अपोलोमेडिक्स की खासियत
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यूपी का पहला प्राइवेट हॉस्पिटल जिसने लीवर ट्रांसप्लांट शुरू किया।
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पूरी तरह से इन-हाउस और 24x7 उपलब्ध विशेषज्ञ टीम।
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अब तक किए गए ट्रांसप्लांट की 95% सफलता दर।
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डॉ. अभिषेक यादव का अनुभव:
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2000+ सफल लीवर ट्रांसप्लांट
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4000+ एचपीबी और जटिल जीआई सर्जरी
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19 वर्षों का अंतरराष्ट्रीय अनुभव (अबू धाबी, दिल्ली, बेंगलुरु, हैदराबाद, कोच्चि, मुंबई, पुणे)
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कई “पहली बार” उपलब्धियाँ जैसे – मध्य भारत का पहला लिविंग डोनर कंबाइंड लिवर-किडनी ट्रांसप्लांट और मात्र 5 महीने के बच्चे का सफल लीवर ट्रांसप्लांट।
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मरीजों के लिए क्या खास?
इस क्लिनिक का उद्देश्य है:
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जटिल लीवर और एचपीबी मामलों में स्पष्ट और भरोसेमंद जानकारी देना।
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इलाज के सही विकल्प समझाना और सुझाना।
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यूपी ही नहीं, बल्कि बिहार, झारखंड और नेपाल तक के मरीजों को सुविधाजनक और सुलभ उपचार उपलब्ध कराना।
अपोलोमेडिक्स का विज़न
अपोलोमेडिक्स के एमडी और सीईओ डॉ. मयंक सोमानी ने कहा लीवर डिजीज क्लिनिक मरीजों और उनके परिवारों को जीवन बदलने वाले फैसले आत्मविश्वास के साथ लेने में मदद करेगा। हमारा लक्ष्य है कि किसी भी गंभीर लीवर रोगी को विशेषज्ञ मार्गदर्शन और विश्वस्तरीय इलाज पाने के लिए राज्य से बाहर न जाना पड़े।”
