राम मंदिर दान विवाद पर बृजभूषण शरण सिंह ने उठाए सवाल, निष्पक्ष जांच की मांग
बृजभूषण सिंह ने कहा कि राम जन्मभूमि आंदोलन के प्रमुख नेताओं में रहे विनय कटियार जैसे व्यक्ति यदि किसी मुद्दे पर सवाल खड़े कर रहे हैं, तो उसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उन्होंने संतोष दुबे द्वारा उठाए गए आरोपों का उल्लेख करते हुए कहा कि उनके कुछ प्रश्न विचारणीय हैं, हालांकि कई बार वे भावनात्मक होकर अपनी बात रखते हैं।

पूर्व सांसद ने कहा कि राम मंदिर निर्माण और उससे जुड़े चंदे के मुद्दे पर लगातार सवाल उठ रहे हैं। ऐसे में पूरे प्रकरण की पारदर्शी जांच होना आवश्यक है। उनका कहना था कि किसी भी विवाद के पीछे कुछ न कुछ आधार अवश्य होता है और इस मामले में सामने आ रही बातों को हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि अब यह मामला केवल ट्रस्ट तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसकी आंच केंद्र और प्रदेश सरकार तक भी पहुंच रही है। ऐसे में उन्हें विश्वास है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इस विषय की गंभीरता को समझते हुए सच्चाई सामने लाने के लिए आवश्यक कदम उठाएंगे।
बृजभूषण सिंह ने कहा कि इस विवाद से आम श्रद्धालुओं और राम भक्तों को निराशा हुई है। उनका मानना है कि यदि ट्रस्ट से जुड़े लोगों के खिलाफ दस्तावेज और आरोप सामने आ रहे हैं, तो स्वाभाविक रूप से लोगों के मन में सवाल पैदा होंगे।
राम जन्मभूमि आंदोलन में अपनी भूमिका का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि उनका छात्र जीवन अयोध्या में बीता और वे आंदोलन के शुरुआती दौर से उससे जुड़े रहे हैं। उन्होंने बताया कि लालकृष्ण आडवाणी की रथयात्रा के दौरान उन्होंने उनकी गाड़ी चलाई थी। वर्ष 1990 में कारसेवकों पर गोलीकांड से पहले उन्हें गिरफ्तार किया गया था। इसके अलावा बाबरी ढांचा विध्वंस मामले में जिन लोगों को आरोपी बनाया गया था, उनमें उनका नाम भी शामिल था।
उन्होंने कहा कि उन्होंने पहले भी संकेत दिया था कि यदि वे इस विषय पर खुलकर बोलेंगे तो कुछ लोगों को असहजता हो सकती है। हालांकि अब यह मामला सरकार के समक्ष है और उचित कार्रवाई की जिम्मेदारी भी सरकार की है।

पूर्व सांसद ने अयोध्या के राजनीतिक परिदृश्य का उल्लेख करते हुए कहा कि हाल के वर्षों में वहां जो परिस्थितियां बनीं, उनका असर चुनावी नतीजों पर भी देखने को मिला। उन्होंने कहा कि भाजपा को अयोध्या और आसपास की सीटों पर अपेक्षित सफलता नहीं मिली, जबकि राम मंदिर निर्माण के बाद राजनीतिक लाभ मिलने की उम्मीद की जा रही थी। उनके अनुसार, इस स्थिति की समीक्षा की जानी चाहिए ताकि कारणों को समझा जा सके।
