बिहार AEDO परीक्षा में बड़ा खेल: ब्लैकलिस्टेड कंपनी 'साईएजुकेयर' को ठेका, मुंगेर में कर्मचारी गिरफ्तार, मालिक की तलाश जारी
विवाद का केंद्र: ब्लैकलिस्टेड कंपनी 'साईएजुकेयर'
परीक्षा में बायोमेट्रिक सत्यापन का ठेका ‘साईएजुकेयर (SaiEducare)’ नामक कंपनी को दिया गया है। इस कंपनी का रिकॉर्ड बेहद दागदार रहा है:
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NTA द्वारा कार्रवाई: राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) इस कंपनी को पहले ही ब्लैकलिस्ट कर चुकी है।
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BPSC का नोटिस: बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) भी पूर्व में इस कंपनी को कारण बताओ नोटिस जारी कर चुका है। आरोप था कि कंपनी ने एक परीक्षा के दौरान लगभग 13,000 अभ्यर्थियों का बायोमेट्रिक सत्यापन ही नहीं किया था।
मुंगेर में पकड़ा गया 'घोटाला': कर्मचारी और अभ्यर्थी गिरफ्तार
मामले ने तब तूल पकड़ा जब मुंगेर के एक परीक्षा केंद्र पर बड़ी गड़बड़ी सामने आई। पुलिस की छापेमारी में चौंकाने वाले तथ्य मिले:
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नियमों का उल्लंघन: साईएजुकेयर के दो बायोमेट्रिक ऑपरेटर मोबाइल फोन के साथ परीक्षा केंद्र के भीतर पाए गए, जबकि केंद्र के अंदर इलेक्ट्रॉनिक्स पूरी तरह प्रतिबंधित हैं।
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गिरफ्तारी: पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए केंद्र प्रभारी, कंपनी के कर्मचारियों और दो संदिग्ध अभ्यर्थियों को गिरफ्तार कर लिया है।
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प्रलोभन का खेल: पूछताछ में खुलासा हुआ है कि गड़बड़ी करने के लिए कर्मचारियों को भारी प्रलोभन (रिश्वत) दिया गया था।
फरार मालिक रमेश शर्मा की तलाश
सूत्रों के अनुसार, इस पूरे सिंडिकेट की जड़ें काफी गहरी हैं। पुलिस अब साईएजुकेयर के मालिक रमेश शर्मा की सरगर्मी से तलाश कर रही है। रमेश शर्मा की गिरफ्तारी के बाद ही यह साफ हो पाएगा कि इस नेटवर्क में और कौन-कौन से बड़े चेहरे शामिल हैं।
प्रशासन पर उठे गंभीर सवाल
विशेषज्ञों और अभ्यर्थियों ने इस घटना के बाद परीक्षा तंत्र की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए हैं:
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किस आधार पर मिला ठेका? जब कंपनी पहले से ब्लैकलिस्टेड थी और BPSC की रडार पर थी, तो उसे दोबारा इतना महत्वपूर्ण कार्य कैसे सौंपा गया?
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मिलीभगत की आशंका: क्या विभाग के भीतर किसी बड़े अधिकारी या मिलीभगत के बिना एक दागदार कंपनी को प्रवेश मिल सकता था?
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अन्य केंद्रों की सुरक्षा: यदि मुंगेर में ऐसी गड़बड़ी हो सकती है, तो प्रदेश के बाकी 745 केंद्रों पर सुरक्षा की क्या गारंटी है?
अभ्यर्थियों में आक्रोश और मांग
11 लाख अभ्यर्थियों और उनके अभिभावकों में गहरी चिंता और आक्रोश का माहौल है। सोशल मीडिया से लेकर सड़कों तक एक ही मांग गूँज रही है कि मामले की निष्पक्ष जांच हो और दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए। अभ्यर्थियों का कहना है कि उनकी वर्षों की मेहनत भ्रष्टाचार की भेंट नहीं चढ़नी चाहिए।
