पुस्तक समीक्षा: 'नमामि देवि नर्मदे' माँ नर्मदा की महिमा को समर्पित एक वैश्विक और अनूठा काव्य संग्रह
(विवेक रंजन श्रीवास्तव - विभूति फीचर्स)
पुण्यसलिला और देवनदी माँ नर्मदा की महिमा, सौंदर्य और उनकी आध्यात्मिक चेतना को समेटे हुए एक अद्भुत वैश्विक काव्य संकलन 'नमामि देवि नर्मदे' का प्रकाशन हुआ है। श्री मृत्युंजय आश्रम (अमरकंटक) से प्रकाशित और डॉ. सुनील परीट द्वारा संपादित यह ग्रंथ केवल शब्दों का संग्रह नहीं है, बल्कि माँ नर्मदा के प्रति देश-विदेश के रचनाकारों की अगाध श्रद्धा, अटूट भक्ति और संवेदनाओं का एक पवित्र प्रवाह है। इस पुस्तक के पन्नों में माँ नर्मदा का पावन स्वरूप पूरी जीवंतता के साथ उभरकर सामने आया है, जो सनातन धर्म की साहित्यिक विरासत को और अधिक समृद्ध बनाता है
एक सौ सड़सठ मौलिक कविताओं का अनूठा संगम
इस संग्रह में कुल 167 उत्कृष्ट और मौलिक कविताएं संकलित हैं। पुस्तक में शामिल प्रमुख रचनाकारों की अनुभूतियां इस प्रकार हैं:
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मुकेश कुमार ऋषि वर्मा: संग्रह की शुरुआत में कवि लिखते हैं कि “अमरकंठ से निकली तेरी महिमा अपरंपार है। सहज सरल ममता की मूरत तू वरदानी है।” यहाँ कवि ने नर्मदा को ममता की प्रतिमूर्ति बताते हुए उनके जल को लोक-कल्याणकारी अमृत के समान माना है।
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पण्डित अंशुल विश्वंभर मिश्र 'कदम': इनकी पंक्तियां नर्मदा के भौगोलिक और आध्यात्मिक सौंदर्य का अनूठा मेल कराती हैं— “भेड़ाघाट जबलपुर में बहती कल कल मातु नरमदे। शिव कन्या है नाम तुम्हारा देती है संबल।”
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डॉ. अरुणा अग्रवाल: नदी के पौराणिक और कष्टहरणी स्वरूप को रेखांकित करते हुए वे लिखती हैं— “नर्मदा मैया निकली हैं पुनीत अमरकंटक से। पाप ताप संताप हरे युगों युगों से है पूजित।” यह अंश दर्शाता है कि माँ नर्मदा युगों-युगों से मानवता के दुखों को दूर कर रही हैं।
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डॉ. परमानंद शुक्ल: नर्मदा को देश की धड़कन बताते हुए कवि लिखते हैं— “तुम केवल जलधारा नहीं संस्कृति की पहचान हो तुम। भारत की आत्मा में बसी अमर और महान हो तुम।” यहाँ नदी को केवल एक जलधारा न मानकर भारतीय संस्कृति की जीवंत पहचान के रूप में स्थापित किया गया है।
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वीरेंद्र कुमार साहू: प्रकृति के संगीतात्मक रूप और मानवीय कृतज्ञता को शब्दों में पिरोते हुए वे लिखते हैं— “सरिता की कल कल ध्वनि मधुर स्वर में तान सुनाती। नमामि देवी नर्मदे शत शत वंदन है।”
विशिष्ट प्रस्तुति और सांगीतिक संभावनाएँ
इस संकलन की प्रत्येक कविता अपने आप में अनूठी और गेय (गाने योग्य) है। कविताओं का प्रवाह ऐसा है कि इन्हें संगीत के साथ प्रस्तुत किया जा सकता है। ऐसी उम्मीद और विश्वास है कि भविष्य में संकलनकर्ता इस अनूठे काव्य संग्रह का एक सांगीतिक संस्करण तैयार कर उसे यूट्यूब (YouTube) जैसे प्लेटफॉर्म पर भी लाएंगे, ताकि यह मधुर प्रस्तुति जन-जन तक पहुँच सके।
पर्यावरण चेतना और भक्ति का अद्भुत संदेश
'नमामि देवि नर्मदे' संग्रह पाठकों के दिलों में न केवल भक्ति भाव जगाता है, बल्कि एक अत्यंत महत्वपूर्ण सामाजिक संदेश भी देता है। हम जानते हैं कि नर्मदा मध्य भारत की जीवनरेखा (Lifeline) हैं; ऐसे में उनके प्रति प्रदूषण-मुक्ति और पर्यावरण संरक्षण की चेतना जगाने में यह पुस्तक एक सामूहिक और बेहद सराहनीय साहित्यिक प्रयास है।
सरल, सुबोध और सीधे दिल को छू लेने वाली भाषा शैली के कारण यह पुस्तक बेहद प्रभावशाली बन पड़ी है। संपादक का यह प्रयास अत्यंत वंदनीय है। माँ नर्मदा से लगाव रखने वाले और साहित्य प्रेमियों के लिए यह पुस्तक अपने पुस्तकालय में सहेजकर रखने योग्य (संग्रहणीय) है।
