बाराबंकी में महाघोटाला: 21 हजार वर्गफीट जमीन पर बेच डाले 32 हजार वर्गफीट के प्लॉट भाकियू भानु ने खोला मोर्चा, गैंगस्टर और कुर्की की मांग
जादुई जमीन का खेल: जितनी जमीन, उससे दोगुने की कर दी रजिस्ट्री!
सौंपे गए ज्ञापन में 'R. SONS INFRALAND DEVELOPERS PRIVATE LIMITED' के प्रबंध निदेशक (MD) आशीष कुमार श्रीवास्तव, उनके परिजनों और करीबियों पर एक संगठित भूमाफिया सिंडिकेट चलाने का सीधा आरोप लगाया गया है।
इस महाघोटाले की सबसे हैरान करने वाली कहानी नवाबगंज तहसील के ग्राम हड़ौड़ी (खसरा संख्या 421) से सामने आई है:
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वास्तविक जमीन: यहाँ कंपनी के पास कुल 0.187 हेक्टेयर यानी लगभग 21,000 वर्गफीट भूमि ही उपलब्ध थी।
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बिक्री योग्य जमीन: विकास कार्यों, सड़क और नाली के लिए जमीन छोड़ने के बाद नियमानुसार केवल 15,000 वर्गफीट भूमि ही बेची जा सकती थी।
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फर्जीवाड़ा: आरोप है कि कंपनी ने इस गणित को धता बताते हुए अलग-अलग खरीदारों के पक्ष में 32,000 वर्गफीट से भी अधिक भूमि की रजिस्ट्रियां कर डालीं। यानी जो जमीन अस्तित्व में ही नहीं थी, उसे भी कागजों पर बेचकर करोड़ों रुपये डकार लिए गए।
बाउंड्रीवाल टूटने पर खुला 2017 से चला आ रहा राज
ज्ञापन के मुताबिक, साल 2017 में इस विवादित भूमि पर बकायदा बाउंड्रीवाल का निर्माण कराया गया था और कई लोगों को 5000-5000 वर्गफीट के प्लॉट की रजिस्ट्रियां की गई थीं। लेकिन 13 अप्रैल 2025 को कुछ अराजक तत्वों द्वारा इस बाउंड्रीवाल को तोड़कर अवैध कब्जे का प्रयास किया गया। इस घटना के बाद जब पीड़ितों ने भूमि अभिलेखों और रजिस्ट्री के सरकारी दस्तावेजों की गहराई से जांच की, तब जाकर इस बड़े आर्थिक अपराध और सुनियोजित धोखाधड़ी का भंडाफोड़ हुआ।
निबंधन विभाग (रजिस्ट्री दफ्तर) की भूमिका पर उठे गंभीर सवाल
भारतीय किसान यूनियन भानु ने इस पूरे खेल में उपनिबंधक कार्यालय (Sub-Registrar Office) और संबंधित विभागों के अफसरों की भूमिका पर भी तीखे सवाल खड़े किए हैं। आशु चौधरी का आरोप है कि सरकारी रिकॉर्ड सामने होने के बावजूद, मौके पर वास्तविक भूमि का भौतिक सत्यापन किए बिना धड़ाधड़ रजिस्ट्रियां कैसे कर दी गईं? यह सीधे तौर पर विभागीय मिलीभगत, भ्रष्टाचार और बड़े गठजोड़ की ओर इशारा करता है।
इन नए क्षेत्रों में भी पैर पसार रहा है गिरोह; आंदोलन की चेतावनी
भविष्य का खतरा: भाकियू (भानु) ने प्रशासन को आगाह किया है कि यह भूमाफिया गिरोह अब बाराबंकी के शुक्लई, सुल्तानपुर और पल्हरी क्षेत्रों में भी तेजी से सक्रिय हो रहा है। इन इलाकों में बिना नक्शा पास कराए कृषि भूमि पर अवैध प्लॉटिंग की जा रही है और लुभावने वादे कर लोगों से निवेश कराया जा रहा है। संगठन ने इन सभी प्रोजेक्ट्स की तत्काल जांच की मांग की है।
राष्ट्रीय महासचिव आशु चौधरी ने साफ लफ्जों में कहा है कि पूरे मामले की जांच आर्थिक अपराध शाखा (EOW) या एसआईटी (SIT) से कराई जाए। यदि पीड़ित नागरिकों को जल्द न्याय नहीं मिला और उनकी मेहनत की कमाई के भूखंड उन्हें वापस नहीं दिलाए गए, तो संगठन कंपनी के दफ्तर से लेकर कलेक्ट्रेट तक एक बड़ा उग्र आंदोलन शुरू करेगा।
