गोवर्धन पूजा और छप्पन भोग से भक्तिमय हुआ भागवत कथा महोत्सव

पंचम दिवस भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का भावपूर्ण वर्णन, माखन चोरी और गोचारण लीला सुनकर भावविभोर हुए श्रद्धालु

 
गोवर्धन पूजा और छप्पन भोग से भक्तिमय हुआ भागवत कथा महोत्सव

लखनऊ। सीतापुर रोड स्थित प्रियदर्शिनी कॉलोनी के भागवत पार्क प्रांगण में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा महोत्सव के पंचम दिवस बुधवार को श्री गोवर्धन पूजा एवं छप्पन भोग का भव्य आयोजन किया गया। कथा व्यास आचार्य श्री संतोष भाई जी महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण की दिव्य बाल लीलाओं का भावपूर्ण वर्णन कर श्रद्धालुओं को भक्ति, प्रेम, सेवा और समर्पण का संदेश दिया।

कथा के दौरान आचार्य श्री संतोष भाई जी ने भगवान श्रीकृष्ण के नामकरण संस्कार का प्रसंग सुनाते हुए बताया कि भगवान के प्राकट्य के बाद गोकुल में आनंद और उत्साह का वातावरण छा गया था। नंद बाबा और माता यशोदा के आंगन में बाल गोपाल की किलकारियां गूंजने लगी थीं। महर्षि गर्गाचार्य ने भगवान का नामकरण संस्कार संपन्न कराया। यह प्रसंग भगवान के दिव्य स्वरूप और उनकी अद्भुत लीलाओं का स्मरण कराता है।

माखन चोरी लीला का वर्णन करते हुए आचार्य जी ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाएं केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि भक्त और भगवान के बीच प्रेमपूर्ण संबंध का प्रतीक हैं। बाल गोपाल अपनी चंचलता से गोपियों के घरों में माखन चुराते थे। गोपियां माता यशोदा से उनकी शिकायत करतीं, लेकिन कान्हा की भोली मुस्कान और मनमोहक अदाओं के सामने सभी अपना क्रोध भूल जाती थीं।

उन्होंने कहा कि भगवान माखन के नहीं, बल्कि भक्तों के निर्मल हृदय में बसे प्रेम के चोर हैं। जिस प्रकार माखन दूध का सार होता है, उसी प्रकार भगवान भक्त के हृदय में बसे प्रेम और श्रद्धा को स्वीकार करते हैं। माखन चोरी लीला हमें सिखाती है कि प्रभु की कृपा पाने के लिए निष्कपट प्रेम और समर्पण आवश्यक है।

गोचारण लीला का प्रसंग सुनाते हुए आचार्य जी ने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण अपने सखाओं के साथ गौमाताओं को चराने वन में जाते थे। मित्रों के साथ खेलना, बांसुरी बजाना और गौमाताओं की सेवा करना उनकी बाल लीलाओं का अभिन्न अंग था। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने गोसेवा के माध्यम से संसार को गौमाता के महत्व और सेवा भाव का संदेश दिया।

आचार्य जी ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं में प्रेम, करुणा, मित्रता, सेवा और समर्पण के अनेक संदेश समाहित हैं। भगवान अपने भक्तों के साथ बालक के रूप में इस तरह घुल-मिल जाते हैं कि भक्त उन्हें अपने परिवार का सदस्य मानकर प्रेम करने लगते हैं।

गोवर्धन लीला से मिला प्रकृति और संरक्षण का संदेश

आचार्य श्री संतोष भाई जी महाराज ने श्री गोवर्धन पूजा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि जब इंद्रदेव को अभिमान हो गया और उन्होंने ब्रजवासियों पर मूसलाधार वर्षा की, तब भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी कनिष्ठ अंगुली पर गोवर्धन पर्वत धारण कर समस्त ब्रजवासियों को इंद्र के प्रकोप से बचाया।

उन्होंने कहा कि गोवर्धन लीला यह संदेश देती है कि भगवान अपने भक्तों के कष्ट दूर करने के लिए सदैव तत्पर रहते हैं। पूर्ण श्रद्धा और विश्वास के साथ प्रभु की शरण में जाने वाले भक्त की रक्षा का दायित्व भगवान स्वयं संभालते हैं। गोवर्धन पूजा प्रकृति, गौमाता और भगवान श्रीकृष्ण के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का पावन अवसर है।

कथा के दौरान गोवर्धन लीला का भावपूर्ण चित्रण किया गया और भगवान श्रीकृष्ण की आकर्षक झांकी सजाई गई। श्रद्धालुओं ने भगवान को 56 प्रकार के व्यंजनों का भोग अर्पित किया। भजन-कीर्तन, भक्ति संगीत और जयकारों से पूरा कथा परिसर भक्तिमय हो उठा। श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीकृष्ण की आराधना कर परिवार और समाज की सुख-समृद्धि की कामना की।

इस अवसर पर आर. के. सिंह, सिंह वीर सिंह, जितेंद्र सिंह, नंदलाल जी, निर्देश दीक्षित, अजीत सोनी, शेखर सिंह, कैलाश चतुर्वेदी, श्रीकांत मिश्रा, दुर्गेश गुप्ता, अनुज सिंह, आलोक गुप्ता, डॉ. आर. एन. सिंह, दिनेश पाठक, सुदर्शन पाल, धर्मदेव जी, घनश्याम जी, राकेश रावत, उमा प्रसाद पांडेय, हरिनाम और रेखा श्रीवास्तव सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

आयोजक: कर्मयोग जन कल्याण समिति एवं समस्त क्षेत्रवासी भक्तजन।

कथा स्थल: भागवत पार्क प्रांगण, प्रियदर्शिनी कॉलोनी, सेक्टर-बी, सीतापुर रोड, लखनऊ।

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