जाति आधारित आरक्षण की समीक्षा और आर्थिक आधार पर सहायता की मांग, भारतीय जन मोर्चा पार्टी ने राष्ट्रपति को भेजा ज्ञापन
लखनऊ। भारतीय जन मोर्चा पार्टी ने देश में लागू जाति आधारित आरक्षण व्यवस्था की व्यापक एवं निष्पक्ष समीक्षा कराने तथा आर्थिक रूप से कमजोर और वास्तविक जरूरतमंद नागरिकों के लिए पारदर्शी सहायता व्यवस्था लागू करने की मांग उठाई है। इस संबंध में पार्टी के उत्तर प्रदेश प्रदेश अध्यक्ष इंजीनियर रमाकांत पाण्डेय (आर.के. पाण्डेय) के नेतृत्व में जिला कलेक्टर, लखनऊ के माध्यम से राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा गया।
ज्ञापन में कहा गया है कि स्वतंत्रता के 75 वर्ष से अधिक समय बीतने के बाद वर्तमान सामाजिक और आर्थिक परिस्थितियों को देखते हुए आरक्षण व्यवस्था के प्रभाव, आवश्यकता और परिणामों का पुनर्मूल्यांकन किया जाना आवश्यक है। पार्टी का कहना है कि इससे संविधान में निहित समानता, सामाजिक न्याय और समान अवसर के सिद्धांतों को अधिक प्रभावी ढंग से लागू किया जा सकेगा।
ज्ञापन में उठाई गई प्रमुख मांगें
- उच्चस्तरीय समीक्षा आयोग: जाति आधारित आरक्षण व्यवस्था की व्यापक समीक्षा के लिए एक स्वतंत्र और उच्चस्तरीय आयोग का गठन किया जाए।
- चरणबद्ध नीति परिवर्तन: समीक्षा के निष्कर्षों के आधार पर जाति आधारित आरक्षण व्यवस्था में चरणबद्ध बदलाव पर विचार करते हुए आर्थिक रूप से कमजोर और वास्तविक जरूरतमंद नागरिकों के लिए पारदर्शी सहायता प्रणाली विकसित की जाए।
- मेरिट आधारित चयन: शिक्षा, सरकारी नौकरियों और अन्य सार्वजनिक अवसरों पर चयन प्रक्रिया में योग्यता, मेरिट और समान अवसर के सिद्धांतों को प्राथमिकता दी जाए।
- नियमित समीक्षा: आरक्षण व्यवस्था तथा उसके सामाजिक, आर्थिक और प्रशासनिक प्रभावों की प्रत्येक दस वर्ष में स्वतंत्र आयोग द्वारा अनिवार्य समीक्षा कराई जाए।
भारतीय जन मोर्चा पार्टी ने अपने ज्ञापन में राष्ट्रपति से आग्रह किया है कि संविधान की मूल भावना और राष्ट्रहित को ध्यान में रखते हुए इस विषय पर आवश्यक और उचित कार्रवाई की जाए।
यह भारतीय जन मोर्चा पार्टी द्वारा ज्ञापन के माध्यम से रखी गई मांग है। इसमें व्यक्त विचार और सुझाव संबंधित संगठन के हैं। आरक्षण व्यवस्था में किसी भी प्रकार का परिवर्तन संवैधानिक एवं विधायी प्रक्रिया के माध्यम से ही संभव है।
