पंजाब में विराट कांत के रूप में भाजपा को मिला नया राष्ट्रवादी ‘यूथ आइकन’

In Virat Kant, the BJP has found a new nationalist youth icon in Punjab.
 
पंजाब में विराट कांत के रूप में भाजपा को मिला नया राष्ट्रवादी ‘यूथ आइकन’

(महेन्द्र कुमार शर्मा - विनायक फीचर्स)

पंजाब की जटिल राजनीति में विराट कांत का भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में प्रवेश केवल एक राज्य स्तरीय घटना नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे राष्ट्रीय राजनीति के व्यापक परिप्रेक्ष्य में देखा जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार यह कदम उस दृष्टि का हिस्सा है, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ऐतिहासिक राष्ट्रवादी विरासत को आधुनिक, शिक्षित और ऊर्जावान युवा नेतृत्व के साथ जोड़ने का प्रयास कर रहे हैं। विराट कांत को कुछ राजनीतिक पर्यवेक्षक ‘उत्तर का तेजस्वी सूर्या’ कहकर संबोधित कर रहे हैं—एक ऐसा चेहरा जिसमें बौद्धिक प्रखरता और राष्ट्रवादी संस्कार दोनों का संगम दिखाई देता है।

गौरवशाली विरासत से जुड़ाव

विराट कांत उस परिवार से आते हैं जिसने भारत की स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए उल्लेखनीय योगदान दिया है। वे भारत के पूर्व उपराष्ट्रपति कृष्ण कांत के पोते और ‘पंजाब के गांधी’ कहे जाने वाले स्वतंत्रता सेनानी लाला अचिंत राम के पड़पोते हैं। लाला अचिंत राम संविधान सभा के सदस्य भी रहे, जिन्होंने स्वतंत्र भारत की संवैधानिक नींव के निर्माण में भूमिका निभाई।

विराट कांत इस विरासत को विशेषाधिकार नहीं, बल्कि दायित्व के रूप में देखते हैं। उनका कहना है, “मेरे परिवार ने पीढ़ियों से देश की सेवा की है, वही सेवा का जज्बा आज मेरा मार्गदर्शन कर रहा है।” युवा वर्ग, जो अवसरवादी राजनीति से निराश हो चुका है, उनकी ‘सेवा प्रथम’ की सोच में नई संभावनाएँ देख रहा है।

विचारधारा का ‘विकास’

विराट कांत के भाजपा में शामिल होने पर कुछ प्रश्न भी उठे, विशेषकर उनके दादा कृष्ण कांत के राजनीतिक रुख को लेकर। इस पर विराट का दृष्टिकोण परिपक्व और विश्लेषणात्मक है। वे इसे विचारधारा से विचलन नहीं, बल्कि समयानुकूल ‘विकास’ बताते हैं।

उनका मानना है कि हर दौर की चुनौतियाँ अलग होती हैं। उनके अनुसार आज भारत को स्थिर और निर्णायक नेतृत्व की आवश्यकता है, और वे मानते हैं कि ईमानदारी, राष्ट्रवाद और सुशासन के जिन मूल्यों के लिए उनके पूर्वज प्रतिबद्ध थे, वे वर्तमान नेतृत्व में उन्हें साकार होते दिखते हैं।

शैक्षणिक और पेशेवर पृष्ठभूमि

विराट कांत ने दिल्ली विश्वविद्यालय से कॉमर्स तथा पंजाब विश्वविद्यालय से विधि (एल.एल.बी.) की शिक्षा प्राप्त की है। वे पेशे से एक अधिवक्ता हैं और नीति-निर्माण में युवाओं की भागीदारी के पक्षधर माने जाते हैं।

उनकी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से हुई मुलाकात को भी औपचारिकता से परे बताया जा रहा है। विराट के अनुसार, इस दौरान युवाओं की भूमिका, नीति-निर्माण और राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भागीदारी जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई।

पंजाब के लिए विजन

पंजाब वर्तमान में नशे, कर्ज और संगठित अपराध जैसी चुनौतियों से जूझ रहा है। विराट कांत राज्य की मौजूदा आम आदमी पार्टी सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहते हैं कि प्रशासनिक तंत्र को अधिक स्वतंत्र और प्रभावी बनाने की आवश्यकता है।

वे केवल आलोचना तक सीमित नहीं रहते, बल्कि समाधान भी प्रस्तुत करते हैं—जैसे पुलिस तंत्र की स्वायत्तता, तकनीकी आधुनिकीकरण और कृषि क्षेत्र में विविधीकरण। किसानों के संदर्भ में वे न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की सुरक्षा के साथ-साथ कृषि को वैश्विक प्रतिस्पर्धा के अनुरूप ढालने की बात करते हैं।

‘न्यू इंडिया’ का प्रतीक?

राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि विराट कांत का उदय भाजपा की उस रणनीति का संकेत है, जिसमें शिक्षित, वैचारिक रूप से स्पष्ट और सामाजिक रूप से सक्रिय युवाओं को आगे बढ़ाया जा रहा है। वे स्वयं कहते हैं कि वे केवल नाम या विरासत के भरोसे नहीं, बल्कि जमीनी कार्य और जनसंपर्क के माध्यम से जनता का विश्वास अर्जित करना चाहते हैं।

आने वाले समय में यह देखना रोचक होगा कि विराट कांत पंजाब की राजनीति में किस प्रकार अपनी पहचान स्थापित करते हैं। फिलहाल, उनका भाजपा में प्रवेश राज्य और राष्ट्रीय राजनीति दोनों में एक नई चर्चा का विषय बना हुआ है।

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