आशीष दीक्षित: प्रोफेसर से सफल सोलर उद्यमी बनने तक का सफर
Tue, 23 Sep 2025
लखनऊ। जीवन अक्सर हमें वहाँ ले आता है, जहाँ हमने सोचा भी नहीं होता। लखनऊ के बंथरा क्षेत्र के निवासी आशीष दीक्षित की यात्रा इसका बेहतरीन उदाहरण है। एमिटी यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर की नौकरी से शुरुआत करने वाले आशीष आज “सोलर इंजीनियर वाला” कंपनी के संस्थापक हैं और सैकड़ों युवाओं को रोजगार का अवसर प्रदान कर रहे हैं।
प्रोफेसर से करियर की शुरुआत
इंजीनियरिंग (बीटेक) की पढ़ाई पूरी करने के बाद आशीष को एमिटी यूनिवर्सिटी, लखनऊ में प्रोफेसर की नौकरी मिली। यह किसी भी युवा के लिए गौरव की बात थी। परिवार खुश था और जीवन सहजता से आगे बढ़ रहा था। वे कहते हैं—
“नौकरी अच्छी थी, सब कुछ व्यवस्थित था। लेकिन कभी-कभी हालात हमें नई दिशा दिखा देते हैं।”
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कोरोना काल और बड़ा बदलाव
साल 2021 में कोरोना महामारी के दौरान जब पूरे देश में लॉकडाउन था, तभी उनके इलाके में तीन दिनों तक लगातार बिजली गुल रही। बिना बिजली के घर में छोटे बच्चों और बुजुर्गों की दिक्कतों ने उन्हें गहराई से झकझोरा। उसी समय उनके मन में सौर ऊर्जा (Solar Energy) को स्थायी समाधान के रूप में अपनाने का विचार आया।
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सौर ऊर्जा से नया सफर
उन्होंने सबसे पहले अपने घर पर सोलर पैनल लगवाए और बिजली संकट का समाधान पाया। यही अनुभव उनके जीवन का टर्निंग प्वाइंट बन गया। रिसर्च और मेहनत के बाद उन्होंने छोटे स्तर से सोलर बिजनेस शुरू किया। ईमानदारी और भरोसे के कारण लोगों ने उनका काम हाथों-हाथ लिया।
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“सोलर इंजीनियर वाला” की स्थापना
धीरे-धीरे बढ़ते अनुभव के साथ आशीष ने अपनी कंपनी “सोलर इंजीनियर वाला” की नींव रखी। आज उनकी कंपनी घरों, दुकानों, उद्योगों और शैक्षणिक संस्थानों तक सौर ऊर्जा समाधान उपलब्ध करा रही है। उनकी पहचान अब केवल लखनऊ तक सीमित नहीं रही, बल्कि आसपास के जिलों तक फैल चुकी है।
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रोजगार के नए अवसर
कंपनी में दर्जनों युवा विभिन्न भूमिकाओं में काम कर रहे हैं—कोई इंस्टॉलेशन में है, तो कोई तकनीकी सहायता या मार्केटिंग में। आशीष का मानना है कि उनका मकसद सिर्फ व्यवसायिक सफलता नहीं, बल्कि समाज को रोजगार देना भी है।
कंपनी से जुड़े एक कर्मचारी बताते हैं—
“लॉकडाउन के बाद मैं बेरोजगार था। आशीष सर से जुड़कर न केवल नौकरी मिली, बल्कि सोलर टेक्नोलॉजी का नया कौशल भी सीखा।”
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समाज और पर्यावरण में योगदान
आज आशीष दीक्षित का काम स्थानीय युवाओं के लिए प्रेरणा है। उनकी कंपनी एक ओर बिजली की समस्या का समाधान कर रही है, वहीं दूसरी ओर पर्यावरण संरक्षण और ग्रीन एनर्जी को भी बढ़ावा दे रही है। पड़ोसियों का कहना है कि आशीष के प्रयासों से न केवल इलाके का नाम रोशन हो रहा है, बल्कि अनेक परिवारों को सहारा मिला है।
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सरकार से उम्मीदें
आशीष बताते हैं कि उनकी कंपनी सरकारी योजनाओं से भी जुड़ी हुई है। उनका मानना है कि यदि सब्सिडी और योजनाओं का लाभ लोगों तक पारदर्शी तरीके से पहुँचे, तो सौर ऊर्जा हर घर तक पहुँच सकती है। वे कहते हैं—
“सोलर एनर्जी भविष्य की सबसे बड़ी आवश्यकता है। यह न केवल किफायती है, बल्कि पर्यावरण बचाने के लिए भी जरूरी है।”
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👉 आशीष दीक्षित की कहानी इस बात का प्रमाण है कि कठिनाइयाँ ही अक्सर नए अवसरों का द्वार खोलती हैं। उनकी सोच और मेहनत ने उन्हें एक साधारण नौकरी से निकालकर समाज में बदलाव लाने वाला उद्यमी बना दिया।
