गोंडा के वरिष्ठ साहित्यकार श्री शिवाकांत मिश्र 'विद्रोही' को बड़ी उपलब्धि: सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की पत्रिका 'आजकल' में प्रकाशित हुए 7 नवगीत

Major achievement for senior litterateur Shri Shivakant Mishra 'Vidrohi' from Gonda: Seven *Navgeets* published in the Ministry of Information and Broadcasting's magazine 'Aajkal'.
 
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गोंडा: गोंडा के साहित्यिक जगत और सभी कलमकारों के लिए यह अत्यंत गर्व और हर्ष का विषय है कि 'साहित्य-भूषण' से सम्मानित वरिष्ठ साहित्यकार आदरणीय श्री शिवाकांत मिश्र 'विद्रोही' दादा के सात नवगीत भारत सरकार के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा प्रकाशित प्रतिष्ठित साहित्यिक पत्रिका 'आजकल' में स्थान पाने में सफल रहे हैं। यह उपलब्धि इसलिए भी ऐतिहासिक और खास है क्योंकि 'आजकल' जैसी देश की शीर्षस्थ साहित्यिक पत्रिका में महज एक वर्ष के भीतर आपकी रचनाओं को तीन बार प्रकाशित किया गया है।

संवेदनाओं और स्वाभिमान का अद्भुत संगम

विद्रोही दादा की लेखनी में शब्दों का ऐसा जादू है जो पाठकों को बरबस ही अपनी ओर आकर्षित कर लेता है। उनकी कविताओं में जहाँ एक ओर गहरी मानवीय संवेदनाएं झलकती हैं, वहीं दूसरी ओर स्वाभिमान और जुझारूपन का प्रखर तेवर भी दिखाई देता है।

पत्रिका में प्रकाशित उनकी ये पंक्तियां उनके विराट व्यक्तित्व और निडर स्वभाव को बखूबी दर्शाती हैं:

"दीप हूं मैं, दुश्मनी मेरी

अंधेरों से सदा ही,

व्यर्थ ही यह हवा मेरे

बाहुबल को आजमाती।"

साहित्यकारों ने दी बधाई

विद्रोही दादा की इस उल्लेखनीय सफलता पर गोंडा के समस्त साहित्यकारों और प्रबुद्ध वर्ग ने उन्हें हार्दिक बधाई व शुभकामनाएं प्रेषित की हैं। भगवान शिव (महादेव) से यही प्रार्थना है कि आदरणीय दादा को दीर्घायु एवं उत्तम स्वास्थ्य प्रदान करें, ताकि उनका मार्गदर्शक नेतृत्व और ओजस्वी साहित्य सृजन हम सभी को निरंतर प्रेरित करता रहे।

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