दीपावली पर सुरक्षित और स्वस्थ उत्सव मनाने की अपील, पटाखों से लेकर मिलावटी मिठाइयों तक बरतें सावधानी: सुनील यादव
फार्मासिस्ट फेडरेशन के अध्यक्ष ने पटाखों से होने वाली दुर्घटनाओं, आंखों की चोट, वायु प्रदूषण और खाद्य मिलावट से बचाव के लिए जारी की जन-अपील
लखनऊ। दीपावली प्रकाश, उल्लास और खुशियों का पर्व है। त्योहार की खुशियां किसी दुर्घटना या स्वास्थ्य समस्या में न बदलें, इसके लिए जरूरी है कि लोग थोड़ी सावधानी बरतें। फार्मासिस्ट फेडरेशन के अध्यक्ष सुनील यादव ने एक वर्चुअल बैठक के माध्यम से आम नागरिकों, फार्मासिस्टों और अस्पताल प्रशासन से दीपावली के दौरान विशेष सतर्कता बरतने की अपील की है।
सुनील यादव ने कहा कि पटाखों से आग लगने, जलने, आंखों में चोट, खाद्य पदार्थों में मिलावट और वायु प्रदूषण जैसी समस्याएं त्योहार के दौरान गंभीर रूप ले सकती हैं। इसलिए सभी को अपनी और अपने परिवार की सुरक्षा को प्राथमिकता देनी चाहिए। उन्होंने पटाखों के सुरक्षित इस्तेमाल, दुर्घटना की स्थिति में प्राथमिक उपचार, मरीजों की विशेष देखभाल और अस्पतालों की आपातकालीन तैयारियों को लेकर महत्वपूर्ण सुझाव दिए।
पटाखे जलाते समय रखें विशेष सावधानी
सुनील यादव ने अपील की कि पटाखे हमेशा लाइसेंस प्राप्त विक्रेताओं से खरीदें और उनके पैकेट पर दिए गए सुरक्षा निर्देशों का पालन करें। पटाखे खुले एवं सुरक्षित स्थान पर ही जलाएं। घरों, अस्पतालों, वाहनों, पेट्रोल पंपों और ज्वलनशील पदार्थों के आसपास पटाखे जलाने से बचें।
उन्होंने कहा कि बच्चों को कभी अकेले पटाखे न जलाने दें। पटाखे जलाते समय वयस्कों की निगरानी जरूरी है। लोगों को सूती और शरीर से सटे कपड़े पहनने चाहिए। ढीले तथा सिंथेटिक कपड़ों से बचना चाहिए और पैरों में बंद जूते पहनने चाहिए। पटाखे जलाते समय पानी और रेत से भरी बाल्टी पास में रखें।
उन्होंने विशेष रूप से चेताया कि पटाखे हाथ में पकड़कर न जलाएं और जलाने के बाद उनके पास झुकने से बचें। यदि कोई पटाखा नहीं फूटता है तो उसके पास न जाएं, उसे छुएं या उठाएं नहीं और दोबारा जलाने का प्रयास बिल्कुल न करें। आसपास के लोगों को दूर रखें तथा स्थानीय प्रशासन के निर्देशों के अनुसार उसका सुरक्षित निस्तारण करें। फुलझड़ी की लोहे की तार भी इस्तेमाल के बाद गर्म रहती है, इसलिए उसे तुरंत न छुएं।
जलने पर अपनाएं सही प्राथमिक उपचार
पटाखों से किसी व्यक्ति के कपड़ों में आग लगने पर उसे दौड़ने से रोकें और जमीन पर लेटकर लुढ़कने (Stop, Drop and Roll) में मदद करें। जरूरत पड़ने पर कंबल से आग बुझाने का प्रयास करें।
जलने की स्थिति में प्रभावित स्थान को लगभग 20 मिनट तक साफ, ठंडे बहते पानी से ठंडा करें। जले हुए हिस्से पर बर्फ, टूथपेस्ट, घी, तेल, हल्दी, स्याही या कोई घरेलू लेप न लगाएं। फफोलों को न फोड़ें और त्वचा से चिपके कपड़ों को जबरदस्ती न हटाएं।
प्रभावित हिस्से को साफ, सूखी और न चिपकने वाली ड्रेसिंग से ढकें। चेहरे, हाथ, पैर, आंख या जननांग में जलने, गहरे घाव अथवा शरीर के बड़े हिस्से के जलने पर तत्काल अस्पताल पहुंचें। सांस लेने में परेशानी होने पर भी बिना देरी किए चिकित्सा सहायता लें। बच्चों और बुजुर्गों के जलने की स्थिति को विशेष गंभीरता से लेना चाहिए।
आंखों की चोट को न करें नजरअंदाज
पटाखों से निकलने वाली चिंगारी, कण और रासायनिक पदार्थ आंखों को गंभीर नुकसान पहुंचा सकते हैं। आंख में धूल, रसायन या पटाखे का कोई कण जाने पर साफ पानी से 15 से 20 मिनट तक लगातार आंख धोएं।
आंख को न रगड़ें और न ही उस पर दबाव डालें। आंख में फंसी वस्तु को स्वयं निकालने का प्रयास न करें। बिना चिकित्सकीय सलाह के कोई आई ड्रॉप या मलहम भी न डालें। ऐसी स्थिति में तत्काल नेत्र विशेषज्ञ या नजदीकी अस्पताल में उपचार कराएं।
पटाखों के विस्फोट से गंभीर चोट और रक्तस्राव भी हो सकता है। अत्यधिक रक्तस्राव होने पर साफ कपड़े से घाव पर सीधा दबाव बनाएं और तुरंत चिकित्सा सहायता लें।
हृदय और सांस के मरीज रहें सतर्क
सुनील यादव ने कहा कि दीपावली के दौरान पटाखों का धुआं और बढ़ता वायु एवं ध्वनि प्रदूषण हृदय रोगियों, उच्च रक्तचाप, मधुमेह, अस्थमा और सीओपीडी के मरीजों के लिए विशेष रूप से नुकसानदायक हो सकता है।
हृदय रोगियों को चिकित्सक द्वारा निर्धारित दवाओं का नियमित सेवन करना चाहिए और अपनी दवाएं स्वयं बंद नहीं करनी चाहिए। उन्हें अत्यधिक धुएं, तेज आवाज और अनावश्यक शारीरिक परिश्रम से बचना चाहिए।
सीने में दर्द, दबाव या भारीपन, सांस फूलना, ठंडा पसीना, चक्कर आना अथवा दर्द का हाथ, कंधे या जबड़े तक फैलना गंभीर चेतावनी संकेत हो सकते हैं। ऐसे लक्षण दिखने पर तुरंत 112 या 108 पर संपर्क कर चिकित्सा सहायता लें। स्वयं वाहन चलाकर अस्पताल जाने से बचें।
अस्थमा और सीओपीडी के मरीजों को पटाखों के धुएं और धूल से दूर रहना चाहिए। अत्यधिक प्रदूषण के समय अनावश्यक रूप से घर से बाहर न निकलें और खुले में व्यायाम करने से बचें। चिकित्सक द्वारा निर्धारित इनहेलर और अन्य दवाएं अपने पास रखें। घर के भीतर धुआं आने से रोकने के लिए खिड़की-दरवाजे बंद रखें और स्वच्छ हवा वाले स्थान पर रहें।
सांस लेने में अत्यधिक कठिनाई, बोलने में परेशानी, होंठ नीले पड़ने या इनहेलर से राहत न मिलने पर तत्काल अस्पताल पहुंचें। बच्चों, गर्भवती महिलाओं और बुजुर्गों को भी पटाखों के धुएं तथा प्रदूषण से विशेष रूप से बचाने की जरूरत है।
मिठाइयों और डेयरी उत्पादों की खरीद में बरतें सावधानी
त्योहार के दौरान मावा, खोया, पनीर, दूध और मिठाइयों की मांग बढ़ने के साथ मिलावट की आशंका भी बढ़ जाती है। सुनील यादव ने लोगों से प्रतिष्ठित और एफएसएसएआई लाइसेंस या पंजीकरण प्राप्त दुकानों से ही मिठाइयां खरीदने की अपील की।
पैक्ड खाद्य उत्पाद खरीदते समय निर्माण तिथि, उपयोग की अंतिम तिथि, पैकेजिंग और एफएसएसएआई लाइसेंस नंबर जरूर देखें। अत्यधिक चमकीले या असामान्य रंग वाली मिठाइयों से बचें। मावा और छेना से बनी मिठाइयों को खरीदने के बाद जल्द फ्रिज में रखें। फ्रिज का तापमान 5 डिग्री सेल्सियस से कम बनाए रखें और मिठाइयों को लंबे समय तक सामान्य तापमान पर न छोड़ें।
संदिग्ध गंध, रंग, स्वाद या बनावट वाले खाद्य पदार्थों का सेवन न करें। एफएसएसएआई के DART घरेलू परीक्षण कुछ विशेष प्रकार की मिलावट की प्रारंभिक पहचान में मदद कर सकते हैं, लेकिन इन्हें खाद्य पदार्थ की पूर्ण शुद्धता का प्रमाण नहीं माना जाना चाहिए।
मिलावट की आशंका होने पर संबंधित खाद्य सुरक्षा अधिकारी या एफएसडीए को सूचना दें। इसके अलावा एफएसएसएआई के फूड सेफ्टी कनेक्ट पोर्टल या ऐप के माध्यम से शिकायत की जा सकती है। इसके लिए एफएसएसएआई हेल्पलाइन नंबर 1800-11-2100 पर भी संपर्क किया जा सकता है।
दूषित भोजन से उल्टी-दस्त होने पर क्या करें?
बासी या दूषित भोजन खाने के बाद उल्टी, दस्त अथवा पेट दर्द की शिकायत होने पर शरीर में पानी की कमी न होने दें। इसके लिए ओआरएस का सेवन पैकेट पर दिए गए निर्देशों के अनुसार करें। थोड़ी-थोड़ी मात्रा में तरल पदार्थ लेते रहें और हल्का भोजन करें।
बिना चिकित्सकीय सलाह के एंटीबायोटिक या उल्टी-दस्त रोकने वाली दवाओं का सेवन न करें। लगातार उल्टी, तेज बुखार, मल में खून, चक्कर, बहुत कम पेशाब या निर्जलीकरण के लक्षण दिखाई देने पर तत्काल चिकित्सकीय सहायता लें। बच्चों, बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं में ऐसे लक्षणों को गंभीरता से लेना चाहिए।
अस्पतालों में आपातकालीन सेवाएं दुरुस्त रखने की अपील
फार्मासिस्ट फेडरेशन के अध्यक्ष सुनील यादव ने सभी फार्मासिस्टों और अस्पताल प्रशासन से दीपावली के दौरान आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्थाएं पूरी तरह तैयार रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि सरकारी चिकित्सालयों में जलने, आंखों की चोट, पटाखों के विस्फोट और अन्य दुर्घटनाओं के उपचार के लिए जरूरी दवाएं, ड्रेसिंग सामग्री और चिकित्सा उपकरण उपलब्ध होने चाहिए।
उन्होंने अस्पतालों में ऑक्सीजन, सक्शन मशीन, बैग-वॉल्व-मास्क (एम्बू बैग), एयरवे ट्रॉली, पल्स ऑक्सीमीटर, ईसीजी, डिफिब्रिलेटर और नेबुलाइजर को कार्यशील स्थिति में रखने पर जोर दिया। इसके साथ ही एंबुलेंस, ब्लड बैंक, आईसीयू, बर्न यूनिट और उच्च चिकित्सा संस्थानों के साथ रेफरल व्यवस्था सक्रिय रखने की आवश्यकता बताई। अस्पताल परिसर में अग्निशमन यंत्रों, अग्नि सुरक्षा उपकरणों, आपातकालीन निकास और विद्युत बैकअप की भी जांच कराने की अपील की।
सुनील यादव ने अंत में कहा कि दीपावली का वास्तविक आनंद तभी है, जब हर व्यक्ति सुरक्षित और स्वस्थ रहकर त्योहार की खुशियां साझा करे। थोड़ी सी जागरूकता और सावधानी से दुर्घटनाओं को रोका जा सकता है। लोगों को जिम्मेदारी के साथ त्योहार मनाना चाहिए और दूसरों की सुरक्षा का भी ध्यान रखना चाहिए।
