उत्तर प्रदेश के 3 जिलों में 'एनीमिया और प्रोटीन कुपोषण' के खिलाफ बड़ी मुहिम: डैनोन इंडिया और सरकार के साझा प्रयास से 1 लाख बच्चों की होगी जांच
तीन जिलों से हुई परियोजना की शुरुआत
यह परियोजना शुरुआती चरण में उत्तर प्रदेश के तीन प्रमुख जिलों में लागू की गई है:
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लखनऊ
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सिद्धार्थनगर
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श्रावस्ती
ग्रो वेल फाउंडेशन के सहयोग से संचालित इस परियोजना का लक्ष्य सामुदायिक स्तर पर शुरुआती जांच और जागरूकता के जरिए बच्चों के स्वास्थ्य में सुधार लाना है।
तकनीक का कमाल: बिना सुई चुभाए होगी एनीमिया की जांच
इस कार्यक्रम की सबसे बड़ी विशेषता इसकी जांच पद्धति है।
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नॉन-इनवेसिव जांच: एक लाख से अधिक बच्चों की नॉन-इनवेसिव (बिना सुई चुभाए) तकनीक से एनीमिया जांच की जाएगी।
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प्रशिक्षण: 2,000 से अधिक स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को इस आधुनिक डिवाइस को चलाने और स्वस्थ खान-पान के प्रति लोगों को जागरूक करने का प्रशिक्षण दिया जाएगा।
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पहुँच: स्कूलों में चलने वाले विशेष कार्यक्रमों के माध्यम से लगभग 2,50,000 छात्रों तक पहुँचने का लक्ष्य रखा गया है।
"इंडिया का आयरन अप करेंगे" एन्थम का विमोचन
परियोजना के तहत जन-जागरूकता को बढ़ावा देने के लिए एक विशेष अभियान एन्थम “इंडिया का आयरन अप करेंगे” भी जारी किया जाएगा। यह अभियान लोगों को पोषण के प्रति सजग बनाने और समय पर जांच के महत्व को रेखांकित करेगा।
प्रशासनिक और कॉर्पोरेट जगत का साझा संकल्प
परियोजना की घोषणा के दौरान महानिदेशक (परिवार कल्याण) डॉ. एच.डी. अग्रवाल और डैनोन इंडिया के प्रबंध निदेशक शशि रंजन उपस्थित रहे।
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डॉ. एच.डी. अग्रवाल ने कहा, "एनीमिया और प्रोटीन कुपोषण का समाधान हमारी प्राथमिकता है, क्योंकि इसका बच्चों के विकास पर दीर्घकालिक असर पड़ता है। सरकार के प्रयासों में डैनोन इंडिया जैसी संस्थाओं की वैज्ञानिक विशेषज्ञता एक स्वस्थ उत्तर प्रदेश की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी।"
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शशि रंजन (MD, डैनोन इंडिया) ने कहा, "हमें भारत सरकार के ‘एनीमिया मुक्त भारत’ मिशन का हिस्सा बनने पर गर्व है। बच्चों का बेहतर पोषण ही देश के स्वस्थ भविष्य की बुनियादी जरूरत है। हम केंद्र और राज्य सरकारों के साथ ऐसी दीर्घकालिक साझेदारियों के लिए प्रतिबद्ध हैं।"

