अपोलोमेडिक्स लखनऊ में हार्ट-लंग मशीन की मदद से जटिल थायराइड कैंसर सर्जरी सफल
ब्यूरो चीफ आर. एल. पाण्डेय लखनऊ। अपोलोमेडिक्स सुपरस्पेशलिटी हॉस्पिटल, लखनऊ में डॉक्टरों की विभिन्न विशेषज्ञताओं और अत्याधुनिक चिकित्सा सुविधाओं के समन्वय से 70 वर्षीय पुरुष मरीज की जटिल थायराइड कैंसर सर्जरी सफलतापूर्वक की गई। मरीज के गले में मौजूद कैंसरयुक्त गांठ सांस की नली को गंभीर रूप से दबा रही थी, जिसके कारण सामान्य प्रक्रिया से एनेस्थीसिया देकर सर्जरी करना चुनौतीपूर्ण था।
ऐसी स्थिति में कार्डियक सर्जरी, एनेस्थीसिया और सर्जिकल ऑन्कोलॉजी की संयुक्त टीम ने कार्डियोपल्मोनरी बाईपास (CPB), यानी हार्ट-लंग मशीन की सहायता से मरीज के रक्त संचार और ऑक्सीजन की आपूर्ति बनाए रखते हुए एयरवे सुरक्षित किया। इसके बाद थायराइड कैंसर की सर्जरी पूरी की गई।
इस जटिल प्रक्रिया में सर्जिकल ऑन्कोलॉजी विभाग के निदेशक डॉ. तरुण बत्रा, कार्डियक सर्जरी विभाग के निदेशक डॉ. भरत दुबे, एनेस्थीसिया विभाग के निदेशक डॉ. मनीष, एसोसिएट निदेशक डॉ. शिशिर अग्रवाल और कार्डियक एनेस्थीसिया विशेषज्ञ डॉ. हितेशी अग्रवाल सहित संबंधित चिकित्सा टीम ने भूमिका निभाई।
सामान्य तरीके से इंट्यूबेशन नहीं हो सका
मरीज के गले के आगे और दोनों तरफ फैली कैंसरयुक्त गांठ सांस की नली पर इतना दबाव डाल रही थी कि सामान्य तरीके से इंट्यूबेशन करना संभव नहीं हो पा रहा था। ब्रोंकोस्कोपी और अन्य उपलब्ध तरीकों से भी सांस की नली में ट्यूब डालने का प्रयास सफल नहीं हुआ।
इसके बाद डॉक्टरों ने ऑपरेशन को स्थगित कर मरीज के परिजनों के साथ स्थिति पर चर्चा की और वैकल्पिक उपचार रणनीति तैयार की। डॉक्टरों के अनुसार, कैंसर शरीर के अन्य हिस्सों में नहीं फैला था और बीमारी गले तक सीमित थी। ऐसे में सर्जरी को उपचार के लिए आवश्यक विकल्प माना गया।
हार्ट-लंग मशीन से बनाए रखा रक्त संचार और ऑक्सीजन सप्लाई
मरीज को पैर की फेमोरल आर्टरी और फेमोरल वेन के माध्यम से पेरिफेरल कार्डियोपल्मोनरी बाईपास पर लिया गया। इस दौरान स्पाइनल एनेस्थीसिया का इस्तेमाल किया गया। हार्ट-लंग मशीन की सहायता से मरीज के शरीर में रक्त संचार और ऑक्सीजन की आपूर्ति बनाए रखी गई।
इसके बावजूद जब सामान्य तरीके से एयरवे सुरक्षित करना संभव नहीं हुआ, तब सर्जिकल ऑन्कोलॉजी टीम ने बाईपास सपोर्ट के दौरान सबग्लॉटिक ट्रेकियोस्टोमी की। इसके जरिए ट्यूमर के नीचे सांस की नली में वैकल्पिक रास्ता बनाया गया और ट्यूब डाली गई।
एयरवे सुरक्षित होने के बाद मरीज को हार्ट-लंग मशीन से हटा दिया गया और रक्त प्रवाह को सामान्य स्थिति में लाया गया। इसके बाद थायराइड सर्जरी पूरी की गई। करीब साढ़े चार से पांच घंटे चली इस सर्जरी के दौरान अत्यधिक रक्तस्राव नहीं हुआ। ऑपरेशन के बाद मरीज को निगरानी के लिए आईसीयू में रखा गया, जहां उसके रिकवरी की निगरानी की गई।
मल्टीडिसिप्लिनरी टीम के समन्वय से संभव हुआ उपचार
इस मामले में कार्डियोपल्मोनरी बाईपास सपोर्ट के साथ थायराइडेक्टॉमी की गई, जिसे थायराइडेक्टॉमी विद सीपीबी सपोर्ट कहा जाता है। डॉक्टरों के अनुसार, इस तरह की स्थिति कम देखने को मिलती है और इसका प्रबंधन विभिन्न विशेषज्ञताओं वाली टीम के समन्वय से संभव हुआ।
डॉ. तरुण बत्रा, डायरेक्टर, सर्जिकल ऑन्कोलॉजी, अपोलोमेडिक्स सुपरस्पेशलिटी हॉस्पिटल, लखनऊ, ने कहा, “इस मामले में ट्यूमर के कारण सामान्य ट्रेकियोस्टोमी करना संभव नहीं था। इसलिए हमें सांस की नली में ट्यूमर के नीचे एक वैकल्पिक रास्ता बनाना पड़ा। कार्डियक और एनेस्थीसिया टीम के साथ समन्वय ने इस प्रक्रिया को सुरक्षित तरीके से पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस तरह के मामलों में सही समय पर निर्णय लेना और टीम के सभी सदस्यों का साथ मिलकर काम करना बहुत जरूरी होता है।”
डॉ. भरत दुबे, डायरेक्टर, कार्डियक सर्जरी, अपोलोमेडिक्स सुपरस्पेशलिटी हॉस्पिटल, लखनऊ, ने कहा, “इस मरीज के मामले में सबसे बड़ी चुनौती सांस की नली को सुरक्षित रखना था। ट्यूमर के दबाव के कारण सामान्य तरीके से इंट्यूबेशन संभव नहीं था। ऐसी स्थिति में कार्डियोपल्मोनरी बाईपास की मदद से मरीज के रक्त संचार और ऑक्सीजन की आपूर्ति को बनाए रखना जरूरी था। सभी के सामूहिक सहयोग से हमें एयरवे सुरक्षित करने और आगे की सर्जरी करने का अवसर मिला।”
डॉ. मयंक सोमानी, एमडी एवं सीईओ, अपोलोमेडिक्स सुपरस्पेशलिटी हॉस्पिटल, लखनऊ, ने कहा, “इस मामले में अलग-अलग चिकित्सा विशेषज्ञताओं के बीच समन्वय की महत्वपूर्ण भूमिका रही। कार्डियक सर्जरी, एनेस्थीसिया और सर्जिकल ऑन्कोलॉजी की टीमों ने मिलकर मरीज के लिए एक सुरक्षित उपचार योजना तैयार की। अपोलोमेडिक्स में एक ही छत के नीचे विभिन्न विशेषज्ञताओं और आवश्यक चिकित्सा सुविधाओं की उपलब्धता ने इस जटिल प्रक्रिया को एक ही अस्पताल में पूरा करने में मदद की।”
अपोलोमेडिक्स सुपरस्पेशलिटी हॉस्पिटल, लखनऊ के अनुसार, अस्पताल में जटिल मामलों के प्रबंधन के लिए विभिन्न चिकित्सा विभागों की विशेषज्ञता और आवश्यक चिकित्सा संसाधन उपलब्ध हैं, जिससे अलग-अलग विशेषज्ञताओं की संयुक्त टीम मरीज के उपचार की योजना तैयार कर सकती है।
