अश्वमेध धर्म ध्वजा यात्रा का शंखनाद 11,800 किमी का सफर तय कर देश में भरेगी सनातन चेतना

Conch sound of 'Ashwamedh Dharma Dhwaja Yatra'; Sanatan consciousness will fill the country by traveling 11,800 km
 
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लखनऊ। राजधानी के होटल आरिफ कैसल में आयोजित एक भव्य प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से ऐतिहासिक 'अश्वमेध धर्म ध्वजा यात्रा' की आधिकारिक घोषणा की गई। इस पावन अभियान का मुख्य उद्देश्य देश के युवाओं में धार्मिक जागृति, सांस्कृतिक एकता और राष्ट्र निर्माण की भावना का संचार करना है। कार्यक्रम में देश के ख्यातिलब्ध संतों, प्रबुद्धजीवियों और भारी संख्या में युवाओं की गरिमामयी उपस्थिति रही।

हरिहर' स्वरूप है यह सनातन एकता का अभियान: शिवाश्री ऋतु

प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए शिवाश्री ऋतु ने इस यात्रा को आध्यात्मिक गौरव का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा इस दिव्य यात्रा का हिस्सा बनना साक्षात महादेव की कृपा है। मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्रीराम की हर विजय के पीछे भगवान शिव का विशेष आशीर्वाद रहा है। इसलिए, यह यात्रा 'हरिहर' (शिव और विष्णु) स्वरूप बनकर पूरे देश में सनातन एकता का संदेश फैलाएगी।"

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चार चरणों में पूरी होगी 11,800 किलोमीटर की महायात्रा

जानकी घाट बड़ा स्थान मंदिर (अयोध्या) के रसिक पीठाधीश्वर पूज्य जन्मेजय शरण जी महाराज ने बताया कि इस महाअभियान का शुभारंभ आगामी 20 अक्टूबर को विजयदशमी (दशहरा) के पावन पर्व पर होगा। यह यात्रा पैदल, वाहनों और भारतीय रेल के माध्यम से कुल चार व्यापक चरणों में देश का भ्रमण करेगी। हर निर्धारित पड़ाव पर 'अश्वमेध धर्म यज्ञ' का भव्य आयोजन भी किया जाएगा।

यात्रा का विस्तृत मार्ग इस प्रकार है

चरण माध्यम रूट और मुख्य पड़ाव
प्रथम चरण सड़क/पैदल दिल्ली से शुरू होकर मथुरा, आगरा, ग्वालियर, उज्जैन, नासिक, मुंबई, सूरत, अहमदाबाद, उदयपुर, जयपुर और पुणे होते हुए वापस दिल्ली।
द्वितीय चरण सड़क/पैदल दिल्ली से बीकानेर, पटियाला, लुधियाना, अमृतसर, जम्मू, चंडीगढ़, देहरादून, हरिद्वार, मेरठ और गाजियाबाद होते हुए दिल्ली।
तृतीय चरण सड़क/पैदल दिल्ली से बरेली, अयोध्या, पटना, कोलकाता, रांची, वाराणसी, लखनऊ, कानपुर, फिरोजाबाद और नोएडा होते हुए दिल्ली।
चतुर्थ चरण रेल मार्ग दिल्ली से रामेश्वरम और पुणे होते हुए पुनः दिल्ली में समापन।

युवाओं को श्रीराम के आदर्शों से जोड़ना आज की आवश्यकता

पूज्य जन्मेजय शरण जी महाराज और धर्मगुरु आचार्य डॉ. संतोष जी महाराज ने संयुक्त रूप से युवा पीढ़ी को अपनी जड़ों से जुड़ने का आह्वान किया। संतों ने कहा कि सनातन धर्म केवल पूजा-पाठ की पद्धति नहीं, बल्कि जीवन जीने का वैज्ञानिक आधार है। आज के युवाओं को प्रभु श्रीराम के त्याग, सेवा और मर्यादा जैसे आदर्शों को अपने जीवन में उतारना होगा।

राम मंदिर आंदोलन के संघर्षों की यादें हुईं ताजा

इस मौके पर अमरजीत मिश्रा ने राम मंदिर आंदोलन के दिनों को याद करते हुए भावुक क्षण साझा किए। उन्होंने कहा कि उनका संपूर्ण जीवन प्रभु श्रीराम को समर्पित है और यह यात्रा उनके लिए किसी अभियान से बढ़कर एक पवित्र कर्तव्य है। वहीं, वेद प्रकाश ने इसे समाज में सकारात्मक ऊर्जा के प्रसार का एक बेहतरीन जरिया बताया।

वैश्विक स्तर पर मिल रहा है समर्थन

  • चक्रवर्तुला रमणाचा ने कहा कि पीढ़ियों से धर्म सेवा में जुटे उनके परिवार के लिए यह यात्रा एक बड़ा आध्यात्मिक उत्तरदायित्व है।

  • प्रसिद्ध फिल्म निर्देशक दुष्यंत प्रताप सिंह ने इस बात पर खुशी जताई कि यह अभियान युवाओं को सांस्कृतिक रूप से एक सूत्र में पिरो रहा है।

  • थाईलैंड से विनोद हांडा ने अपनी शुभकामनाएं भेजते हुए कहा कि यह महाअभियान वैश्विक पटल पर भारतीय संस्कृति का गौरव बढ़ाएगा।

अंत में आचार्य डॉ. संतोष ने देश के सभी श्रद्धालुओं और युवाओं से इस राष्ट्रव्यापी सांस्कृतिक महायज्ञ में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने की अपील की।

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