बाराबंकी कोर्ट का बड़ा फैसला: पॉक्सो एक्ट के दोषी को 7 साल की बामशक्कत कैद ऑपरेशन कनविक्शन' से मिली कामयाबी
इन धाराओं के तहत दोषी करार
बाराबंकी के अपर सत्र न्यायाधीश/विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो एक्ट - कोर्ट नंबर 45) ने मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपी नन्कू उर्फ शोभाराम (निवासी: ग्राम नरगौर, थाना दरियाबाद, बाराबंकी) को कसूरवार पाया। अदालत ने उसे निम्नलिखित धाराओं के तहत दंडित किया है:
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IPC की धाराएं: 363 (अपहरण), 366 (शादी के लिए मजबूर करने हेतु महिला का अपहरण), 506 (आपराधिक धमकी), और 376 (दुष्कर्म)।
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विशेष कानून: पॉक्सो एक्ट (POCSO Act) की धारा 4।
क्या था पूरा मामला?
यह आपराधिक मामला साल 2017 का है। 26 सितंबर 2017 को बाराबंकी के थाना दरियाबाद में पीड़िता के पिता (वादी) ने प्राथमिकी दर्ज कराई थी। शिकायत के अनुसार, नन्कू उर्फ शोभाराम उनकी नाबालिग बेटी को बहला-फुसलाकर भगा ले गया था और उसके साथ यौन उत्पीड़न जैसी घिनौनी वारदात को अंजाम दिया था।
वैज्ञानिक साक्ष्यों और प्रभावी पैरवी से न्याय
इस मामले को अंजाम तक पहुंचाने में उत्तर प्रदेश पुलिस की वैज्ञानिक जांच प्रणाली की अहम भूमिका रही:
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सटीक जांच: तत्कालीन जांच अधिकारी (विवेचक) उपनिरीक्षक श्री ब्रह्मदत्त पाण्डेय ने आधुनिक और वैज्ञानिक पद्धतियों का उपयोग करते हुए पुख्ता सबूत जुटाए और कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की।
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त्वरित पैरवी: पुलिस महानिदेशक (DGP) के दिशा-निर्देशों पर बाराबंकी के पुलिस अधीक्षक (SP) दिनेश कुमार सिंह के नेतृत्व में इस केस को 'महिला संबंधी/जघन्य सनसनीखेज अपराध' की श्रेणी में रखा गया था। मॉनिटरिंग सेल और सरकारी वकील की प्रभावी पैरवी के कारण गवाहों और सबूतों को समय पर पेश किया जा सका।
क्या है ऑपरेशन कनविक्शन?
उत्तर प्रदेश सरकार और पुलिस प्रशासन द्वारा चलाया जा रहा यह एक विशेष अभियान है। इसका मुख्य उद्देश्य महिलाओं व बच्चों के विरुद्ध होने वाले जघन्य अपराधों, गोकशी, धर्म परिवर्तन और माफिया राज जैसे मामलों में अपराधियों को वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर कम से कम समय में कड़ी से कड़ी सजा दिलाना है।
