सुरों की 'आशा' हुई खामोश: नहीं रहीं स्वर कोकिला आशा भोंसले, संघर्ष और सफलता से भरी थी 92 वर्षों की यात्रा

The 'hope' of tunes became silent: Swara Kokila Asha Bhosle is no more, her journey of 92 years was full of struggle and success.
 
fwewe

संगीत की दुनिया का एक दैदीप्यमान सितारा आज हमेशा के लिए आसमान में विलीन हो गया। 92 वर्ष की आयु में भारतीय संगीत जगत की दिग्गज गायिका आशा भोंसले (Asha Bhosle) ने इस नश्वर दुनिया को अलविदा कह दिया। उनकी मृत्यु के साथ ही सुरों का एक स्वर्णिम अध्याय समाप्त हो गया है, लेकिन उनकी जादुई आवाज करोड़ों दिलों में हमेशा गूंजती रहेगी।

जितनी मधुर आशा ताई की आवाज थी, उनका जीवन उतनी ही चुनौतियों और तूफानों से भरा रहा। आइए, उनके जीवन के उन पन्नों को पलटते हैं जो हर किसी के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं।

16 साल की उम्र और वो साहसी फैसला

आशा जी का जीवन कभी भी आसान नहीं रहा। महज 16 साल की छोटी सी उम्र में, जब बच्चे अपने भविष्य के सपने बुनते हैं, उन्होंने अपने परिवार के खिलाफ जाकर गणपत राव भोंसले से विवाह कर लिया। गणपत राव उनसे उम्र में 15 साल बड़े थे। यह निर्णय उनके जीवन का सबसे बड़ा मोड़ साबित हुआ, जिसे उनके परिवार ने कभी स्वीकार नहीं किया।

धोखा, दर्द और एक मां का संघर्ष

विवाह के 11 साल बाद, 1960 में यह रिश्ता बेहद कड़वाहट के साथ खत्म हो गया। बताया जाता है कि गणपत राव ने उन्हें उस समय घर से निकाल दिया था, जब वह अपने तीसरे बच्चे के साथ गर्भवती थीं। तीन छोटे बच्चों की जिम्मेदारी और अनिश्चित भविष्य—किसी भी महिला के लिए यह टूट जाने वाला समय होता, लेकिन आशा ताई ने अपनी आवाज को ही अपना हथियार बनाया। यहीं से एक अकेली मां के वैश्विक सुपरस्टार बनने का सफर शुरू हुआ।

पंचम दा के साथ नई शुरुआत

दो दशक के संघर्ष और सफलता के बाद, 1980 में उनकी जिंदगी में फिर से प्यार ने दस्तक दी। महान संगीतकार आर.डी. बर्मन (पंचम दा) के साथ उनकी जोड़ी बनी। दिलचस्प बात यह थी कि आर.डी. बर्मन उनसे 6 साल छोटे थे। इस जोड़ी ने न केवल वैवाहिक जीवन का आनंद लिया, बल्कि भारतीय संगीत को 'दम मारो दम' और 'चुरा लिया है तुमने' जैसे कालजयी गीत भी दिए।

अपनों को खोने का असहनीय गम

नियति ने आशा जी की कई बार परीक्षा ली। 1994 में आर.डी. बर्मन के निधन ने उन्हें एक बार फिर अकेला कर दिया। इसके बाद उनके जीवन में दुखों का पहाड़ तब टूटा जब 2012 में उनकी बेटी वर्षा भोंसले ने आत्महत्या कर ली और 2015 में उनके बेटे हेमंत भोंसले का कैंसर के कारण देहांत हो गया। इतने गहरे घावों के बावजूद, आशा ताई ने कभी अपनी मुस्कान और काम से मुंह नहीं मोड़ा।

एक कभी न मिटने वाली विरासत

20 से अधिक भाषाओं में हजारों गीत गाने वाली आशा भोंसले का मानना था कि "हीरा अपनी चमक कभी नहीं खोता।" उन्होंने अपनी मेहनत से इसे सच कर दिखाया। उन्हें दादा साहब फाल्के और पद्म विभूषण जैसे सर्वोच्च सम्मानों से नवाजा गया।

Tags