अपोलोमेडिक्स लखनऊ में अनोखी उपलब्धि: बिना छाती की हड्डी काटे 4 वर्षीय बच्चे की जटिल हार्ट सर्जरी सफल
🔬 ‘कीहोल’ तकनीक से सर्जरी
बच्चा लंबे समय से फेफड़ों के संक्रमण और सांस लेने में तकलीफ से जूझ रहा था। जांच में उसके दिल में छेद (होल) पाया गया। सामान्यतः ऐसे मामलों में ओपन हार्ट सर्जरी की जाती है, जिसमें छाती पर बड़ा चीरा लगाया जाता है और रिकवरी में लंबा समय लगता है।
लेकिन इस मामले में डॉक्टरों ने अत्याधुनिक कीहोल (मिनिमली इनवेसिव कार्डियक सर्जरी) तकनीक का इस्तेमाल किया। बच्चे के कंधे के नीचे बगल के पास करीब 3 सेंटीमीटर का छोटा चीरा लगाकर पूरी सर्जरी की गई और दिल के छेद को सफलतापूर्वक बंद किया गया।
👨⚕️ विशेषज्ञ टीम की बड़ी सफलता
इस जटिल सर्जरी को अंजाम देने वाले कार्डियक सर्जन डॉ. राहुल भूषण ने बताया कि छोटे बच्चों में इस प्रकार की सर्जरी बेहद चुनौतीपूर्ण होती है, क्योंकि उनका दिल आकार में बहुत छोटा होता है।
उन्होंने बताया कि बायपास मशीन से जोड़ने की प्रक्रिया भी बच्चों में कठिन होती है, क्योंकि उनकी रक्त वाहिकाएं पूरी तरह विकसित नहीं होतीं। ऐसे में सभी ट्यूब और सर्जिकल उपकरण उसी छोटे चीरे से संचालित करने पड़ते हैं।
⚡ तेज रिकवरी, कम दर्द
इस सर्जरी में करीब तीन घंटे का समय लगा। तकनीक के प्रमुख फायदे—
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हड्डी या मांसपेशी को काटने की जरूरत नहीं
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रक्तस्राव बेहद कम
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दर्द और संक्रमण का खतरा कम
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शरीर पर बड़ा निशान नहीं
सर्जरी के बाद बच्चे को केवल एक दिन आईसीयू में रखा गया और दो दिन में ही उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई, जो पारंपरिक सर्जरी की तुलना में काफी तेज रिकवरी है।
🏥 स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए मील का पत्थर
अस्पताल के सीईओ एवं एमडी डॉ. मयंक सोमानी ने कहा कि यह उपलब्धि प्रदेश के स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने बताया कि अत्याधुनिक तकनीकों को स्थानीय स्तर पर उपलब्ध कराने से मरीजों को अब बड़े शहरों या विदेश जाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी।
💚 अब पूरी तरह स्वस्थ
डॉक्टरों के अनुसार, सर्जरी के बाद बच्चे का हृदय सामान्य रूप से कार्य कर रहा है और वह पूरी तरह स्वस्थ है। यह उपलब्धि न केवल चिकित्सा क्षेत्र में तकनीकी प्रगति का उदाहरण है, बल्कि भविष्य में बच्चों की जटिल हृदय सर्जरी को और सुरक्षित और प्रभावी बनाने की दिशा में भी एक बड़ा कदम है।
