स्कूल ऑफ मैनेजमेंट साइंसेज में नशामुक्त भारत अभियान के तहत जागरूकता कार्यक्रम
लखनऊ। स्कूल ऑफ मैनेजमेंट साइंसेज (SMS), लखनऊ की ओर से प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय, लखनऊ के सहयोग से ‘नशा मुक्त भारत अभियान’ के अंतर्गत जागरूकता एवं शपथ कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य युवाओं को नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करना और उन्हें स्वस्थ, सकारात्मक एवं नशामुक्त जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करना रहा।
कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए प्रो. (डॉ.) भरत राज सिंह, महानिदेशक (तकनीकी) ने अतिथियों और विद्यार्थियों का स्वागत किया। उन्होंने नशामुक्त समाज के निर्माण में युवाओं की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए विद्यार्थियों से नशे से दूर रहने और समाज में जागरूकता फैलाने का आह्वान किया।
बी.के. राधा दीदी ने अपने संबोधन में युवा पीढ़ी पर नशे के बढ़ते प्रभावों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया कि नशे की आदत व्यक्ति के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के साथ-साथ उसके पारिवारिक एवं सामाजिक जीवन को भी प्रभावित करती है। उन्होंने विद्यार्थियों को नशे से बचाव के उपाय बताए और ध्यान का संक्षिप्त अभ्यास भी कराया।

वहीं बी.के. राहुल भाईजी ने योग, ध्यान और आत्म-अनुशासन के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि नियमित योग एवं साधना के माध्यम से युवाओं की ऊर्जा को सकारात्मक और रचनात्मक दिशा में लगाया जा सकता है। इससे उन्हें नकारात्मक प्रवृत्तियों से दूर रहने में भी मदद मिलती है।
कार्यक्रम में बी.के. डॉ. ए.पी. पाण्डेय एवं बी.के. मीनाक्षी की गरिमामयी उपस्थिति रही। उन्होंने विद्यार्थियों के साथ नशामुक्त भारत की शपथ दिलाई।इस अवसर पर डॉ. धर्मेन्द्र सिंह, प्रो. मोहम्मद हुसैन, डॉ. आशा कुलश्रेष्ठा, श्री सुनीत मिश्रा, सुश्री सुजाता सिन्हा और डॉ. शोभना सिंह सहित संस्थान के शिक्षक एवं कर्मचारी मौजूद रहे। कार्यक्रम में 250 से अधिक विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और नशामुक्त, स्वस्थ एवं सकारात्मक भारत के निर्माण का संकल्प लिया।
![,;l][p[](https://aapkikhabar.com/static/c1e/client/86288/uploaded/c3440b353962a3112affde0508da479a.jpg)
कार्यक्रम के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि जागरूकता, आत्म-अनुशासन, योग और ध्यान को जीवन का हिस्सा बनाकर युवा नशे जैसी सामाजिक बुराई से दूर रह सकते हैं। साथ ही, युवाओं की सक्रिय भागीदारी से नशामुक्त और स्वस्थ समाज के निर्माण को गति दी जा सकती है।
