Barabanki News: किसान संगठन की आड़ में काला कारोबार? बाराबंकी के 'जोहान फूड फ्रोजन' के लाइसेंस, GST और बैंक खातों की संयुक्त जांच की मांग, मचा हड़कंप

Barabanki News: Illicit business under the guise of a farmers' organization? Demand for a joint probe into the license, GST records, and bank accounts of Barabanki's 'Johan Food Frozen' sparks a stir.
 
Barabanki News: किसान संगठन की आड़ में काला कारोबार? बाराबंकी के 'जोहान फूड फ्रोजन' के लाइसेंस, GST और बैंक खातों की संयुक्त जांच की मांग, मचा हड़कंप

उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जनपद में पशु एवं मीट कारोबार से जुड़ी कथित गंभीर अनियमितताओं और एक बड़े नेटवर्क को लेकर प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया है। सामाजिक कार्यकर्ता उषा द्विवेदी द्वारा जिलाधिकारी (डीएम) बाराबंकी को सौंपे गए एक विस्तृत और दस्तावेजी शिकायती पत्र के बाद यह पूरा मामला सामने आया है।

शिकायत में "जोहान फूड फ्रोजन" नामक फर्म की व्यावसायिक गतिविधियों, खाद्य सुरक्षा मानकों के कथित उल्लंघन, लाइसेंस की वैधानिकता, टैक्स चोरी और संदिग्ध बैंक लेन-देन की उच्चस्तरीय जांच कराने की पुरजोर मांग की गई है। इस विवाद के तार कथित तौर पर किसान संगठन की आड़ से जुड़े होने के कारण मामला और अधिक संवेदनशील हो गया है।

उषा द्विवेदी की शिकायत से हड़कंप: FSSAI, GST और बैंक खातों की स्क्रूटनी की मांग

सामाजिक कार्यकर्ता उषा द्विवेदी ने प्रशासन को सौंपे गए अपने प्रार्थना पत्र में "जोहान फूड फ्रोजन" फर्म के कामकाज के तरीकों पर कई तीखे और गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने पारदर्शी जांच सुनिश्चित करने के लिए 24 नवंबर 2025 से लेकर मई 2026 तक की समयावधि के निम्नलिखित दस्तावेजों को खंगालने का अनुरोध किया है:

  • वित्तीय एवं टैक्स रिकॉर्ड: फर्म के नाम जारी हुए सभी बिल, कमर्शियल इनवॉइस, ई-वे बिल, स्टॉक रजिस्टर और माल एवं सेवा कर (GST) रिटर्न के रिकॉर्ड की गहन विधिक जांच।

  • बैंक खातों की जांच: संबंधित फर्म और उसके संचालकों के बैंक खातों से हुए भारी-भरकम और संदिग्ध वित्तीय लेन-देन की सक्षम केंद्रीय या प्रांतीय वित्तीय एजेंसियों से स्क्रूटनी।

  • लाइसेंस की वैधता: भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) द्वारा जारी लाइसेंस की शर्तों, मांस के भंडारण (Storage), खरीद-बिक्री और उसके अंतर-राज्यीय या स्थानीय परिवहन (Transportation) से जुड़ी गतिविधियों की कानूनी वैधानिकता।

उषा द्विवेदी ने मामले की गंभीरता को देखते हुए खाद्य सुरक्षा विभाग, जीएसटी विभाग, पशुपालन विभाग, स्थानीय नागरिक प्रशासन और पुलिस विभाग की एक 'संयुक्त जांच टीम' (Joint Investigation Team) गठित कर पूरे नेक्सस का पर्दाफाश करने की अपील की है। इसके समर्थन में उन्होंने कुछ महत्वपूर्ण साक्ष्य और बिलों की प्रतियां भी जिला प्रशासन को मुहैया कराई हैं।

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किसान संगठन की आड़ में अवैध गतिविधियों पर फूटा गुस्सा

इस पूरे घटनाक्रम पर अपनी तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए नरेंद्र द्विवेदी ने कहा कि देश और प्रदेश के वास्तविक किसान संगठन दशकों से किसानों के कल्याण, कृषि सुधार और जनहित के मुद्दों को लोकतांत्रिक तरीके से मजबूती से उठाते रहे हैं।

उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा:यदि कोई व्यक्ति, व्यापारी या विशिष्ट समूह पवित्र किसान संगठनों का चोला ओढ़कर या उनकी आड़ लेकर नियमों और कानूनों के विपरीत अवैध गतिविधियों (जैसे कथित बीफ नेटवर्क या अवैध मीट व्यापार) में संलिप्त है, तो ऐसे तत्वों की तुरंत पहचान होनी चाहिए। उनके खिलाफ कठोरतम दंडात्मक कार्रवाई की जानी चाहिए ताकि देश के अन्नदाताओं और वास्तविक किसान संगठनों की साफ-सुथरी छवि धूमिल न हो।"

पुलिस और प्रशासनिक साठगांठ की भी हो निष्पक्ष जांच

नरेंद्र द्विवेदी ने तंत्र के भीतर मौजूद कथित 'काली भेड़ों' पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी सामान्यतः पूरी निष्ठा एवं ईमानदारी के साथ अपने राजकीय दायित्वों का निर्वहन करते हैं। लेकिन, यदि इस कथित अवैध नेटवर्क के संचालन में जांच के दौरान किसी भी स्तर के अधिकारी या पुलिसकर्मी की भूमिका, ढिलाई या साठगांठ सामने आती है, तो बिना किसी पक्षपात के उसके खिलाफ भी सख्त विधिक व विभागीय कार्रवाई होनी चाहिए, क्योंकि ऐसे भ्रष्ट तत्व पूरे सरकारी तंत्र की साख और विश्वसनीयता को बट्टा लगाते हैं।

जांच के बाद ही साफ होगी वास्तविक स्थिति

जनस्वास्थ्य (Public Health), खाद्य सुरक्षा मानकों की अनदेखी और बड़े पैमाने पर राजस्व (Tax) हितों से जुड़े इस हाई-प्रोफाइल मामले के सामने आने के बाद अब जनपदवासियों की निगाहें जिला प्रशासन और संबंधित विभागों की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।

नोट: वर्तमान में यह पूरा मामला शिकायत और जांच की मांग के प्रारंभिक स्तर पर है। आरोपी फर्म "जोहान फूड फ्रोजन" या इस विवाद से जुड़े अन्य पक्षों की ओर से इन आरोपों पर अभी तक कोई आधिकारिक बयान या स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है। प्रशासन द्वारा गठित होने वाली संभावित संयुक्त जांच टीम की रिपोर्ट के बाद ही इस कथित नेटवर्क की वास्तविक स्थिति और सत्यता पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।

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