आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से संवर रहा बेटियों का भविष्य: डिंपल अग्रवाल बोलीं— डिजिटल हुनर सीख आत्मनिर्भर बन रही हैं छोटे शहरों की लड़कियां
डिजिटल एजुकेशन और एआई आधारित तकनीकों ने न केवल रोजगार के पारंपरिक तौर-तरीकों को बदला है, बल्कि महिलाओं को घर बैठे एक शानदार करियर बनाने का विकल्प भी दिया है। तकनीकी विशेषज्ञों का अनुमान है कि आने वाले समय में एआई के क्षेत्र में लाखों नए रोजगार पैदा होंगे, जिनमें महिला वर्कफोर्स की भूमिका बेहद निर्णायक होने वाली है।
एआई बना करियर का नया विकल्प: कोडिंग की बंदिशें हुईं खत्म
डिजिटल विशेषज्ञ डिंपल अग्रवाल के अनुसार, एआई अब सिर्फ एक तकनीकी शब्द नहीं रह गया है, बल्कि यह एक ऐसा जीवन बदलने वाला हुनर बन चुका है जो हर लड़की को आर्थिक रूप से स्वतंत्र बना सकता है। अच्छी बात यह है कि अब एआई में करियर बनाने के लिए सिर्फ जटिल कोडिंग सीखने की बाध्यता नहीं रही।
उन्होंने बताया कि आज की लड़कियां निम्नलिखित आधुनिक क्षेत्रों में तेजी से अपनी धाक जमा रही हैं:
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कंटेंट क्रिएशन और डिजिटल मार्केटिंग
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डाटा एनालिसिस और सोशल मीडिया मैनेजमेंट
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चैटबॉट ऑटोमेशन और ग्राफिक डिजाइनिंग
कैनवा (Canva) और मिडजर्नी (Midjourney) जैसे एडवांस्ड एआई टूल्स की मदद से अब कम समय में प्रोफेशनल स्तर का डिजाइनिंग और डिजिटल कंटेंट तैयार करना बेहद आसान हो गया है।
छोटे शहरों से वैश्विक मंच तक: 'वॉवेल' की अनोखी पहल
डिम्पल अग्रवाल ने अपने अनुभवों को साझा करते हुए बताया कि उन्होंने खुद एक छोटे शहर से अपने सफर की शुरुआत की थी। डिजिटल जगत की ताकत को समझने के बाद उन्हें यह अहसास हुआ कि इस क्षेत्र में आगे बढ़ने की कोई सीमा नहीं है।
इसी सोच के साथ 'नेक्स्टजेन लर्निंग बाय वॉवेल' और 'वॉवेल डिजिटल एडवर्ल्ड' के माध्यम से ग्रामीण व कस्बाई इलाकों में विशेष डिजिटल और एआई वर्कशॉप्स (कार्यशालाएं) आयोजित की जा रही हैं। इन अभियानों के जरिए हजारों लड़कियों को प्रशिक्षित कर उन्हें स्वरोजगार और फ्रीलांसिंग करियर से जोड़ा जा रहा है।
सामाजिक चुनौतियां और बदलता परिदृश्य
तकनीकी विकास के बावजूद जमीनी स्तर पर कुछ चुनौतियां आज भी बरकरार हैं, जैसे:
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तकनीकी क्षेत्रों के लिए परिवार से अनुमति मिलने में कठिनाई।
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पर्सनल डिजिटल डिवाइसेज (लैपटॉप/कंप्यूटर) की उपलब्धता की कमी।
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तकनीक को केवल लड़कों का क्षेत्र मानने वाली रूढ़िवादी सामाजिक सोच।
हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि देश में सस्ते इंटरनेट की पहुंच और मुफ्त ऑनलाइन कोर्सेज की उपलब्धता ने इन दीवारों को काफी हद तक गिराने का काम किया है।
"वक्त का तकाजा है एआई सीखना"
विशेषज्ञों का स्पष्ट संदेश है कि आने वाले समय में एआई ही दुनिया की सबसे बड़ी ताकत बनने जा रहा है। ऐसे में बेटियों को समय रहते डिजिटल टूल्स और नई तकनीकों से रूबरू कराना बेहद जरूरी है ताकि वे केवल नौकरी पाने वाली ही नहीं, बल्कि बिजनेस (उद्यमिता) के क्षेत्र में भी लीडर बन सकें। उन्होंने युवा महिलाओं से अपील की कि वे ऑनलाइन कोर्सेज और डिजिटल वर्कशॉप्स का पूरा फायदा उठाएं, क्योंकि आज सीखी गई तकनीक ही कल उनकी सफलता की नई इबारत लिखेगी
