इम्प्लांटोलॉजी के नए युग की शुरुआत, लखनऊ में IFAD की तीसरी राष्ट्रीय कार्यशाला संपन्न
आधुनिक तकनीकों से आसान होंगे जटिल इम्प्लांट
कार्यशाला के मुख्य वक्ता देश के प्रसिद्ध दंत विशेषज्ञ डॉ. कर्नल सत्यम सिंह रहे। उन्होंने आधुनिक दंत चिकित्सा में हो रहे बदलावों और नई तकनीकों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि जबड़े की हड्डी कमजोर होने अथवा मसूड़ों के क्षतिग्रस्त होने जैसी जटिल परिस्थितियों में बोन एवं टिश्यू ग्राफ्टिंग तकनीकें डेंटल इम्प्लांट की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने में मदद करती हैं।
डॉ. सत्यम सिंह ने प्रतिभागी चिकित्सकों को इन उन्नत प्रक्रियाओं की बारीकियों से अवगत कराया तथा हैंड्स-ऑन ट्रेनिंग के माध्यम से तकनीकों के व्यावहारिक उपयोग का प्रशिक्षण दिया।
विशेषज्ञों ने साझा किया अनुभव
कार्यक्रम का प्रभावी संचालन डॉ. अंकिता तिवारी ने किया। कार्यशाला के आयोजन और संचालन में IFAD की मुख्य आयोजन समिति की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
आयोजन समिति में अध्यक्ष डॉ. सुमित तिवारी, सचिव डॉ. शुभम तिवारी, साइंटिफिक चेयरमैन डॉ. जसप्रीत सिंह खुराना, लैब कोऑर्डिनेटर डॉ. अमित तिवारी, उपाध्यक्ष डॉ. अंशू सिंह, संयुक्त सचिव डॉ. आशीष यादव, जनसंपर्क प्रमुख डॉ. शीराज़ आज़मी तथा कोषाध्यक्ष डॉ. शानू यादव शामिल रहे।
इसके अलावा वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. देवेश मिश्रा, डॉ. सोनिया शर्मा और डॉ. महिमा जैन समेत संस्था के अन्य पदाधिकारियों ने कार्यशाला के सफल आयोजन में महत्वपूर्ण सहयोग दिया।
हर दो-तीन महीने में होंगी एडवांस्ड कार्यशालाएं
आयोजन समिति के अनुसार IFAD की ओर से नियमित अंतराल पर ऐसी राष्ट्रीय कार्यशालाओं का आयोजन किया जा रहा है। प्रत्येक दो से तीन महीने में आयोजित होने वाले इन कार्यक्रमों का उद्देश्य लखनऊ और उत्तर प्रदेश के दंत चिकित्सकों को वैश्विक स्तर पर विकसित हो रही आधुनिक तकनीकों एवं उपचार पद्धतियों से परिचित कराना है।
संस्था का लक्ष्य दंत चिकित्सकों के कौशल को लगातार उन्नत करना और मरीजों को आधुनिक एवं बेहतर दंत चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में योगदान देना है।
दिसंबर में होगी चौथी राष्ट्रीय कार्यशाला
IFAD की ओर से इसी श्रृंखला में चौथी राष्ट्रीय कार्यशाला दिसंबर 2026 में आयोजित की जाएगी। यह कार्यशाला विशेष रूप से प्रोस्थोडोंटिक्स (Prosthodontics) विषय पर केंद्रित होगी।
