आर्मी चीफ जनरल उपेंद्र द्विवेदी की सख्त चेतावनी: “उकसावे पर पहले से ज्यादा कठोर जवाब देगा भारत”

 
Army Chief Warns Pakistan 8 Terror Camps Active

भारत के आर्मी चीफ जनरल उपेंद्र द्विवेदी , जिनका हालिया बयान सुनकर पाकिस्तान में बैठे लोगों की नींद उड़ जाना तय है। 2026 की पहली प्रेस कॉन्फ्रेंस में जनरल साहब ने जो कहा, वो किसी चेतावनी से कम नहीं था। साफ शब्दों में मैसेज दे दिया गया है — “हम सब देख रहे हैं, और अगर हरकत हुई, तो जवाब पहले से ज्यादा सख्त होगा।”

जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने खुलासा किया कि इस वक्त भी 8 आतंकी ट्रेनिंग कैंप एक्टिव हैं। इनमें से 2 इंटरनेशनल बॉर्डर के पास और 6 लाइन ऑफ कंट्रोल (LoC) के आसपास चल रहे हैं। हर एक कैंप में करीब 100 से 150 आतंकी मौजूद हैं। यानी ये कोई छोटी-मोटी गतिविधि नहीं, बल्कि पूरी तरह से संगठित सिस्टम है। लेकिन फर्क ये है कि अब भारत की खुफिया एजेंसियां और सेना हर मूवमेंट पर 24×7 नजर रखे हुए हैं।

आर्मी चीफ का मैसेज बिल्कुल क्लियर था — अगर इन कैंपों से किसी भी तरह का उकसावा हुआ, तो भारत एक बार फिर करारा जवाब देगा। और इस बार कोई रुकावट नहीं होगी। सीधे शब्दों में कहें, तो पिछली कार्रवाई सिर्फ ट्रेलर थी, अगली बार फुल पिक्चर दिखाई जा सकती है।

अब ज़रा पीछे चलते हैं और याद करते हैं ऑपरेशन सिंदूर। साल 2025 में पहलगाम में हुए आतंकी हमले में 26 निर्दोष टूरिस्टों की जान चली गई थी। इस हमले की जिम्मेदारी पाकिस्तान समर्थित आतंकी संगठन TRF, जो लश्कर-ए-तैयबा का प्रॉक्सी माना जाता है, ने ली थी। इसके बाद भारत ने 7 मई को ऑपरेशन सिंदूर लॉन्च किया।

इस ऑपरेशन के तहत पाकिस्तान और PoK में मौजूद 9 आतंकी ठिकानों पर मिसाइल स्ट्राइक्स की गईं। इनमें से 7 टारगेट पूरी तरह तबाह कर दिए गए, जबकि बाकी 2 को भारी नुकसान पहुंचा। करीब 88 घंटे तक चले इस ऑपरेशन के दौरान LoC और IB पर हुई फायरिंग में पाकिस्तानी सेना के 100 से ज्यादा जवान मारे गए।

भारत की इस कार्रवाई से पाकिस्तान इतना घबरा गया कि उसे अमेरिका के पास दौड़ लगानी पड़ी। सामने आए डॉक्यूमेंट्स के मुताबिक, पाकिस्तान ने अमेरिका में हर महीने 50,000 डॉलर देकर लॉबिस्ट हायर किए, ताकि भारत पर दबाव डलवाया जा सके। यहां तक कि ट्रेड और मिनरल्स तक ऑफर किए गए, बस एक ही बात — “इंडिया को रोक दो।”

ऑपरेशन के बाद दोनों देशों के DGMO की मीटिंग हुई और सीमाओं पर फॉरवर्ड डिप्लॉयमेंट कुछ हद तक कम की गई। लेकिन एक बात बहुत साफ थी — न्यूक्लियर धमकियों की बातें सिर्फ पाकिस्तान की तरफ से आईं, भारत की सेना ने कभी ऐसा कुछ नहीं कहा। यही नहीं, भारत ने पहली बार परमाणु और पारंपरिक युद्ध के बीच की स्पेस को इस्तेमाल करके ये साफ कर दिया कि अब न्यूक्लियर ब्लैकमेल काम नहीं करेगा।

CDS जनरल अनिल चौहान ने भी माना कि इस ऑपरेशन ने पाकिस्तान की सैन्य कमजोरियों को उजागर कर दिया। हालात ऐसे बने कि पाकिस्तान को अपनी सेना से जुड़े संवैधानिक बदलावों पर तक सोचना पड़ा।

विवादों की बात करें तो पहलगाम हमले के दौरान आतंकियों द्वारा धर्म पूछकर गोली चलाने के आरोपों को पाकिस्तान ने नकार दिया था। लेकिन बाद में सामने आए अंतरराष्ट्रीय दस्तावेजों से साफ हो गया कि वो खुद बचने के लिए लॉबिंग कर रहा था। हाल ही में जम्मू क्षेत्र में पाकिस्तानी ड्रोन भी स्पॉट किए गए, जिस पर भारत ने DGMO स्तर पर सख्त आपत्ति जताई।

जनरल उपेंद्र द्विवेदी इससे पहले भी साफ कह चुके हैं कि अगर पाकिस्तान आतंकवाद को अपनी नीति बनाए रखेगा, तो उसे ये सोचना पड़ेगा कि वो वर्ल्ड मैप पर किस हालत में रहेगा। ये बयान सिर्फ शब्द नहीं, बल्कि एक स्ट्रैटेजिक वॉर्निंग है।

आज की इंडियन आर्मी अब “सॉरी” मोड में नहीं, बल्कि “स्ट्रॉन्ग रिप्लाई” मोड में है। मैसेज बिल्कुल साफ है — नजर रखी जा रही है, गलती मत करना।

अब सवाल आपसे है — क्या पाकिस्तान वाकई सुधरेगा, या फिर वही पुराना ड्रामा चलता रहेगा?
 

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