वर्दी उतरने के बाद भी जारी है देश सेवा: थल सेनाध्यक्ष जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने लखनऊ में पूर्व सैनिकों को सराहा
लखनऊ: राष्ट्र निर्माण और समाज कल्याण के प्रति हमारे पूर्व सैनिकों (Veterans) का जज्बा कभी कम नहीं होता। इसी समर्पण को सम्मानित करने के लिए 4 जून को लखनऊ के ऐतिहासिक सूर्या कमांड इंस्टीट्यूट (Surya Command Institute) में एक भव्य अभिनंदन समारोह आयोजित किया गया। इस गौरवमयी अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद थल सेनाध्यक्ष (COAS) जनरल उपेंद्र द्विवेदी (PVSM, AVSM) ने समाज सेवा के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले चुनिंदा पूर्व सैनिकों को सम्मानित किया।
यह कार्यक्रम सेंट्रल कमांड के जीओसी-इन-सी (GOC-in-C) लेफ्टिनेंट जनरल अनिंद्य सेनगुप्ता (PVSM, UYSM, AVSM, YSM) की गरिमामयी उपस्थिति में संपन्न हुआ। समारोह में हेडक्वार्टर सेंट्रल कमांड (HQCC) के कई वरिष्ठ सेवारत सैन्य अधिकारियों के साथ-साथ बड़ी संख्या में पूर्व सैनिक और उनके परिवार शामिल हुए।
सेना प्रमुख ने कहा— "रिटायरमेंट के बाद भी समाज को दिशा दे रहे हैं वेटरन्स"
सम्मानित पूर्व सैनिकों को स्मृति चिह्न (Memento) और प्रशस्ति पत्र (Commendation Card) सौंपते हुए थल सेनाध्यक्ष जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने उनके निस्वार्थ कार्यों की जमकर सराहना की। उन्होंने कहा कि सैन्य जीवन की शानदार पारी पूरी करने के बाद भी हमारे पूर्व सैनिक जिस प्रकार समाज की बेहतरी के लिए जुटे हैं, वह अद्वितीय है।
इन जांबाज दिग्गजों ने शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यावरण संरक्षण, कौशल विकास (Skill Development) और जरूरतमंद व वंचित वर्गों की मदद के लिए कई प्रभावी सामाजिक अभियान चलाए हैं, जिन्होंने जमीनी स्तर पर अनगिनत नागरिकों के जीवन को संवारा है।

1965 और 1971 के युद्ध नायक, 87 वर्षीय कर्नल एम.एम. घोष भी सम्मानित
इस समारोह का सबसे भावुक और प्रेरणादायक पल वह था जब सेना प्रमुख ने त्यागी विहार AWHO कॉलोनी के रहने वाले 87 वर्षीय वरिष्ठ वेटरन कर्नल एम.एम. घोष (Col MM GHOSH) को मंच पर सम्मानित किया। कर्नल घोष ने 1965 और 1971 के ऐतिहासिक युद्धों में अग्रिम मोर्चे पर रहकर देश की रक्षा की थी। इस उम्र में भी समाज सेवा के प्रति उनके अडिग संकल्प को देखकर पूरा हॉल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। कर्नल घोष के साथ ही 5 अन्य सम्मानित पूर्व सैनिकों को भी यह विशेष सम्मान दिया गया।
"सेवा परमो धर्म:" के सैन्य मूल्यों की अनूठी मिसाल
यह सम्मान समारोह उन जांबाज दिग्गजों की मेहनत और लीडरशिप को सलाम करता है, जो आज भी भारतीय सेना के मूल आदर्श “सेवा परमो धर्म:” (Service Before Self) को जी रहे हैं। इन पूर्व सैनिकों का जीवन इस बात का सबसे बड़ा प्रमाण है कि सेना में सीखे गए अनुशासन, कर्तव्यनिष्ठा और मानवीय मूल्यों का उपयोग युद्ध के मैदान के बाहर भी समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए कितनी खूबसूरती से किया जा सकता है।
दिखा भाईचारे और आपसी सम्मान का अनूठा संगम
समारोह के दौरान वर्तमान में देश की सीमाओं की रक्षा कर रहे सेवारत सैन्य अफसरों और पुराने वेटरन्स के बीच बेहद आत्मीय संवाद देखने को मिला। इस मिलन ने सेना के भीतर आपसी भाईचारे (Camaraderie) और सम्मान की परंपरा को और गहरा किया। कार्यक्रम का समापन भारतीय सेना, उसके पूर्व सैनिकों और आम जनता के बीच के इस मजबूत रिश्ते को भविष्य में और अधिक सुदृढ़ करने के संकल्प के साथ हुआ।

