अटल जी: कवि हृदय ने जिसे राजनीति से आगे अमर कर दिया
भारत रत्न, प्रखर राजनेता, ओजस्वी वक्ता और हिन्दी के महान कवि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की पुण्यतिथि पर उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन। अटल जी का व्यक्तित्व भारतीय राजनीति में जितना विराट था, उतना ही संवेदनशील उनका कवि-हृदय भी था।
उनकी प्रारंभिक चर्चित कविता “हिन्दू तन-मन, हिन्दू जीवन, रग-रग मेरा हिन्दू परिचय” ने युवावस्था में ही उनके ओजस्वी काव्य व्यक्तित्व की पहचान बना दी थी। बलरामपुर लोकसभा क्षेत्र से चुनाव जीतकर वे संसद पहुंचे और आगे चलकर देश के विदेश मंत्री बने। संयुक्त राष्ट्र महासभा में हिन्दी में संबोधन कर उन्होंने विश्व मंच पर भारतीय भाषा और संस्कृति का गौरव बढ़ाया।
अटल जी की कविता की ये पंक्तियां आज भी जीवन का दर्शन देती हैं—
“छोटे मन से कोई बड़ा नहीं होता,
टूटे मन से कोई खड़ा नहीं होता।”
राजनीतिक जीवन में उतार-चढ़ाव भी उनके संकल्प को नहीं डिगा सके। प्रधानमंत्री के रूप में उनका पहला कार्यकाल केवल 13 दिनों का रहा और बहुमत के लिए एक वोट कम पड़ने पर उन्हें इस्तीफा देना पड़ा। लेकिन वे फिर लौटे और पूर्ण कार्यकाल पूरा करते हुए देश का नेतृत्व किया।
उनके व्यक्तित्व और संघर्ष को समर्पित यह छंद उनके कवि-हृदय की श्रद्धांजलि है—
चूम लेती बाल ओज के विजयश्री स्वयं,
उर जिसके अदम्य साहस अतल है।
निष्कपट-निर्विकार हार-हार बार-बार,
युद्ध जीत जीवन के होता ही सफल है।एक वोट से भी हार-जीत के हैं परिणाम,
किन्तु रणबांकुरों की साधना में बल है।
मरने के बाद भी अमर हो के रहते वो,
सुदृढ़ जो आत्मा है, ध्रुव है, अटल है।
एक कवि की दृष्टि से देखें तो अटल जी की अमरता केवल उनके प्रधानमंत्री बनने या राजनीतिक उपलब्धियों में नहीं है। यदि उनके भीतर कवि का हृदय न होता, तो संभव है कि उनका इतिहास भी अनेक राजनेताओं की तरह राजनीतिक घटनाओं तक सीमित रह जाता। लेकिन कवि अपने समय से आगे निकल जाता है। उसकी संवेदना, विचार और शब्द आने वाली पीढ़ियों से संवाद करते रहते हैं।
महाकवि भर्तृहरि की प्रसिद्ध उक्ति इसी सत्य को व्यक्त करती है—
“जयन्तु ते सुकृतिनः रससिद्धाः कवीश्वराः।
नास्ति येषां यशःकाये जरामरणजं भयम्॥”
अर्थात् रससिद्ध और समर्थ कवि का भौतिक शरीर नश्वर हो सकता है, लेकिन उसके यश रूपी शरीर को न बुढ़ापे का भय होता है और न मृत्यु का।
अटल जी भी इसी अर्थ में हमारे बीच जीवित हैं। उनके शब्द, उनकी कविताएं, उनकी वाणी और उनका विराट व्यक्तित्व आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करता रहेगा।
80वें स्वतंत्रता दिवस के विहान में राष्ट्र के उस महान कवि-राजनेता को शत-शत नमन, विनम्र श्रद्धांजलि और सादर अभिवादन।
