बलरामपुर: सोशल मीडिया पर वायरल 'सड़क घोटाला' वीडियो पड़ा भारी, भाजपा पदाधिकारी व ठेकेदार की शिकायत पर पत्रकार पर मुकदमा दर्ज
बलरामपुर (उत्तर प्रदेश): जनपद के इमिलिया खादर से मधवानगर खादर के बीच हाल ही में निर्मित एक सड़क का मामला अब सोशल मीडिया की सुर्खियों से निकलकर कानूनी जंग में तब्दील हो चुका है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कथित रूप से पत्रकार मिथिलेश कुमार द्वारा इस सड़क निर्माण में करोड़ों रुपये के महाघोटाले और भ्रष्टाचार का दावा किए जाने के बाद, संबंधित ठेकेदार और भाजपा पदाधिकारी अनन्य गौरव मिश्रा ने कड़ा रुख अपनाया है।
ठेकेदार ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे उनकी छवि धूमिल करने और रंगदारी वसूलने की सोची-समझी साजिश बताया है। इस शिकायत पर कार्रवाई करते हुए कोतवाली नगर पुलिस ने पत्रकार के खिलाफ संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर वैधानिक जांच शुरू कर दी है।
37 लाख के प्रोजेक्ट में करोड़ों का घोटाला कैसे?" — ठेकेदार का पलटवार
भाजपा पदाधिकारी व ठेकेदार अनन्य गौरव मिश्रा ने मीडिया के सामने आधिकारिक दस्तावेज सार्वजनिक करते हुए वायरल खबरों की सत्यता पर बड़े सवाल उठाए हैं। उन्होंने अपना पक्ष रखते हुए कहा जिस सड़क के नवीनीकरण और लेपन का पूरा प्रोजेक्ट ही सरकारी तौर पर मात्र 37 लाख रुपये का है, उसमें कोई करोड़ों रुपये का घोटाला कैसे कर सकता है? सोशल मीडिया पर जो वीडियो वायरल किया जा रहा है, वह हमारी बनाई गई सड़क का है ही नहीं, बल्कि किसी अन्य स्थान की बदहाल सड़क का विजुअल दिखाकर समाज में भ्रांतियां फैलाई जा रही हैं। वीडियो सार्वजनिक करने से पहले मुझसे डेढ़ लाख रुपये की रंगदारी भी मांगी गई थी, जिसकी पूरी जानकारी हमने पुलिस प्रशासन को दे दी है।"
मिश्रा ने पत्रकार पर निशाना साधते हुए कहा कि बिना किसी विभागीय जानकारी या पुख्ता सबूत के इस तरह की भ्रामक खबरें चलाना बेहद गैर-जिम्मेदाराना है। उन्होंने जिला प्रशासन से आरोपी के पत्रकारिता क्रेडेंशियल्स और कथित दोहरी नागरिकता (भारत-नेपाल) से जुड़े दस्तावेजों की भी गहनता से जांच करने की मांग की है।
पीडब्ल्यूडी (PWD) की जांच में मानक के अनुरूप मिली सड़क
सड़क की गुणवत्ता को लेकर उठे विवाद के बाद लोक निर्माण विभाग (PWD) के प्रांतीय खंड के उच्च अधिकारियों ने मामले का संज्ञान लिया। ठेकेदार के मुताबिक, विभागीय टीम ने मौके पर जाकर सड़क का विस्तृत भौतिक निरीक्षण (Physical Verification) किया था।
जांच में सड़क पूरी तरह से तय तकनीकी मानकों के अनुरूप और सही पाई गई है, जिसकी आधिकारिक रिपोर्ट विभाग द्वारा शासन को भी प्रेषित की जा चुकी है।
क्या होता है 'डिफेक्ट लायबिलिटी पीरियड'?
निर्माण कार्यों की तकनीकी प्रक्रियाओं और पारदर्शिता पर बात करते हुए मिश्रा ने स्पष्ट किया कि हर सरकारी टेंडर के तहत निर्माण कार्य की एक डिफेक्ट लायबिलिटी पीरियड (Defect Liability Period) तय होती है।
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ठेकेदार की जवाबदेही: इस निर्धारित अवधि के दौरान यदि भारी वाहनों के अचानक ब्रेक लगाने, जलभराव, रिसाव या खराब मौसम के कारण सड़क पर कोई पैच या गड्ढा आता भी है, तो ठेकेदार उसे अपने निजी खर्च पर पूरी तरह ठीक करने के लिए कानूनी रूप से बाध्य होता है।
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विभागीय सजगता: विभाग द्वारा समय-समय पर गड्ढामुक्त अभियान भी चलाया जाता है, और कार्यस्थल पर मौजूद जूनियर इंजीनियर (JE) व असिस्टेंट इंजीनियर (AE) तकनीकी सजगता से हर काम की निगरानी करते हैं। ऐसे में भ्रष्टाचार के हवाई दावों में कोई सच्चाई नहीं है।
ठेकेदार ने क्षेत्र की जनता से अपील की है कि वे सोशल मीडिया पर फैलाए जा रहे ऐसे किसी भी भ्रम के बहकावे में न आएं। फिलहाल, पुलिस मामले की एफआईआर दर्ज कर रंगदारी और भ्रामक सामग्री प्रसारित करने के सभी पहलुओं की गहराई से तफ्तीश कर रही है।
