राजभाषा कार्यान्वयन में बागपत की बड़ी उपलब्धि, नराकास को मिला राष्ट्रीय सम्मान
मुंबई में 14 और 15 सितंबर को आयोजित छठे अखिल भारतीय राजभाषा सम्मेलन के दौरान गृह मंत्रालय की ओर से यह पुरस्कार प्रदान किया गया। बागपत नराकास की ओर से समिति अध्यक्ष एवं केनरा बैंक के क्षेत्रीय प्रमुख मिन्हाजुल कमर तथा समिति सचिव एवं केनरा बैंक के वरिष्ठ राजभाषा प्रबंधक अभय नाथ मिश्र ने संयुक्त रूप से सम्मान प्राप्त किया।
सम्मेलन के उद्घाटन अवसर पर केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, केंद्रीय गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय एवं बंडी संजय कुमार, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे एवं सुनेत्रा पंवार, राजभाषा विभाग की सचिव अंशुली आर्या सहित कई गणमान्य लोग मौजूद रहे। सम्मेलन में देशभर से लगभग 7,000 हिंदी प्रेमियों और विभिन्न मंत्रालयों एवं विभागों के अधिकारियों ने भाग लिया।

केंद्रीय संस्थानों के बीच समन्वय की महत्वपूर्ण कड़ी है नराकास
नगर राजभाषा कार्यान्वयन समितियों का गठन गृह मंत्रालय के राजभाषा विभाग द्वारा प्रमुख शहरों में किया जाता है। इन समितियों का उद्देश्य केंद्र सरकार के कार्यालयों, सार्वजनिक उपक्रमों, निगमों और राष्ट्रीयकृत बैंकों में हिंदी के अधिकाधिक प्रयोग को बढ़ावा देना तथा राजभाषा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन को सुनिश्चित करना है।
बागपत में नराकास केंद्रीय संस्थानों के बीच समन्वय स्थापित करने के साथ-साथ हिंदी में प्रशासनिक कार्य को सुगम बनाने के लिए विभिन्न गतिविधियों और कार्यक्रमों का संचालन करती है। जनपद में अग्रणी बैंक की भूमिका निभा रहा केनरा बैंक समिति के संयोजन और संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
‘हिंदी सेतु’ ऐप ने दिलाई अलग पहचान
राजभाषा नीति के क्रियान्वयन को आधुनिक तकनीक से जोड़ने के लिए बागपत नराकास ने कई डिजिटल पहल शुरू कीं। इनमें ‘हिंदी सेतु’ ऐप प्रमुख रहा। इस डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से राजभाषा हिंदी से संबंधित आवश्यक संसाधनों को एक ही स्थान पर उपलब्ध कराया गया, जिससे केंद्रीय कार्यालयों के अधिकारियों एवं कर्मचारियों के लिए हिंदी में काम करना और अधिक सुविधाजनक हुआ।
इस पहल से हिंदी संचार, अनुवाद और कार्यालयी कार्यों में हिंदी के प्रयोग को बढ़ावा देने में मदद मिली। समिति के इन प्रयासों में माय भारत स्वयंसेवक एवं राज्य युवा पुरस्कार विजेता अमन कुमार का भी योगदान रहा। वे यूनेस्को सहित विभिन्न राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से जुड़कर सूचना की उपलब्धता बढ़ाने के क्षेत्र में कार्य कर रहे हैं।
‘कालिंदी धारा’ ने रचनात्मक हिंदी को दिया मंच
डिजिटल पहल के साथ बागपत नराकास ने रचनात्मक लेखन को भी प्रोत्साहित किया। समिति की ओर से ‘कालिंदी धारा’ पत्रिका का नियमित प्रकाशन किया गया, जिसके माध्यम से अधिकारियों एवं कर्मचारियों को हिंदी में रचनात्मक अभिव्यक्ति के लिए मंच उपलब्ध कराया गया।
इसके अलावा अर्द्धवार्षिक समीक्षा बैठकों, हिंदी कार्यशालाओं और प्रशिक्षण कार्यक्रमों के जरिए राजभाषा कार्यान्वयन की लगातार समीक्षा की गई। सदस्य कार्यालयों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करते हुए हिंदी के प्रयोग की प्रगति, प्रशिक्षण और विभिन्न राजभाषा गतिविधियों को निरंतर आगे बढ़ाया गया।
समिति के सचिव अभय नाथ मिश्र ने राष्ट्रीय सम्मान को सभी सदस्य कार्यालयों के सामूहिक प्रयासों और सहयोग का परिणाम बताया। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि समिति से जुड़े सभी लोगों को भविष्य में और बेहतर कार्य करने के लिए प्रेरित करेगी। सम्मान मिलने से बागपत के अधिकारी वर्ग में भी उत्साह और गर्व का माहौल है।
एआई तकनीक से और समृद्ध होगी हिंदी
अखिल भारतीय राजभाषा सम्मेलन में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने भारतीय भाषाओं के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि देश की विभिन्न भाषाएं भले ही अलग-अलग स्वर प्रस्तुत करती हों, लेकिन भारत की भावना और आवाज एक है। उन्होंने मातृभाषा में सोचने, विश्लेषण करने और सृजन करने के महत्व को रेखांकित किया।
उन्होंने दूसरी भारतीय भाषा सीखने को ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की भावना से जोड़ते हुए भारतीय भाषाओं के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता बताई। गृह मंत्री ने हिंदी को देश की अन्य भारतीय भाषाओं से जोड़कर उसे और समृद्ध बनाने पर भी जोर दिया।
सम्मेलन में बताया गया कि ‘हिंदी शब्द-सिंधु’ में अब तक करीब 8 लाख शब्द शामिल किए जा चुके हैं, जिनमें 50 हजार से अधिक स्थानीय भाषाओं के शब्द भी जोड़े गए हैं। इसे वर्ष 2029 तक दुनिया का सबसे बड़ा शब्दकोश बनाने का लक्ष्य रखा गया है।
सम्मेलन के दौरान एआई आधारित ‘कंठस्थ 2.0’, ‘लीला राजभाषा’ और ‘लीला प्रवाह’ सहित बहुभाषी अनुवाद से जुड़ी तकनीकी पहलों पर भी चर्चा हुई। इन प्रयासों का उद्देश्य भारतीय भाषाओं को शासन, विज्ञान, तकनीक और साहित्य के क्षेत्र में अधिक प्रभावी ढंग से उपयोग में लाना और उन्हें आधुनिक तकनीक के माध्यम से समृद्ध करना है।
बागपत नराकास को मिला यह राष्ट्रीय सम्मान राजभाषा कार्यान्वयन के साथ डिजिटल तकनीक, प्रशिक्षण और रचनात्मक हिंदी को जोड़कर किए गए प्रयासों की राष्ट्रीय स्तर पर मिली पहचान के रूप में देखा जा रहा है।
