माय भारत की बड़ी उपलब्धि: बागपत के ग्रामीण युवा अमन अब 'इंडिया एआई इंपैक्ट समिट' में करेंगे देश का प्रतिनिधित्व
संघर्ष से सफलता तक: अखबार बेचने से लेकर एआई समिट तक का सफर
अमन कुमार की यह यात्रा आसान नहीं थी। बागपत के एक साधारण गाँव में जन्मे अमन का बचपन आर्थिक तंगी में बीता। पढ़ाई का खर्च उठाने के लिए उन्होंने गाँव-गाँव साइकिल से अखबार बांटे और फैक्ट्री में मजदूरी तक की। लेकिन इन कठिन परिस्थितियों ने उनके इरादों को और मजबूत किया। उन्होंने संकल्प लिया कि जो अवसर उन्हें कठिनाई से मिले, वे अन्य युवाओं को आसानी से उपलब्ध कराएंगे।

'माय भारत' ने बदला जीवन का नजरिया
अमन बताते हैं कि केंद्रीय मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया के नेतृत्व में 'माय भारत' पहल ने उन्हें केवल एक लाभार्थी के बजाय एक 'नेतृत्वकर्ता' के रूप में पहचान दी।
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प्रोजेक्ट कॉन्टेस्ट 360: अमन ने इसकी स्थापना की, जिसके जरिए आज 84 लाख से अधिक युवाओं को छात्रवृत्ति, इंटर्नशिप और सरकारी योजनाओं की जानकारी मिल रही है।
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डिजिटल नवाचार: बागपत प्रशासन के सहयोग से उन्होंने कांवड़ यात्रा एप, स्वीप बागपत एप और सूचना सेतु एप विकसित किए, जो डिजिटल इंडिया के विजन को जमीनी स्तर पर उतार रहे हैं।
राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान
अमन कुमार की उपलब्धियों की सूची काफी लंबी है:
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स्वामी विवेकानंद राज्य युवा पुरस्कार: उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा सम्मानित।
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विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग: प्रधानमंत्री के समक्ष यूपी का प्रतिनिधित्व किया।
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वैश्विक भूमिका: यूनेस्को की ग्लोबल यूथ कम्युनिटी के सदस्य और यूनिसेफ इंडिया के नेशनल यूथ एंबेसडर।
विकसित भारत 2047 के सारथी
इंडिया एआई इंपैक्ट समिट में शामिल होकर अमन यह साबित करेंगे कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और डिजिटल तकनीक केवल शहरों तक सीमित नहीं है। वे ग्रामीण युवाओं के अनुभवों को राष्ट्रीय नीति मंच तक पहुँचाएंगे। अमन का मानना है कि 'माय भारत' जैसे प्लेटफॉर्म युवाओं को सही दिशा प्रदान कर रहे हैं ताकि वे विकसित भारत 2047 के विजन में सक्रिय भागीदार बन सकें। अमन कुमार की यह कहानी नए भारत की उस बदलती तस्वीर को दर्शाती है, जहाँ गाँव का युवा अब न केवल सपने देख रहा है, बल्कि उन्हें हकीकत में बदलकर राष्ट्र निर्माण में अग्रणी भूमिका निभा रहा है।

