युवाओं में बढ़ रहा कमर दर्द, फिजियोथेरेपी से राहत पर जोर
लखनऊ। बदलती जीवनशैली के बीच युवाओं में कमर दर्द की समस्या तेजी से आम होती जा रही है। लंबे समय तक एक ही स्थिति में बैठकर काम करना, मोबाइल और लैपटॉप का अत्यधिक इस्तेमाल तथा गलत बैठने और खड़े होने की मुद्रा को इसके प्रमुख कारणों में माना जा रहा है। शुरुआत में सामान्य लगने वाला यह दर्द समय के साथ दैनिक गतिविधियों और कार्यक्षमता को प्रभावित कर सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, कमर दर्द से बचाव के लिए रोजमर्रा की आदतों में छोटे लेकिन जरूरी बदलाव किए जा सकते हैं। काम के दौरान लंबे समय तक लगातार बैठे रहने के बजाय हर 30 से 40 मिनट में छोटा ब्रेक लेना, बैठने की सही मुद्रा बनाए रखना और नियमित शारीरिक गतिविधि को दिनचर्या में शामिल करना उपयोगी हो सकता है।
मांसपेशियों को मजबूत बनाने में फिजियोथेरेपी की भूमिका
फिजियोथेरेपी के माध्यम से कमर और शरीर से जुड़ी मांसपेशियों की मजबूती, लचीलापन और कार्यक्षमता पर काम किया जाता है। व्यक्ति की समस्या और शारीरिक स्थिति के अनुसार चिकित्सकीय सलाह से व्यायाम एवं अन्य फिजियोथेरेपी तकनीकों का उपयोग किया जा सकता है। इससे दर्द को नियंत्रित करने और सामान्य गतिविधियों में सुधार लाने में मदद मिल सकती है।
गोएल आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल के डॉ. ओमजी तिवारी के अनुसार, कमर दर्द को लंबे समय तक नजरअंदाज करने के बजाय समय रहते उचित चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है। उनके मुताबिक, जरूरत के अनुसार फिजियोथेरेपी अपनाने से समस्या को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है और आगे होने वाली परेशानियों के जोखिम को कम किया जा सकता है।
युवाओं के लिए जरूरी सावधानियां
विशेषज्ञों के अनुसार युवाओं को काम या पढ़ाई के दौरान लगातार एक ही मुद्रा में बैठने से बचना चाहिए। मोबाइल और लैपटॉप का इस्तेमाल करते समय स्क्रीन की ऊंचाई और बैठने की स्थिति पर ध्यान देना चाहिए। इसके साथ ही नियमित व्यायाम, पर्याप्त शारीरिक गतिविधि और सही पोस्चर को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाना महत्वपूर्ण है। यदि कमर दर्द लगातार बना रहे, बढ़ता जाए या सामान्य गतिविधियों में परेशानी पैदा करे, तो स्वयं इलाज करने के बजाय योग्य चिकित्सक या फिजियोथेरेपिस्ट से परामर्श लेना बेहतर है।
