ASCI Annual Report 2025-26: भ्रामक विज्ञापनों में डिजिटल मीडिया सबसे आगे; विदेशी सट्टेबाजी ऐप्स ने तोड़े सबसे ज्यादा नियम, एएससीआई की रिपोर्ट में खुलासा

ASCI Annual Report 2025-26: Digital Media Leads in Misleading Advertisements; Foreign Betting Apps Violated the Most Rules—ASCI Report Reveals
 
ASCI Annual Report 2025-26: भ्रामक विज्ञापनों में डिजिटल मीडिया सबसे आगे; विदेशी सट्टेबाजी ऐप्स ने तोड़े सबसे ज्यादा नियम, एएससीआई की रिपोर्ट में खुलासा
लखनऊ (वाणिज्य डेस्क): भारत में विज्ञापनों की शुचिता और नियमों की निगरानी करने वाली संस्था एडवर्टाइजिंग स्टैण्ड्र्स काउंसिल ऑफ इंडिया (ASCI) ने वर्ष 2025-2026 की अपनी सालाना शिकायत रिपोर्ट जारी कर दी है। इस रिपोर्ट के आंकड़े चौंकाने वाले हैं। कड़े सरकारी दिशा-निर्देशों और कानूनी प्रतिबंधों के बावजूद, विदेशों से संचालित होने वाले सट्टेबाजी (ऑफशोर बेटिंग) के प्लेटफॉर्म विज्ञापन नियमों का उल्लंघन करने में सबसे आगे रहे हैं।

📊 नियम तोड़ने वाली टॉप-5 श्रेणियां:

ASCI की रिपोर्ट के मुताबिक, इस साल अलग-अलग सेक्टर्स में भ्रामक विज्ञापनों के खिलाफ कुल 11,581 मामलों की जांच की गई। नियमों के उल्लंघन में प्रमुख श्रेणियां इस प्रकार रहीं:

श्रेणी (Category) दर्ज मामलों की संख्या
ऑफशोर बेटिंग (विदेशी सट्टेबाजी) 6,933 मामले
रियल एस्टेट (Real Estate) 643 मामले
पर्सनल केयर (ब्यूटी प्रोडक्ट्स) 576 मामले
खाद्य एवं पेय पदार्थ (Food & Beverages) 331 मामले
ड्रग्स एंड मैजिक रेमेडीज (जादुई इलाज) 274 मामले

🌐 विज्ञापनों में हेरफेर का गढ़ बने डिजिटल प्लेटफॉर्म्स

इस साल की रिपोर्ट में पारंपरिक मीडिया (प्रिंट और टीवी) के मुकाबले डिजिटल और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर विज्ञापनों के नियमों की धज्जियां उड़ती देखी गईं।

  • कुल पकड़े गए भ्रामक विज्ञापनों में से 97.3% मामले अकेले इंटरनेट (डिजिटल प्लेटफॉर्म्स) पर पाए गए।

  • इंटरनेट पर मिलने वाले कुल भ्रामक विज्ञापनों में से 82% सोशल मीडिया पर सशुल्क (प्रायोजित/Paid) दिखाए जा रहे थे।

  • डिजिटल नियमों के उल्लंघन में अकेले मेटा (फेसबुक और इंस्टाग्राम) की हिस्सेदारी 79.84% रही।

एएससीआई के चेयरमैन सुधांशु वत्स ने इस ट्रेंड पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आज का विज्ञापन जगत अत्यधिक प्रतिस्पर्धा और डिजिटल विस्तार के कारण बदल रहा है। विज्ञापनों में बढ़ा-चढ़ाकर दावे करना, विज्ञान के नाम पर फर्जी विश्वसनीयता दिखाना और इन्फ्लुएंसर्स के जरिए भ्रामक चीजों को बढ़ावा देना अब आम बात होती जा रही है। डिजिटल विज्ञापनों में अब सख्त जवाबदेही और विज्ञापन जारी होने से पहले की निगरानी (Pre-screening) की सख्त जरूरत है।

🤝 खुद की निगरानी प्रणाली (Sua Sponte) आई काम

एएससीआई की सीईओ और महासचिव मनीषा कपूर ने बताया कि डिजिटल दौर में उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा के लिए काउंसिल ने अपनी कार्यप्रणाली में बड़ा बदलाव किया है। इस साल जांचे गए विज्ञापनों में से 93% मामलों को एएससीआई ने अपनी सक्रिय निगरानी (एआई और इन-हाउस ट्रैकिंग) के जरिए खुद पकड़ा है। उन्होंने बताया कि सूचना और प्रसारण मंत्रालय तथा तेलंगाना रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (TSRERA) के साथ मिलकर किए जा रहे सामूहिक प्रयासों से उपभोक्ताओं का भरोसा दोबारा जगाने में मदद मिल रही है।

ASCI ने इस साल कुल 9,841 विज्ञापनों से जुड़े मामलों की जांच की, जो पिछले साल की तुलना में 37% अधिक हैं। सबसे गंभीर बात यह रही कि जांच किए गए विज्ञापनों में से 98% ऐसे पाए गए जिनमें नियमों के मुताबिक तत्काल बदलाव करने की जरूरत थी।

📱 सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स और अवैध सट्टेबाजी का कॉकटेल

डिजिटल कलाकारों और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स द्वारा किया जाने वाला प्रचार (Influencer Marketing) एएससीआई के लिए इस साल चिंता का सबसे बड़ा कारण रहा। अप्रैल से दिसंबर 2025 के बीच ही इन्फ्लुएंसर्स द्वारा नियम तोड़ने के 854 मामले सीधे तौर पर सट्टेबाजी से जुड़े पाए गए, जिनमें कई सोशल मीडिया अकाउंट्स तो सिर्फ सट्टेबाजी को प्रमोट करने के लिए ही बनाए गए थे।

पूरे वित्तीय वर्ष में जांचे गए 1,609 इन्फ्लुएंसर विज्ञापनों में से 97.3% में खामियां पाई गईं और इनमें से 54% विज्ञापन उन चीजों के थे जो कानूनी रूप से प्रतिबंधित हैं।

इन्फ्लुएंसर्स द्वारा नियम तोड़ने वाले टॉप-5 क्षेत्र:

  1. अवैध सट्टेबाजी (Illegal Betting): 54% मामले

  2. पर्सनल केयर (ब्यूटी प्रोडक्ट्स): 16.9% मामले

  3. इलेक्ट्रॉनिक्स और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स: 7.9% मामले

  4. खान-पान (Food Products): 6.3% मामले

  5. फैशन और लाइफस्टाइल: 4.3% मामले

यह रिपोर्ट स्पष्ट करती है कि विदेशी सट्टेबाजी नेटवर्क अब मैसेजिंग ऐप्स, सोशल मीडिया ग्रुप्स और इन्फ्लुएंसर्स के गुप्त सिंडिकेट के जरिए बहुत तेजी से नया कंटेंट तैयार कर उपभोक्ताओं को जाल में फंसा रहे हैं। ऐसे में डिजिटल स्पेस में न केवल भ्रामक जानकारी, बल्कि पूरी तरह से गैर-कानूनी और प्रतिबंधित उत्पादों के विज्ञापनों को रोकने के लिए अत्यधिक सख्त और त्वरित विनियामक (Regulatory) कार्रवाई की आवश्यकता है।

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