बाबा साहेब के तीन मूल मंत्र 'शिक्षित बनो, संगठित रहो, संघर्ष करो' ही सफल जीवन का मार्ग: राजवीर सिंह
भव्य शोभायात्रा और स्वागत
पिलखुवा में आयोजित इस विशाल शोभायात्रा का जगह-जगह भव्य स्वागत किया गया। राजवीर सिंह ने बाबा साहेब के चित्र पर माल्यार्पण कर उन्हें नमन किया। कार्यक्रम के दौरान उन्हें प्रतीक चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया। राजवीर सिंह, जो अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के पूर्व जिला संगठन मंत्री और भाजपा युवा मोर्चा के पूर्व जिला उपाध्यक्ष भी रहे हैं, ने क्षेत्रवासियों को जयंती की शुभकामनाएं दीं।
बाबा साहेब का संघर्षमय जीवन और गौरवशाली इतिहास
राजवीर सिंह ने बाबा साहेब के जीवन पर प्रकाश डालते हुए बताया:
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जन्म: बाबा साहेब का जन्म 14 अप्रैल 1891 को मध्य प्रदेश के महू छावनी में एक साधारण परिवार में हुआ था।
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बचपन: उनका बचपन का नाम 'सकपाल' था। उनके पिता राम जी राव सेना में सूबेदार के पद पर कार्यरत थे।
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शिक्षा: उन्होंने अपनी प्राथमिक शिक्षा सतारा (महाराष्ट्र) और माध्यमिक शिक्षा मुंबई के एलफिंस्टन हाई स्कूल से पूरी की। अपनी विद्वत्ता के दम पर वे विश्व रत्न और महान अर्थशास्त्री बने।
राष्ट्रीय प्रवक्ता का संदेश: तीन मूल मंत्रों को अपनाएं
सभा को संबोधित करते हुए राजवीर सिंह ने कहा डॉ. भीमराव अंबेडकर द्वारा दिए गए तीन मूल मंत्र 'शिक्षित बनो, संगठित रहो और संघर्ष करो' को प्रत्येक व्यक्ति को अपने जीवन में आत्मसात करना चाहिए। ये मंत्र न केवल व्यक्ति के उत्थान के लिए हैं, बल्कि एक समतामूलक समाज के निर्माण का आधार भी हैं।"
उन्होंने आगे कहा कि बाबा साहेब का संपूर्ण जीवन सामाजिक समरसता, समानता और न्याय की स्थापना के लिए समर्पित रहा, जो आज भी करोड़ों लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत है।
कार्यक्रम की सफलता और सामूहिक सहयोग
इस आयोजन को सफल बनाने में राजकुमार जैड, जयराज सिंह, मनोज सिंह, मंटोली सिंह, गौतम जैड, अविनाश राज सिंह, अभिषेक राज सिंह, विशाल सिंह, मनीष सिंह, भगवत प्रसाद, गौरव और रोहित सहित अनेक कार्यकर्ताओं ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
सुबह प्रभात फेरी के समय राजकुमार जैड परिवार द्वारा आयोजित स्वादिष्ट भंडारे की सभी ने सराहना की। पिलखुवा की गलियों में बाबा साहेब के जयकारों के साथ समरसता का संदेश गूंजता रहा।

