कैंसर से लड़ाई में बोन मैरो ट्रांसप्लांट बना नई उम्मीद, मेदांता लखनऊ ने पूरे किए 100 सफल ट्रांसप्लांट
मेदांता हॉस्पिटल, लखनऊ के डायरेक्टर (हीमैटोलॉजी एवं बोन मैरो ट्रांसप्लांट) डॉ. अंशुल गुप्ता ने बताया कि यह उपलब्धि केवल एक आंकड़ा नहीं, बल्कि उन 100 परिवारों की उम्मीद और संघर्ष की कहानी है, जिन्होंने गंभीर बीमारी के खिलाफ लंबी लड़ाई लड़ी और सामान्य जीवन की ओर लौटने में सफलता पाई।
उन्होंने कहा कि प्रत्येक सफल बोन मैरो ट्रांसप्लांट के पीछे डॉक्टरों, नर्सों, लैब विशेषज्ञों, डोनर्स और मरीजों के परिजनों की सामूहिक मेहनत और समर्पण होता है। कई बार ऐसे डोनर्स भी सामने आते हैं, जो किसी अनजान मरीज को नया जीवन देने के लिए स्वेच्छा से मदद करते हैं।
डॉ. गुप्ता ने एक प्रेरणादायक उदाहरण साझा करते हुए बताया कि तीन वर्ष पहले 16 वर्षीय एक किशोरी को एक्यूट मायलॉयड ल्यूकेमिया (ब्लड कैंसर) का पता चला था। केवल कीमोथेरेपी से उसका इलाज संभव नहीं था, इसलिए बोन मैरो ट्रांसप्लांट का निर्णय लिया गया। उसके पिता हाफ-मैच डोनर बने और सफलतापूर्वक ट्रांसप्लांट किया गया।
ट्रांसप्लांट के बाद मरीज को लगभग दो महीने तक आइसोलेशन में रहना पड़ा। इलाज के तीसरे सप्ताह में संक्रमण की चुनौती भी सामने आई, लेकिन चिकित्सकों की सतत निगरानी और प्रभावी उपचार से स्थिति पर काबू पा लिया गया। करीब 60 दिनों बाद उसकी ब्लड रिपोर्ट सामान्य होने लगी और स्वास्थ्य में लगातार सुधार हुआ।
आज, ट्रांसप्लांट के तीन वर्ष बाद वह पूरी तरह स्वस्थ है। वह दिल्ली विश्वविद्यालय में स्नातक की पढ़ाई कर रही है और हाल ही में दिल्ली मैराथन में जीत हासिल कर अपनी बेहतर सेहत और फिटनेस का परिचय दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि बोन मैरो ट्रांसप्लांट अब कई प्रकार के ब्लड कैंसर और गंभीर रक्त संबंधी रोगों के इलाज में मरीजों के लिए नई उम्मीद बनकर उभर रहा है।
