अरिजीत सिंह की हेशेल पहल: केवल ₹40 में गरिमापूर्ण शुद्ध शाकाहारी भोजन
मुर्शिदाबाद (पश्चिम बंगाल)। भारत के मशहूर गायक अरिजीत सिंह, जिनकी सादगी और भावपूर्ण गायन ने उन्हें हर दिल अजीज बना दिया है, अब सामाजिक सेवा के क्षेत्र में भी मिसाल बनते नजर आ रहे हैं। अपने गृहनगर जियागंज, मुर्शिदाबाद में उन्होंने एक ऐसी पहल शुरू की है जो न केवल भूख मिटाती है बल्कि सम्मान और समानता का भाव भी संजोए हुए है। अरिजीत द्वारा स्थापित यह होटल ‘हेशेल’, केवल ₹40 में शुद्ध शाकाहारी भोजन परोसता है, जिसमें दाल, चावल, सब्ज़ी, रोटी और मौसमी व्यंजन शामिल होते हैं।
'हेशेल' की खासियत: स्वाद, स्वच्छता और सेवा का संगम
‘हेशेल’, जो कि बंगाली भाषा में 'रसोई' का पर्याय है, अरिजीत सिंह के उस दृष्टिकोण को दर्शाता है जिसमें लाभ से पहले सेवा का स्थान है। जहां अन्य सेलेब्रिटी फाइव-स्टार या हाई-प्रोफाइल रेस्टोरेंट्स में निवेश करते हैं, वहीं अरिजीत ने एक ऐसा जनोपयोगी भोजनालय बनाया है जो छात्रों, मजदूरों और निम्न आय वर्ग के लोगों के लिए आदर्श बन चुका है। यहां परोसे जाने वाले भोजन की गुणवत्ता, पोषण और स्वच्छता पर विशेष ध्यान दिया जाता है ताकि हर व्यक्ति को घर जैसा भोजन मिले — बिना किसी भेदभाव या दिखावे के।
अरिजीत की सोच: भोजन सबका अधिकार है
अरिजीत सिंह का यह मानना है कि भोजन कोई विशेषाधिकार नहीं, बल्कि मूलभूत अधिकार है। संगीत की दुनिया में बड़ी सफलता हासिल करने के बावजूद, उन्होंने अपने जड़ों को नहीं छोड़ा। उनका कहना है:“मैं पैसे कमाने से ज्यादा लोगों की सेवा करना चाहता हूं। अगर कोई खाली पेट सो रहा है, तो मेरी सफलता अधूरी है।” ‘हेशेल’ की स्थापना इसी सोच से प्रेरित है — समाज को कुछ लौटाने की भावना और गौरव के साथ जीने का हक देने की जिम्मेदारी।
स्थानीय लोगों के लिए भी वरदान बनी यह पहल
यह होटल सिर्फ भोजन नहीं परोसता, बल्कि स्थानीय रोजगार, किसानों और छोटे व्यवसायियों को भी सहारा देता है। होटल में इस्तेमाल होने वाली अधिकतर सामग्री स्थानीय स्रोतों से खरीदी जाती है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी बल मिलता है। रोजाना सैकड़ों लोग ‘हेशेल’ में भोजन करने आते हैं, और यह स्थान अब मुर्शिदाबाद में सामाजिक समानता का प्रतीक बन चुका है।
