लखनऊ में कृषि नीति पर बड़ा फोकस: क्षेत्रीय जरूरतों के अनुसार बनेगा विकास रोडमैप

Major Focus on Agricultural Policy in Lucknow: Development Roadmap to be Formulated Based on Regional Needs
 
लखनऊ में कृषि नीति पर बड़ा फोकस: क्षेत्रीय जरूरतों के अनुसार बनेगा विकास रोडमैप
लखनऊ में आयोजित उत्तर क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन के दौरान केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने स्पष्ट किया कि अब देश में कृषि विकास “एक जैसी नीति” से नहीं, बल्कि क्षेत्रीय परिस्थितियों के अनुसार आगे बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि जलवायु, जल उपलब्धता, मिट्टी और फसलों की विविधता को ध्यान में रखते हुए ही भविष्य की रणनीति तय की जाएगी।

क्षेत्रीय सम्मेलन से बनेगा ठोस रोडमैप

केंद्र सरकार ने कृषि क्षेत्र में बेहतर समन्वय के लिए देश को पांच हिस्सों में बांटकर क्षेत्रीय कृषि सम्मेलनों की श्रृंखला शुरू की है। लखनऊ में आयोजित यह सम्मेलन उसी क्रम का अहम हिस्सा है। यहां केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर खरीफ और रबी सीजन की रणनीति के साथ-साथ किसानों की आय, उत्पादन और बाजार से जुड़े मुद्दों पर चर्चा कर रही हैं।

कृषि विविधीकरण और आत्मनिर्भरता पर जोर

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि अब केवल गेहूं और धान पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है। दलहन और तिलहन में आत्मनिर्भरता, बागवानी, फल-सब्जी उत्पादन, प्रोसेसिंग और वैल्यू एडिशन को बढ़ावा देना जरूरी है। उन्होंने बताया कि सरकार का लक्ष्य तीन प्रमुख बिंदुओं पर केंद्रित है—खाद्य सुरक्षा, किसानों की आय में वृद्धि और पोषणयुक्त आहार की उपलब्धता।

छह स्तंभों पर आधारित रणनीति

सरकार कृषि विकास के लिए छह प्रमुख आधारों पर काम कर रही है:

  • उत्पादन में वृद्धि
  • लागत में कमी
  • किसानों को उचित मूल्य
  • नुकसान की भरपाई
  • विविधीकरण को बढ़ावा
  • बाजार से बेहतर जुड़ाव

छोटे किसानों के लिए इंटीग्रेटेड मॉडल

उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में छोटी जोत वाले किसानों को ध्यान में रखते हुए सरकार इंटीग्रेटेड फार्मिंग मॉडल को बढ़ावा दे रही है। इसमें इंटरक्रॉपिंग, पशुपालन, मत्स्य पालन, मधुमक्खी पालन और वृक्ष आधारित खेती शामिल हैं, जिससे कम जमीन में अधिक आय संभव हो सके।

किसान क्रेडिट कार्ड और फार्मर आईडी पर जोर

केंद्रीय मंत्री ने बताया कि अभी भी कई किसानों तक सस्ते ऋण की पहुंच नहीं है। इसलिए हर पात्र किसान तक किसान क्रेडिट कार्ड पहुंचाने का अभियान चलाया जाएगा।
फार्मर आईडी को उन्होंने बड़ा बदलाव बताते हुए कहा कि इससे किसानों की जमीन, पशुधन और अन्य जानकारी एक प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध होगी, जिससे योजनाओं का लाभ तेजी और पारदर्शिता के साथ मिलेगा।

‘लैब टू लैंड’ पहल से तकनीक पहुंचेगी खेत तक

सरकार वैज्ञानिक शोध को सीधे किसानों तक पहुंचाने के लिए अभियान चला रही है। इसके तहत वैज्ञानिक गांव-गांव जाकर किसानों को नई तकनीक, उन्नत बीज और आधुनिक खेती के तरीके बताएंगे।

उर्वरक सब्सिडी और किसानों को राहत

उर्वरकों की बढ़ती कीमतों के बावजूद सरकार किसानों पर बोझ नहीं डालना चाहती। इसके लिए अतिरिक्त बजट स्वीकृत किया गया है ताकि यूरिया और डीएपी सस्ती दरों पर उपलब्ध रहें।

आलू किसानों और बागवानी को बढ़ावा

उत्तर प्रदेश में आलू किसानों को राहत देने के लिए एमआईएस योजना के तहत बड़े पैमाने पर खरीद की अनुमति दी गई है। साथ ही राज्य में एक अंतरराष्ट्रीय प्रोसेसिंग सेंटर स्थापित करने की योजना है।
बागवानी क्षेत्र को मजबूत करने के लिए देशभर में क्लीन प्लांट सेंटर भी स्थापित किए जा रहे हैं।

मिलावट और नकली उत्पादों पर सख्ती

नकली बीज, कीटनाशक और मिलावटी कृषि उत्पादों को लेकर सरकार सख्त रुख अपनाने जा रही है। इसके लिए सीड एक्ट और पेस्टिसाइड एक्ट में कड़े प्रावधान लाने की तैयारी है।

प्राकृतिक खेती को मिलेगा बढ़ावा

सरकार प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित कर रही है ताकि मिट्टी और मानव स्वास्थ्य दोनों सुरक्षित रहें। संक्रमण काल में किसानों को आर्थिक सहायता देने की भी व्यवस्था की गई है।

निर्यात और बाजार पर फोकस

कृषि उत्पादों के निर्यात को बढ़ाने के लिए अलग-अलग राज्यों के अनुसार रणनीति तैयार की जा रही है, जिससे किसानों को बेहतर बाजार और मूल्य मिल सके।

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