DU में 'विकसित भारत' पर मंथन: प्रो. निरंजन कुमार बोले- प्रधानमंत्री की परिकल्पना समृद्धि के साथ संस्कारों का संगम है
समृद्धि और संस्कार: विकसित भारत की नींव
उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए मूल्य संवर्धन पाठ्यक्रम समिति के अध्यक्ष प्रो. निरंजन कुमार ने भारत के गौरवशाली इतिहास का स्मरण कराया। उन्होंने ऐतिहासिक आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि पहली शताब्दी से लेकर 17वीं शताब्दी तक भारत दुनिया का सबसे विकसित राष्ट्र था।
प्रो. कुमार ने जोर देकर कहा, "आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत पुनः उसी गौरव को प्राप्त करने की ओर अग्रसर है। विकसित भारत की जो परिकल्पना प्रधानमंत्री ने प्रस्तुत की है, वह केवल आर्थिक समृद्धि तक सीमित नहीं है, बल्कि वह संस्कारयुक्त समृद्धि है। दिल्ली विश्वविद्यालय ने इसी दर्शन को ध्यान में रखते हुए अपना पाठ्यक्रम तैयार किया है।"
नकल नहीं, भारतीय राह से होगा विकास: कश्मीरी लाल
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि और स्वदेशी जागरण मंच के राष्ट्रीय संगठक कश्मीरी लाल ने विकास, पर्यावरण और विरासत के त्रिकोण पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि भारत को विकसित बनाने के लिए हमें अमेरिका या चीन मॉडल की नकल करने के बजाय 'भारतीय राह' बनानी होगी।
विलियम डेलरिंपल की पुस्तक 'द गोल्डन रोड' का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि कैसे भारत सदियों से विश्व की प्रगति का स्रोत रहा है। उन्होंने आज के युवाओं की प्रशंसा करते हुए कहा कि "आज का युवा अंकल चिप्स के साथ माइक्रो चिप्स और चरखे के साथ चंद्रयान की बात करता है।" उन्होंने भारतीय मेधा को विभिन्न क्षेत्रों में पेटेंट लेने के लिए प्रोत्साहित किया ताकि भारतीय ज्ञान संपदा पर दुनिया अपना दावा न कर सके।
प्रमुख बिंदु (Key Highlights):
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आयोजक: मूल्य संवर्धन पाठ्यक्रम समिति (VAC), दिल्ली विश्वविद्यालय।
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उद्देश्य: शिक्षकों का क्षमता संवर्धन (Capacity Building) ताकि वे छात्रों को 'विकसित भारत' के लक्ष्यों के प्रति प्रेरित कर सकें।
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तकनीकी सत्र: प्रो. प्रभात मित्तल, प्रो. सुरेंद्र कुमार, प्रो. रेखा सक्सेना, प्रो. रुपाली गोयंका और प्रो. रजनी साहनी जैसे शिक्षाविदों ने विभिन्न विषयों पर व्याख्यान दिए।
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मुख्य संदेश: विकास के साथ-साथ अपनी सांस्कृतिक विरासत और स्वदेशी नवाचार (Innovation) को बचाए रखना अनिवार्य है।
