पवन खेड़ा के आवास पर असम पुलिस की दस्तक: तीन पासपोर्ट वाले बयान पर मचा सियासी घमासान
क्या है पूरा विवाद?
हाल ही में एक संवाददाता सम्मेलन के दौरान पवन खेड़ा ने आरोप लगाया था कि रिनिकी भुयां सरमा के पास भारतीय, कनाडाई और अमेरिकी—तीन पासपोर्ट हैं। उन्होंने इसे भ्रष्टाचार और संवैधानिक अनियमितता का उदाहरण बताते हुए असम सरकार की घेराबंदी की थी।
इस बयान पर पलटवार करते हुए मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने इन दावों को पूरी तरह बेबुनियाद और झूठा करार दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी पत्नी के पास केवल एक वैध भारतीय पासपोर्ट है। असम सरकार ने इसे मानहानि और राज्य की छवि खराब करने की साजिश मानते हुए कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है।
असम पुलिस की दिल्ली में कार्रवाई
सोमवार को असम पुलिस की एक हाई-प्रोफाइल टीम दिल्ली पहुँची। ताजा जानकारी के अनुसार:
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पुलिस ने पवन खेड़ा के आवास पर पहुंचकर जांच की, लेकिन वे वहां उपलब्ध नहीं थे।
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खेड़ा को औपचारिक नोटिस जारी कर पूछताछ के लिए उपस्थित होने को कहा गया है।
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दिल्ली पुलिस इस मामले में असम पुलिस की टीम को पूर्ण सहयोग प्रदान कर रही है।
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साक्ष्य जुटाने के लिए पुलिस खेड़ा के बयानों के वीडियो और सोशल मीडिया पोस्ट्स की बारीकी से जांच कर रही है।
सियासी गलियारों में हलचल
पवन खेड़ा के इस बयान ने असम के राजनीतिक वातावरण में तूफान ला दिया है। जहाँ कांग्रेस इसे सत्ता के दुरुपयोग के खिलाफ एक साहसिक कदम बता रही है, वहीं भाजपा ने इसे आगामी चुनावों से पहले जनता को गुमराह करने की एक घटिया 'पॉलिटिकल स्टंट' करार दिया है।
मुख्यमंत्री की पत्नी रिनिकी भुयां सरमा ने भी इस पर अपनी चुप्पी तोड़ी है। उन्होंने कहा कि उनके पास केवल भारतीय नागरिकता है और तीन पासपोर्ट का दावा पूरी तरह हास्यास्पद है।
कानूनी परिणाम और भविष्य की राह
असम के पुलिस महानिदेशक (DGP) जीपी सिंह के अनुसार, झूठे आरोपों से जनता का भरोसा टूटता है, इसलिए निष्पक्ष जांच अनिवार्य है। यदि पवन खेड़ा अपने दावों के पीछे ठोस साक्ष्य पेश नहीं कर पाते हैं, तो उन्हें मानहानि और अन्य गंभीर धाराओं के तहत कानूनी कार्यवाही का सामना करना पड़ सकता है।
फिलहाल, पवन खेड़ा के वकीलों ने संकेत दिया है कि वे जांच प्रक्रिया में सहयोग करेंगे। अब सबकी निगाहें इस पूछताछ पर टिकी हैं कि क्या कांग्रेस नेता अपने दावों को साबित करने के लिए कोई दस्तावेजी सबूत पेश कर पाएंगे या यह विवाद उनके लिए एक बड़ी कानूनी चुनौती बन जाएगा।

