बेंगलुरु: गायत्री चेतना केंद्र में गायत्री जयंती और गंगा दशहरा महापर्व की धूम, यज्ञ के साथ संपन्न हुए सामूहिक संस्कार

Bengaluru: Gayatri Jayanti and the grand festival of Ganga Dussehra celebrated with great enthusiasm at Gayatri Chetana Kendra; collective rituals concluded with a Yajna.
 
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बेंगलुरु। आईटी सिटी बेंगलुरु के 'गायत्री चेतना केंद्र' में रविवार को गायत्री जयंती और गंगा दशहरा का महापर्व बेहद श्रद्धा, उल्लास और वैदिक परंपराओं के साथ मनाया गया। इस पावन अवसर पर जहां एक ओर देव-संस्कृति के प्रति भक्तों की गहरी आस्था देखने को मिली, वहीं दूसरी ओर समाज को वैचारिक और आध्यात्मिक रूप से समृद्ध करने का संकल्प भी लिया गया।

महायज्ञ और सामूहिक संस्कारों का आयोजन

इस उत्सव के दौरान केंद्र में विशेष गायत्री यज्ञ का आयोजन किया गया। वैदिक और लौकिक मंत्रोच्चार के बीच समाज के कल्याण और पर्यावरण की शुद्धि के लिए आहुतियां दी गईं। इस मांगलिक अवसर पर सनातन परंपरा के अंतर्गत विभिन्न महत्वपूर्ण संस्कार पूरी विधि-विधान से संपन्न कराए गए, जिनमें मुख्य रूप से शामिल रहे:

  • नामकरण, पुंसवन एवं अन्नप्राशन संस्कार (शिशुओं के लिए)

  • विद्यारंभ, मुंडन एवं यज्ञोपवीत संस्कार (बालकों के बौद्धिक व नैतिक विकास के लिए)

  • जन्मदिन एवं विवाह दिवस संस्कार (वैदिक पद्धति से वर्षगांठ का उत्सव)

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संस्कार केवल कर्मकांड नहीं, बल्कि व्यक्तित्व निर्माण का विज्ञान: अश्विनी कटरे

महापर्व के मुख्य सत्र को संबोधित करते हुए अश्विनी कटरे ने भारतीय संस्कारों के वैज्ञानिक और आध्यात्मिक दृष्टिकोण पर एक प्रेरक व्याख्यान दिया।भारतीय संस्कृति में बताए गए संस्कार केवल धार्मिक अनुष्ठान मात्र नहीं हैं, बल्कि यह मानव के समग्र व्यक्तित्व निर्माण की एक बेहद वैज्ञानिक प्रक्रिया हैं। आज के आधुनिक युग में युवाओं को विज्ञान और अध्यात्म के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना होगा। उन्हें अपनी गौरवशाली संस्कृति और जीवन-मूल्यों के प्रति जागरूक रहकर अपनी दिनचर्या को अनुशासित बनाना चाहिए।

उन्होंने इस तिथि का ऐतिहासिक महत्व समझाते हुए कहा कि ज्येष्ठ शुक्ल दशमी का यह दिन दोहरा महत्व रखता है। इसी दिन पतित पावनी मां गंगा का धरा पर अवतरण हुआ था और इसी दिन ज्ञान की देवी मां गायत्री का प्राकट्य भी हुआ था। इसके साथ ही, यह वही पावन अवसर है जब युगऋषि परम पूज्य पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य माता गायत्री की साधना में पूरी तरह एकाकार हुए थे। इसलिए यह पर्व गुरुदेव के प्रति कृतज्ञता और सच्ची श्रद्धांजलि अर्पित करने का संकल्प दिवस है।

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महिला मंडल की टोली ने संभाली कमान

इस पूरे भव्य आयोजन की सबसे खास बात यह रही कि यज्ञ और सभी संस्कारों का सफल संचालन महिला मंडल की टोली द्वारा पूरी निष्ठा और वैदिक शुद्धता के साथ किया गया। कार्यक्रम में बेंगलुरु के कोने-कोने से आए श्रद्धालुओं ने बड़ी संख्या में भाग लिया, जिससे पूरा परिसर आध्यात्मिक ऊर्जा और भक्तिमय लहरों से सराबोर नजर आया।

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